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72% लोगों की राय मानिए

आतंकवाद और मीडिया
                            आतंकवादी घटनाओं के दौरान लाईव प्रसारण कितना सही –
                                                       कितना गलत?आतंकवाद और मीडिया
                         (मीडिया मंत्र और मीडिया खबर.कॉम का संयुक्त सर्वे)

मुंबई में हुई आतंकवादी घटनाओं ने देश को स्तब्ध कर दिया। इस घटना के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी एजेंसियों पर भी सवालिया निशान खड़े किए गए। इन सबके बीच मीडिया और उसमें भी खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका को लेकर एक नए सिरे से आलोचना – प्रत्यालोचना का दौर शुरू हो गया। इस घटना को लेकर आलोचक जहाँ आलोचना करने से नहीं चुक रहे हैं। वहीं टेलीविजन प्रशासक इसे टेलीविजन न्यूज़ के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना मान रहे है और अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। क्या वाकई में मुंबई में हुई आतंकवादी घटनाओं के दौरान चैनलों ने जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग की। या फिर सच वो है जो आलोचक कहते हैं। आखिर सच क्या?  देश के आमलोगों की इस बारे में क्या राय है। इन्ही सब सवालों को जानने के लिए मीडिया मंत्र और मीडिया खबर.कॉम ने मिलकर एक ख़ास सर्वे किया।

इसमें न्यूज़ चैनलों की भूमिका से लेकर उसके चाल- चरित्र और दिशा के बारे में सवाल किया गया। चैनलों के प्रति सरकार का क्या रवैया होना चाहिए। क्या सरकार को चैनलों के प्रति और सख्त होना चाहिए। ऐसे सवालों को भी सर्वे में शामिल किया गया। सर्वे में अलग-अलग वर्ग और पेशे के लोग शामिल हुए। इसके अलावा बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी और पत्रकारों ने भी इसमें भाग लिया। मुख्य रूप से इस सर्वे को ऑनलाइन माध्यम से किया गया, लेकिन इसके अलावा व्यक्तिगत स्तर पर भी जाकर लोगों से हमनेसर्वे का फार्म भरवाया। व्यक्तिगत स्तर पर लगभग 30% लोगों ने इस सर्वे में भाग लिया। सर्वे में कुल 3,748 लोगों ने भाग लिया।

सर्वे के कुछ परिणाम चौकाने वाले रहे तो कुछ आशातीत रहे। मुंबई घटनाओं के संदर्भ में लगभग 72% लोगों ने इन घटनाओं के सीधे प्रसारण को अनुचित माना. सबसे बेहतरीन रिपोर्टिंग के लिए एनडीटीवी को सबसे ज्यादा वोट मिले वहीं सबसे खराब रिपोर्टिंग केमामले में इंडिया टीवी को सबसे ज्यादा मत मिले।

गैरजिम्मेदार चैनलों पर प्रतिबंध लगना चाहिए या नए कानून की जरूरत है इस संबंध में चैनलों के खिलाफ लोगों ने वोट किया। यह इस सर्वे का सबसे चैकाने वाला पहलू रहा। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि कहीं-न-कहीं पब्लिक में भी न्यूज चैनलों को लेकर रोष है। इंडिया टीवी के द्वारा आतंकवादी के लाईव फोनों को दिखाने को 72% लोगों ने गलत माना वहीं 59% लोगों ने यह माना कि यदि घटना का लाइव प्रसारण नहीं किया जाता तो मुठभेड़ इतनी लंबी नही चलती और आतंकवादियों को जल्दी मार गिराया जाता.
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