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[caption id="attachment_2147" align="alignleft"]सिद्धार्थ कलहंससिद्धार्थ कलहंस[/caption]उठो काहिलों छोड़ो खिचड़ी, मारो हाथ बिरयानी मा। दिल्ली प्रदेश के एक बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी ने 4 कुंतल बिरयानी बनवा कर वोटरों को खिला डाली। इसी पार्टी के उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के प्रत्याशी रिजवान जहीर के लिए काम कर रहे लोगों के दिन के मेन्यू में बिरयानी और शाम को सालन के साथ रोटी परोसी गयी। मेरठ में तो कई दलों के लोगों ने बिरयानी जम के खिलाई। खबर है कि बाटी चोखे पर संतोष कर लेने वाले पूवार्चंल के लोगों ने भी इस बार बिरयानी को तरजीह दी और दामी प्रत्याशी इसका इंतजाम करते देखे गए। सो बकरे की अम्मां ने चुनाव भर खैर मनाना ही बंद कर दिया। मनाती भी तो कब तक हर रोज हर मिनट कटना था।

सिद्धार्थ कलहंस

सिद्धार्थ कलहंसउठो काहिलों छोड़ो खिचड़ी, मारो हाथ बिरयानी मा। दिल्ली प्रदेश के एक बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी ने 4 कुंतल बिरयानी बनवा कर वोटरों को खिला डाली। इसी पार्टी के उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के प्रत्याशी रिजवान जहीर के लिए काम कर रहे लोगों के दिन के मेन्यू में बिरयानी और शाम को सालन के साथ रोटी परोसी गयी। मेरठ में तो कई दलों के लोगों ने बिरयानी जम के खिलाई। खबर है कि बाटी चोखे पर संतोष कर लेने वाले पूवार्चंल के लोगों ने भी इस बार बिरयानी को तरजीह दी और दामी प्रत्याशी इसका इंतजाम करते देखे गए। सो बकरे की अम्मां ने चुनाव भर खैर मनाना ही बंद कर दिया। मनाती भी तो कब तक हर रोज हर मिनट कटना था।

अब लखनऊ के लोग परेशान हैं कि यहां बिरयानी ही नही बंटी। सभी बड़े प्रत्याशी वैष्णव जो ठहरे। हां मतदान के पहले एक दल विशेष के प्रत्याशी की ओर से सब्जी लाने के काम आ सकने वाले झोले में सहेली और रंगबाज ब्रांड के दो देशी शराब के क्वार्टर हर गरीब मतदाता को जरुर बांटे गए। यहां मौके को भांप आखिर दिन बिरयानी परोसी गयी पर केवल कुशलता से चुनाव में लगने वालों को। मौलानाओं ने राजधानी लखनऊ में ही प्रेस वार्ता कर सारे मुसलमानों का एजेंडा तय करने का काम किया। 50 से ज्यादा मौलाना इस काम में जुटे। एक अखबार खबर देता है और खुद मुसलमान कहते हैं कि 10 लाख से 5000 तक पर मौलाना बिके और कुछ तो पंड़वे (भैंस का नवजात) की बिरयानी पर ही बिक गए।

मौके को भुनाने में चौथे खंभे के लोग कहां पीछे रहते। हालांकि इस बार उनके चेहरे पर थोड़ा उदासी थी। ज्यादातर जगहों पर मालिकान देश में लोकतंत्र कायम रखने का सौदा पहले ही कर चुके थे। सो बेचारे संवाददाता अधेले पर टूटे। कुशल नेताओं ने उनके दाम अलग-अलग लगाए पर भाव किसी को नही दिया। लोकतंत्र के इस महाकुंभ में में 45 दिन जनता जनार्दन के नाम रहे। मंहगी गाड़ी में घूमने वाले दरवाजे-दरवाजे पसीना बहाते नजर आए। गांवों में तो खूब तंज भी सहे। कहीं ताली तो कहीं गाली मिली। हां अपने आरामगाह मे जाकर उनने सबको गाली ही सुनायी। और ये भी कहा कि जीतने पर हिसाब बराबर कर दूंगा। पर क्या करें वोट का सवाल था सो सब सुनना पड़ा। मगर बिरयानी चुनाव में हिट रही। नेताजी जीतेंगे तो बिरयानी की दावत तो पक्की और अगर हार गए तो अंगूर की बेटी के साथ भी बिरयानी मौजूद होगी।


लेखक सिद्धार्थ कलहंस लखनऊ के पत्रकार हैं। इन दिनों बिजनेस स्टैंडर्ड, लखनऊ के प्रिंसिपल करेस्पांडेंट हैं। उनसे संपर्क करने के लिए [email protected] पर मेल कर सकते हैं या फिर 09336154024 पर फोन कर सकते हैं।

 

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