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जीयो क्रिकेट! देश को एक सूत्र में बांध दिया

अद्भुत.. अविस्मरणीय.. मेरे लिए तो अलौकिक.. ऐसा नजारा आज से पहले कभी नहीं देखा इस सरजमीं पर!!! यहीं पैदा हुआ, पला-बढ़ा, बचपन से लेकर आज तक के दौर में देश को अलग-अलग हालातों से गुजरते देखा.. लेकिन ऐसा अनुभव.. ऐसा दृश्य.. कभी आंखों के सामने पैदा नहीं हुआ.. पूरा देश जश्न में डूबा हुआ है.. कश्मीर से कन्याकुमारी तक और विदेशों में भी.. जहां-जहां भारतीय हैं.. होली-दीवाली-दशहरा सब एक साथ मनाए जा रहे हैं और हो भी क्यों न ??? क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में श्रीलंका को मात देकर 28 वर्षों के बाद देश में फिर से कप आया है.. बहार आ गई है.. जन्नत मिल गई हैं.. पांव जमीं पर नहीं हैं हमारे.. देश झूम रहा है.. गा रहा है.. खुशी के तराने… जीत के फसाने।

अद्भुत.. अविस्मरणीय.. मेरे लिए तो अलौकिक.. ऐसा नजारा आज से पहले कभी नहीं देखा इस सरजमीं पर!!! यहीं पैदा हुआ, पला-बढ़ा, बचपन से लेकर आज तक के दौर में देश को अलग-अलग हालातों से गुजरते देखा.. लेकिन ऐसा अनुभव.. ऐसा दृश्य.. कभी आंखों के सामने पैदा नहीं हुआ.. पूरा देश जश्न में डूबा हुआ है.. कश्मीर से कन्याकुमारी तक और विदेशों में भी.. जहां-जहां भारतीय हैं.. होली-दीवाली-दशहरा सब एक साथ मनाए जा रहे हैं और हो भी क्यों न ??? क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में श्रीलंका को मात देकर 28 वर्षों के बाद देश में फिर से कप आया है.. बहार आ गई है.. जन्नत मिल गई हैं.. पांव जमीं पर नहीं हैं हमारे.. देश झूम रहा है.. गा रहा है.. खुशी के तराने… जीत के फसाने।

आज दिख रहा है कि किस तरह एक जेंटलमैन गेम देश को जोड़ता है.. एक सूत्र में पिरोता है… भाषा की, तहजीब की, रस्मो-रिवाज की, मजहब की, जात-पात-जमात और अमीर-गरीब की सीमा से परे जाकर.. हर कोई मतवाला हो गया है.. सड़क पर उतर आया है.. मानो देश में कोई क्रांति हो गई है.. और ये सारे मतवाले इस क्रांति के एक-एक लम्हे को भरपूर जी रहे हैं। भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, जुनून है, दीवानगी है बल्कि इनसे कहीं बढ़के है, इस बात का एहसास आज शिद्दत से हो रहा है।

क्या आज से पहले आपने जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को एक ही रात में एक छत के नीचे अपनी मर्जी से इकट्ठा होते देखा है.. और जब वो मिल गया.. जिसकी चाहत हर दिल को थी.. तो इस पर उन्हें उसी समय मीडिया में दिल खोलकर अपनी राय-शुभकामना देते सुना है??? अगर नहीं, तो 2 अप्रैल, 2011 की तारीख को सुनहरे हरफों में लिख दीजिए, भारत के इतिहास में, क्योंकि आज ही वो दिन है, जब ऐसा सबकुछ इस देश ने देखा-सुना और महसूस किया है। आईपीएल टीम खरीदने वाली नीता अंबानी को आपने कब शान से तिरंगा लहराते देखा है.. और हमेशा बिजनेस-कारपोरेट वर्ल्ड की चिंता में डूबे रहने वाले मुकेश अंबानी को क्या आपने कभी किसी और मुद्दे पर तनाव में और चिंतन-मनन करते देखा है..???

हमेशा मीडिया से दूरी बनाए रखने वाले चाकलेटी आमिर खान को आपने कब अपनी बीवी के साथ पब्लिकली खुशी मनाते और रोमांचित होते देखा है.. सोनिया गांधी को आपने क्या कभी जश्न में अपने दोनों हाथ ऊपर लहराते देखा था!!! सलमान खान को आपने कब देखा है कि वो इतने खुश हुए, जब अपनी लग्जरी गाड़ी छोड़कर मुंबई की साधारण टैक्सी में निकल पड़े हों जीत का जश्न मनाने, वो भी गाड़ी खुद ड्राइव कर रहे हों.. फिर शाहरुख खान को क्या देश के खिलाड़ियों की जीत पर अपने घर से उसी रात बाहर आकर मीडिया में बधाई देते आपने इससे पहले देखा-सुना है.. अक्षय कुमार, प्रीति जिंटा और न जाने कितने कलाकार, गणमान्यजन और आमजन.. कोई पीछे नहीं था.. एक ऐसा आयोजन-ऐसा महामुकाबला जहां किसी को न्योता नहीं दिया गया था, लेकिन बीजेपी के लालकृष्ण आडवाणी से लेकर कांग्रेस के राहुल गांधी और उद्योगपति मुकेश अंबानी से लेकर सिद्धार्थ माल्या, सब यहां पहुंचे थे, अपनी खुशी से.. देशभर से सांसद, विधायक, लेखक, कलाप्रेमी-कलाकार, समाजसेवी और आम आदमी यानी समाज के हर क्षेत्र से जुड़े लोगों का तांता लगा हुआ था यहां पर, और सभी एक सुर में अपनी टीम को, टीम इंडिया को, धोनी के धुरंधरों को चीयर कर रहे थे। क्या यह नजारा दुर्लभ नहीं है????

अगर इतने से भी संतोष न हो, तो एक और घटना का जिक्र करता हूं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के बंगले के सामने मीडियाकर्मियों का जमघट लगा है। सब इंतजार कर रहे हैं कि कब जूनियर बच्चन आएं और टीम इंडिया की जीत पर दो शब्द कहें.. तभी उनके बंगले का बड़ा सा दरवाजा खुलता है और सामने अभिषेक बच्चन सफेद रंग की कार में बैठे नजर आते हैं.. लेकिन ये क्या.. अभिषेक अपनी कार की विशेष छत को खोलते हुए खड़े हो जाते हैं और बड़ा सा तिरंगा लहराने लगते हैं.. मीडिया वाले भी जोश में आ जाते हैं.. अभिषेक कभी तिरंगे को चूमते हैं और कभी लहराते हैं.. लेकिन जरा रुकिये, अभी कुछ और होना है.. अचानक से कार की छत खोलकर खड़े होते हैं बिग बी और जोश में हाथ हिलाकर सबका अभिवादन करते हैं.. टीम इंडिया को बधाई देते हैं.. वर्ल्ड कप में जीत को सेलिब्रेट करते हैं.. माहौल में एकबारगी फिर वहीं जोश-जुनून हावी हो जाता है.. फिर निकल जाता है बच्चन परिवार मुंबई की सड़कों पर.. जीत का जश्न मनाने.. आमलोगों के साथ.. आज कोई सेलिब्रिटी नहीं है.. कोई छोटा या बड़ा नहीं है.. सब सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तानी हैं.. उधर सारे क्रिकेटर्स के घर पर पटाखे फोड़े जा रहे हैं.. पंजाब में युवराज-भज्जी के घर पर ईद-दीवाली मन रही है तो रांची में धोनी के घर के आगे भी होली सा माहौल है.. दक्षिण भारत में श्रीसंत के गरीबखाने पर भी कोई जुदा माहौल नहीं है.. देशभर में क्रिकेट फैन्स जमकर पटाखे चला रहे हैं.. इतने पटाखे चल रहे हैं कि यहां दिल्ली में मेरे कमरे में धुआं भर गया है.. लोग नाच रहे हैं-गा रहे हैं.. एक-दूसरे से लिपट रहे हैं.. कह रहे हैं कि आखिर इस बार हमने जीत लिया मैदान.. दिखा दिया दुनिया को कि हम भी किसी से कम नहीं.. क्या इतना काफी नहीं है यह बताने के लिए कि यकीनन यह क्रिकेट ही है, जो इस अनेकता और विविधता वाले देश को अनायास ही आपस में जोड़ देता है-कनेक्ट कर देता है.. इसके लिए किसी राष्ट्रीय पार्टी की जरुरत नहीं पड़ती.. केन्द्र सरकार को कोई फरमान जारी नहीं करना होता.. बस, क्रिकेट का नाम लो और यहां की जनता खुद ब खुद अपने को एक अस्मिता से, एक राष्ट्र से-एक गणतंत्र से जोड़ लेती है। टीम इंडिया के पीछे खड़ी हो जाती है, एक ताकत बनकर, एक आवाज बनकर।

सचिन तेंडुलकर हमेशा कहा करते हैं कि वो कोई दसेक साल के रहे होंगे जब उन्होंने कपिल पाजी को क्रिकेट का वर्ल्ड कप अपने हाथों से उठाते और चूमते देखा था। सो अपने शानदार क्रिकेट करियर में वो भी इसी सपने को हकीकत का जामा पहनाना चाहते थे और आज इतिहास ने उन्हें यह मौका दे दिया यानी वीर भोग्या वसुंधरा। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि कपिल देव ने जो कर दिखाया था, उसी ने तब के नन्हे सचिन को इंस्पायर किया था, उस इतिहास को दोहराने के लिए। आज सचिन-धोनी एंड कंपनी ने वर्ल्ड कप चूम लिया है, सो आज टीवी पर इस ऐतिहासिक प्रसारण को देख रहे हजारों-लाखों बच्चों के मन में उन्होंने भी सपनों के कुछ बीज जरूर बोए होंगे। टीम इंडिया का यह कारनामा देखकर कइयों का जुनून और बढ़ेगा, भारत के अलग-अलग कोने से नए सौरभ-श्रीनाथ-श्रीकांत-भज्जी-सचिन और सहवाग पैदा होंगे, जो मैदान पर-पिच पर सिर्फ एक देश के लिए खेलेंगे, टीम इंडिया के लिए। धर्म-क्षेत्र-भाषा-वेशभूषा की नीति-राजनीति से इनका कोई वास्ता नहीं है। ये एकजुट है, सो इनकी बंद मुट्ठी में इतनी ताकत है कि वो देश की बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाल सकते हैं, उम्मीद की एक नई राह बना सकते हैं। क्रिकेट की यही ताकत गावस्कर-कपिल-सचिन और धोनी की ताकत है और अंततः देश की ताकत है। जेटलमैन गेम यहां आया तो बाहर से है लेकिन आज वो हर भारतीय की रगों में दौड़ रहा है, लहू बनकर, सपना बनकर-एक नई उम्मीद बनकर। और कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया कायम है…जियो क्रिकेट!!!!

लेखक नदीम एस अख्‍तर पत्रकार हैं.

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