पिछले 14 दिनों से न्यूज चैनलों ने सबसे ज्यादा किस खबर को तवज्जो दी है? बता पाएंगे? चलिए बता देते हैं. पाकिस्तान, तालिबान और फिजा-चांद की कहानी. जी हां. देश-दुनिया की दूसरी खबरों के साथ फिजा और चांद की कहानी सारे न्यूज चैनलों पर छाई रही. शायद ही ऐसा कोई चैनल होगा जिसने इस खबर पर लगभग हर रोजा आधा या एक घंटा अपने प्राइम टाइम पर न दिया हो. ये अलग बात है कि न ये इतनी बड़ी खबर थी और न ही इसको इतना टाइम देने का कोई तुक समझ में आता है. सबसे बड़ी बात ये है कि चांद ने तो भले ही मीडिया से रूबरू होकर कम बात की हो लेकिन फिजा हर रोज मीडिया से रूबरू थी। वे मीडिया को रिपोर्टिंग के तरीके के बता रही थीं।
वे मीडिया को बात करने का सलीका भी सिखा रही थी. तिस पर भी मीडिया था कि पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था. टीवी की दुनिया के लोग दिन-रात भर फिजा के घर के बाहर बिता रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से मीडिया की कुछ टीमें चंद्रमोहन के पिता के पंचकुला स्थित घर के बाहर भी खड़े हो रही हैं. इस उम्मीद के साथ की शायद चांद मोहम्मद चंद्रमोहन बनकर अपनी घर वापसी कर लें.
फिजा ने पिछले सोमवार को ये खुलासा किया था की उनके चांद का अपहरण हो गया है. हालांकि बाद में खुद चांद ने सफाई दी कि उनका अपहरण नहीं हुआ है बल्कि वो अपनी मर्जी से गये हैं. इसके बाद जो कहानी शुरू हुई है उसका कोई जवाब नही है। कहानी अब तक चैनलों पर छाई हुई है. इस घटनाक्रम की इतिश्री कब होगी, फिलहाल कहना मुश्किल है. इस प्रकरण को लगातार दिखाने के चलते भले ही मीडिया पर सवाल उठ रहे हों लेकिन सच ये है कि इस कहानी में वो सब कुछ है जिसे न्यूज मसाला कहा जाता है. आजकल यही बिकता है और साथ ही टीआरपी भी देता ही और ये तो कटु सत्य है कि जहां टीआरपी है वहीं मीडिया भी है.
फिजा के घर के बाहर खड़े मीडिया के लोग अब हालांकि उकताने लगे हैं लेकिन मजबूरी है कि वहां से हट भी नहीं सकते क्यूंकि फिजा कब क्या बयान दे दे, कुछ नहीं कहा जा सकता. मजेदार यह भी है कि फिजा जब भी मीडिया से रूबरू होती हैं तो कोई न कोई ऐसी बात हो जाती है जिसे लेकर मीडिया और फिजा में बहस भी हो जाती है और फिर फिजा मीडिया को नसीहत भी देती दिखती हैं. मीडियाकर्मी नेताओं या सेलेब्रेटीज से भले ही भिड़ने के बाद वाक आउट कर देता हो लेकिन फिजा के मामले में ऐसा नही है. कुछ भी हो जाए, यहां से कोई हट नहीं सकता क्यूंकि खबर में मसाला है. अभी तो कुछ बातें और मैसेज ही सामने आए हैं आगे बहुत कुछ सामने आना बाकी है. यही डर फिजा की बदतमीजी के बावजूद भी मीडिया को उनके घर के बहार रोके हुए है. एक और बड़ी बात इस मामले में सामने आई है कि सबसे पहले खबर और सबसे अलग करने के चक्कर में मीडियाकर्मी आपस में भिड़ भी रहे हैं.
फिजा और भजनलाल के घर के बाहर खड़े मीडियाकर्मी अक्सर इस बात पर चर्चा करते हैं कि इस मामले में सीधे तौर पर मीडिया का इस्तेमाल हो रहा है. जैसा की मीडिया के बारे में कहा भी गया है, एक ऐसी बात जिसे लिखना गलत है और एक मीडियाकर्मी होने के नाते मैं यहां उस बात को लिख भी नही सकता. लेकिन इस सबके बावजूद मजबूरी है कि खबर के लिए डटे रहना है. चांद की बात को अगर छोड़ भी दें तो भी फिजा इस बात को समझ चुकी हैं कि मीडिया को फिलहाल उनकी जरूरत है और उनके घर के बाहर लगा मीडिया का मजमा अभी कुछ दिन तो जारी रहेगा ही. लेकिन वो शायद ये भूल रही हैं कि अगर मीडिया किसी को हीरो बनाता है तो उसे जीरो बनाने में देर नहीं लगती. कहीं ऐसा न हो कि जब मीडिया अपनी पर आए तो फिजा का साथ देने वाला कोई न हो. अभी उन्होंने चांद के मैसेज मीडिया को दिखाए हैं. क्या चांद के पास मसाला नही है. हो सकता है आने वाले दिनों में वो भी ऐसे ही कुछ मसाला लेकर मीडिया के सामने हो तो क्या तब भी फिजा का व्यवहार मीडिया को लेकर ऐसा ही रहेगा जैसा आजकल चल रहा है.
लेखक आदित्य चौधरी पिछले 10 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। वे चंडीगढ़ में टीवी पत्रकार हैं। इन दिनों वे नए लांच होने वाले टीवी चैनल ‘टाइम टुडे’ में बतौर न्यूज एडीटर कार्यरत हैं। उनसे [email protected] के जरिए संपर्क किया जा सकता है।

