आज सामने एक सज्जन बैठे थे. गले में प्रेस का पट्टा लटकाए. ध्यान से देखा तो उस पर संस्थान का नाम लिखा था मां न्यूज. मैंने कहा कि साला ये कौन सा नाम है मां न्यूज. बगल में बैठे साथी से कहा कि देखो जिसको जो मन कर रहा है वही नाम अपने संस्थान का रख दे रहा है. उन्होंने मां न्यूज रखा है, कल कोई बाप न्यूज रखेगा, परसों देवर, जेठानी भौजाई, पड़ोसन, साला,आदि नाम रखे जाएंगे.अभी मैं बोल ही रहा था कि मां न्यूज वाले सज्जन ने मुझे टोका. कहा, देखिए ज़नाब आप मां न्यूज का मजाक उड़ाएं इस पर मुझे गंभीर आपत्ति है.
बाकी का तो मैं नहीं जानता लेकिन आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूं कि बाप न्यूज भी मैंने रजिस्टर करवा लिया है. मैंने कहा कि क्षमा करें लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं, कि आपने इस प्रकार का नाम क्यों रखा. वो बताने लगे देखिए, यह नाम ऐसे ही नहीं रखा गया है कि इसके पीछे गहरा अर्थ है, पता नहीं आप समझ पाएंगे की नहीं.मैं समझ गया था कि भाई नाराज़ हो गया है. मैंने कहा नहीं-नहीं आप बताएं, मैं समझने की कोशिश करुंगा. उन्होंने बताना शुरु किया. देखिए यह नाम (मां न्यूज) मैंने इसलिए रखा क्योंकि मां से हम भारतीयों का गहरा जुड़ाव होता है. इससे फायदा ये होगा कि चैनल से लोग भावनात्मक तरीके से जुड़ जाएंगे. और चूंकि भारतीय परंपरा में मां का त्याग करना सबसे बड़ा अपराध है इसलिए लोग कभी इस चैनल से दूर नहीं होंगे. है न कमाल का आईडिया. हमने एक पंचलाइन भी बनाई है ” मां से सच्चा प्रेम करने वालों का एकमात्र चैनल मां न्यूज़.” अब आप बताइए किसकी हिम्मत है जो इस चैनल को इग्नोर करे. बामपंथी हो या दक्षिणपंथी सभी प्रेम से देखेंगे, क्योंकि सबको मां से लगाव है.
मैंने कहा कि बाप न्यूज़ के पीछे भी कुछ इसी प्रकार की महान सोच रही होगी आपकी. उन्होंने कहा बिलकुल. अब मेरी बातें शायद आपके भेजे में जा रही हैं. चेहरा देखकर तो लगा कि लौट कर वापस आ जाएंगी.( समझ नहीं आया कि इस बात पर मैं क्या प्रतिक्रिया दूं). उन्होंने बताना शुरु किया. देखिए, बाप एक टफ आदमी होता है. बच्चों को टाइट किए रखना उसका परम धर्म है. ऐसा लगता है कि मानों भगवान से कहकर आया हो कि भगवन मैं अपने बच्चों से कभी हंस के नहीं मिलूंगा, चाहें बच्चे के 99 फीसदी मार्क्स ही क्यों न ले आए हों. फिर भी उनसे प्रसन्न नहीं रहूंगा, चेहरे पर हत्यारी का भाव लिए कहूंगा, ज्यादा उड़ो मत, इससे भी बेहतर तुम कर सकते थे, लेकिन घूमने और सनिमा देखने से फुर्सत मिले तब न पढ़ाई हो. बस रात दिन घुमक्कड़ी और आवारागर्दी. एक फीसदी नंबर नहीं ला पाए. लाएंगे भी कैसे बचपने में ही आंखों पर प्यार का मलम्मा जो चढ़ गया है. पत्नी को जीवन भर कोसता रहूंगा कि तुम्हीं ने बिगाड़ के रखा है.
समय-समय पर अपने उस पुराने दुश्मन हिरामन की याद में उन्हें पीट-पाट भी दिया करुंगा, जिसने बचपन में मुझे चौराहे पर धोया था. वहां का गुस्सा मैं यहां निकालूंगा. ज़नाब ठीक उसी पिता की तरह अपने बाप न्यूज़ का भी कलेवर रहेगा. कठोरतम. किसी कि भी यह चैनल नहीं सुनेगा. चूंकि देश में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, इसलिए जिस को मन करेगा उसके निपटा देंगे. तथ्य और प्रमाण संग्रह में समय बर्बाद करने की बजाय हम गाली देने में यकीन रखेंगे. एक बात और हालांकि आपने सोचा नहीं होगा इसलिए आपको बता दूं कि देखिए अपने देश में फायरब्रांड नेता तो हैं लेकिन फायरब्रांड चैनल नहीं. जिसकी खबरें समाज में आग लगा दें. इस कमी को बाप चैनल पूरा करेगा. कैसा लगा हमारा आईडिया. हो गई न बोलती बंद तब से खींसे निपोर रहे थे.
लेखक बृजेश सिंह मध्य प्रदेश में तहलका से जुड़े हुए हैं.

