हम, माँ भारती के सपूत ”अमर शहीद नाथूराम गोडसे जी” के वैचारिक वंशजों का, एक मात्र उद्देश्य है केन्द्र में सरकार बनाना। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हमारे ”परिवार ने” देश के सबसे बड़े एवं प्रभावशाली बाबा को माध्यम बनाया पर केन्द्र की जलनखोर सरकार ने आंसूगैस के गोले छोड़कर रामलीला मैदान को जबरदस्ती खाली करवा लिया। पुलिस ने क्या, क्यों और कितना किया ये हम गोडसेवादी, देश की जनता को अपने हिसाब से बताने को स्वतंत्र हैं। हमारे बाबा जी, ”भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव जैसे बुजदिलों” के विपरीत अगर खून पसीने से बनाये अपने साम्राज्य को बचाने/ भोगते रहने के लिए स्त्री अवतार धारण कर बेवकूफ जनता को मर्यादा पुरूषोत्तम के भरोसे छोड़कर चुपके से निकल लेते है तो इस देश के बुद्धिजीवियों, मीडिया, राजनैतिक दलों और आम आदमी को क्यों तकलीफ हो रही है।
इन सबको अप्रैल- मई 2014 तक वहीं देखना, सुनना और समझना चाहिए जो हम बतायेंगे। एक बात और इन सबको कांग्रेस के उस चौकीदार दिग्विजय सिंह की तरह हमारी हर छोटी बड़ी हरकत पर नजर गड़ाये नहीं रखना चाहिए। अब रामलीला मैदान की घटना के विरोध में हमने राजघाट पर गांधी की समाधि पर एक दिवसीय ”सत्याग्रह” कार्यक्रम रखा और वहां सत्ता के खिलाफ लोगों में आक्रोश पैदा कर पाने की खुशी में तथा हमारे कार्यकर्ताओं में जोश भरने के उद्देश्य से हमने देश भक्ति गीतों पर ”अपनी कॉलगेटी मुस्कान” दिखाते हुए (छुपाने वालों में से हम नहीं) तल्लीनता से नृत्य आराधाना की। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वहीं चम्पी से मालिश भी करवाई (वह भी चोरी छुपे नहीं किया)। हमारे ऐसे कृत्यों को डाबरमैन की तरह देखने और सूंघने से लोकतंत्र कैसे मजबूत होगा, बताइये।
”मोहब्बत एवं जंग में सब जायज होता है” की तर्ज पर जब हम इंदिरा, सोनिया ओर शीला के द्वारा विभिन्न अवसरों पर नाच करने की बात, इंटरनेट पर मौजूद होने की बात करते हैं तो इस देश की 121 करोड़ जनता को ”राष्ट्रहित में” ये बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि जरूर इन तीन देवियों ने भी अत्याचार और दमन के खिलाफ विरोध प्रकट करने ”उनके राष्ट्रपिता” की समाधि पर या और किसी अन्य महत्वपूर्ण स्थान पर ऐसा ही डांस किया होगा। और हां, देश के संविधान में ये कहां लिखा है कि उस गांधी की तरह हर नेता को आवश्यक रूप से वो हर बात आत्मसात करनी पड़ेगी जिसका वे प्रचार करना चाहेंगे। संविधान में ये भी कहां लिखा है कि ऐसे मुद्दों एवं ऐसे पवित्र स्थल पर देश के नेता-प्रतिपक्ष को इस तरह से नृत्य आराधना की इजाजत नहीं है। हम इस देश में जहाँ चाहेंगे वहां अपनी आखरी सांस तक देश भक्ति के गीत गायेंगे और उन पर झूमेंगे भी। सनद रहे।
लेखक भूजीत दोषी रायपुर के निवासी तथा स्वतंत्र पत्रकार और टिप्पणीकार हैं.

