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अमन वतन के बनल रहे

अमन वतन के बनल रहे बस, हवा में थिरकन बनल रहे बस।[caption id="attachment_2111" align="alignright"]मनोज भावुकमनोज भावुक[/caption]

इहे बा ख्वाहिश वतन के धरती, वतन के कन-कन बनल रहे बस।।

मनोज भावुक

अमन वतन के बनल रहे बस, हवा में थिरकन बनल रहे बस।

मनोज भावुक

इहे बा ख्वाहिश वतन के धरती, वतन के कन-कन बनल रहे बस।।

हजार गम भी सहे के दम बा, तोहार चाहत बनल रहे बस।

बनल रहीं हम हिया में तहरा, हिया के धड़कन बनल रहे बस।।

रहे न केहू वतन में बेघर, रहे न केहू वतन में भूखा।

सभे के रोटी, सभे के कपड़ा, सभे के जीवन बनल रहे बस।।

नजर में देखत पता लगा लीं, कि उनका मन के हिसाब का बा।

इहे तमन्ना बा आखिरी बस, नजर के दरपन बनल रहे बस।।

हजार सपना सजा के मन में, निकल पड़ल बा सफर में ‘भावुक’।

सफर के मंजिल मिले, मिले ना, नयन में सावन बनल रहे बस।।


कटा के सर जे आपन…

झंडा

कटा के सर जे आपन देश के इज्जत बचवले बा।

नमन वो पूत के जे दूध के कर्जा सधवले बा।।

बेकारी, भूख आ एह डिग्रियन के लाश के बोझा।

जवानी में ही केतना लोग के बूढ़ा बनवले बा।।

कहीं तू भूल मत जइहऽ शहर के रंग में हमके।

चले का बेर घर से ई केहू किरिया खियवले बा।।

सँभल के तू तनी केहू से करिहऽ प्यार ए ‘भावुक’।

जरतुआ लोग इहँवों हाथ में पत्थर उठवले बा।।


मनोज ‘भावुक’ इन दिनों ‘हमार टीवी’ में प्रोग्राम प्रोड्यूसर हैं। उनके बारे में  ज्यादा जानकारी www.manojbhawuk.com पर जाकर पा सकते हैं। मनोज से संपर्क  करने के लिए [email protected] पर मेल कर सकते हैं।

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