मायावती ने वरुण गांधी पर रासुका कायम करवा कर ‘मास्टर स्ट्रोक’ मारा है। ये ऐसी करारी चाल है जिसने बीजेपी को
तो चारों खाने चित्त कर ही दिया है, मुलायम सिंह यादव के समीकरणों पर भी पानी फेर दिया है। माया ने अपने मायाजाल में फंसा लिया है बीजेपी और समाजवादी पार्टी को, साथ ही मुसलमान वोटरों की नई मसीहा बन कर उभरी हैं। मायावती ने बेहद सधी हुई चाल चली है। एक तीर से तीन-तीन निशाने साध लिए हैं। मुलायम के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध मार दी है। बीजेपी के हिंदू वोटों के जवाब में मुस्लिम वोटों का अपने पक्ष में ध्रुवीकरण करने में भी वो कामयाब रहीं हैं। इसके अलावा ऐसा सॉलिड इंतज़ाम किया है कि बीजेपी के फायर ब्रांड नेता बन कर उभर रहे वरुण गांधी की फायर जेल के भीतर ही ठंडी पड़ जाए और चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा न होने पाए।
पिछले 4 दिनों से वरुण गांधी के नाम को कैश करा रही बीजेपी को मायावती ने मारा डंक। कर दी ऐसी व्यवस्था कि बीजेपी की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई। हिंदू वोटरों को एक साथ लाने की बीजेपी की तमाम चालबाज़ी को करारा झटका दिया मायावती ने। कल्याण सिंह और उमा भारती की गैर-मौजूदगी में, बीजेपी पहले से ही ऐसे नेता की कमी से जूझ रही थी जो उसके हिंदू वोटरों को एक साथ ले आए। वरुण गांधी को इसी तर्ज पर तैयार किया जा रहा था कि एक तो गांधी का नाम दूसरा हिंदुत्ववादी काम। डबल पॉवर मान रही थी बीजेपी वरुण गांधी को लेकिन माया के हाथी ने बीजेपी के ताजिए ठंडे कर दिए।
मायावती सरकार ने पीलीभीत जेल में बंद वरुण गांधी पर चार संगीन आरोपों के तहत रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) की तामीली करवाई। पहला ये कि वरुण गांधी ने अपने उत्तेजक भाषणों से समाज में नफरत फैलाई। दूसरा, वरुण गांधी ने प्रशासन को गुमराह किया और सरेन्डर के लिए जाने वाले रास्ते को सोची-समझी साज़िश के तहत ऐन वक्त पर बदल दिया।
वरुण गांधी उस रास्ते से गए ही नहीं जो उन्होने पीलीभीत के एसएसपी को लिखित तौर पर बताया था और जो कोर्ट तक जाने का सबसे छोटा तथा मुफीद रास्ता था। तीसरा कारण ये कि वरुण गांधी ने अपने समर्थकों को जानबूझ कर उकसाया और उनके बहकावे में आकर ही समर्थकों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, दफा 144 का उल्लंघन किया, पुलिसकर्मियों पर हमला किया और जेल पर भी पथराव किया। चौथा और आखिरी कारण ये कि वरुण गांधी ने कानूनी मामलों में जानबूझ कर अड़चन डालीं जिससे लोकशांति और लोक-व्यवस्था को गंभीर ख़तरा पैदा हो गया था। भारतीय राजनीति में इमरजेंसी के बाद शायद ये पहला मौका होगा जब किसी नेता पर रासुका की तामीली करवाई गई हो, वो इतनी आनन-फानन में। वरुण गांधी पर 8 धाराएं पहले से ही लगी हैं। इनमें हत्या के प्रयास जैसा गैर-ज़मानती केस भी शामिल है। सरेंडर के बाद पीलीभीत जेल में बंद हैं वरुण गांधी। पहली रात ठीक से सो भी नहीं पाए थे बेचारे, अब मायावती की मेहरवानी से कम-से-कम 6 हफ्ते तो उन्हे जेल में रहना ही होगा। क्योंकि प्रावधान ये है कि जिस आरोपी को रासुका के तहत निरुद्ध किया जाता है उसे अधिकतम एक साल तक जेल में रखा जा सकता है, वो भी बगैर सुनवाई किए। मतलब ये हुआ कि वरुण गांधी को दूसरे मामलों में भले ही ज़मानत क्यों न मिल जाए, रासुका में ज़मानत नहीं मिल सकती। यानि हालात तो ये भी बन सकते हैं कि जेल में रह कर ही वरुण गांधी को चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़े।
आज पीलीभीत के डीएम ने वरुण गांधी पर रासुका लगाने की सिफारिश की। हाईकोर्ट से तुरत-फुरत आदेश आ गए। मजिस्ट्रेट साहब जेल में जाकर वरुण गांधी को ऑर्डर की कॉपी भी सौंप आए। यानि रविवार होने के बावजूद, ये मायावती सरकार की फूल-प्रूफ योजना ही थी जिसने वरुण गांधी और बीजेपी दोनों को बैक-फुट पर ला खड़ा किया। बीजेपी का दांव मायावती ने बीजेपी पर ही उलटा दिया। उस कहावत को चरितार्थ कर दिया जिसमें कहते हैं… चौबे छब्बे बनने गए, दुबे बन कर लौटे।
माया के मायाजाल में फंस कर बिलबिला रही है बीजेपी। उसे मायावती से इस कदम की तो उम्मीद ही नहीं रही होगी। अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अधिकतम 6 हफ्तों के भीतर एक एडवायज़री बोर्ड का गठन होगा। जिसमें कानून के जानकार और न्यायाधीश शामिल होंगे। इस बोर्ड के समक्ष उन आरोपों की समीक्षा की जाएगी जिनके आधार पर वरुण गांधी पर रासुका लगाई गई है। अगर, एडवायज़री बोर्ड भी मायावती सरकार की तरफ से वरुण गांधी के खिलाफ़ कायम किए गए आरोपों को सही पाती है तो वो रासुका की तामीली को हरी झंडी दे देगी। यानि उस दशा में मायावती अगर चाहें तो वो वरुण गांधी को ज्यादा से ज्यादा एक साल तक के लिए सलाखों के पीछे रख सकती हैं।
अच्छा काबिल-ए-गौर बात ये भी है कि मायावती सरकार ने आज रात का वक्त इसलिए चुना क्योंकि कल यानि सोमवार को वरुण गांधी को कोर्ट में पेश किया जाना है। दफा 307 के अलावा उन्हे बाकी के मामलों में ज़मानत मिलने की पूरी उम्मीद है। एक बार उन्हे ज़मानत मिल जाती तो वो हिंदुओं के एक ऐसे नेता के तौर पर उभर कर सामने आते जो हिंदू हित के लिए जेल गया। ये बीजेपी के लिए हिंदू वोटरों को एकजुट करने का सुनहरा मौका होता। इसीलिए माया सरकार ने कोर्ट में सुनवाई के पहले ही खेल कर दिया। ऐसी दफा लगा दी जिससे जेल के बाहर ही न आ पाएं वरुण गांधी। ज़ाहिर है मायावती के इस कदम के बाद कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी ताकतें हो-हल्ला करेंगी। धरना-प्रदर्शन भी होगा। बीजेपी जमकर विरोध करेगी। ऐसे में, अब सोमवार को मायावती चाहेंगी
कि वरुण गांधी को कोर्ट में पेश ही न किया जाए। इसके विकल्प के तौर पर मजिस्ट्रेट को जेल में ही बुला लिया जाए और वहीं पर सुनवाई कर फैसला करवा लिया जाए। पूछे जाने पर कानून व्यवस्था और शांति को ख़तरा होने की आशंका को वजह बता दिया जाए। हालांकि वरुण गांधी के वकील प्रशांत अटल ने भरोसा जताया है कि वरुण गांधी को कल ज़मानत मिल जाएगी लेकिन कैसे मिल पाएगी, ये वो भी नहीं बता पाए।
इसी बीच, पीलीभीत में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 4 कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स और 4 कंपनी पीएसी की तैनाती कर दी गई है। इधर लखनऊ में मायावती सरकार के डीजीपी विक्रम सिंह और सूचना सचिव विजय शंकर पाण्डे वरुण गांधी पर रासुका लगाने का ऐलान कर रहे थे तो दूसरी तरफ पीलीभीत में सशस्त्र बलों का फ्लैग मार्च हो रहा था। यानि माया के मंसूबे बेहद साफ हैं और रणनीति पुख्ता। वक्त भी उन्होने बेहद मुफीद चुना है और तरीका भी। इस चाल से मुलायम के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा दी है और बीजेपी को चारों खाने चित्त कर दिया है। खुद मुसलमानों की मसीहा बन गईं सो अलग से। अब देखना ये है कि बीजेपी और समाजवादी पार्टी माया के मायाजाल से कैसे बाहर निकलती हैं?
लेखक अतुल अग्रवाल ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ न्यूज़ चैनल में सीनियर एंकर हैं और ‘वीओआई राजस्थान’ के हैड भी हैं। इसके पहले आईबीएन7, ज़ी न्यूज़, डीडी न्यूज़ और न्यूज़24 में काम कर चुके हैं। इनसे इनके मोबाइल नंबर 9910021189 या फिर ई-मेल [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।

