पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार 26 जुलाई को भारत दौरे पर आईं और भारतीय विदेश मंत्री एस एम कृष्णा सहित विभिन्न भारतीय नेताओं से कई दिनों तक द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की। भारतीय मीडिया ने हिना रब्बानी के इस दौरे में काफी दिलचस्पी दिखाई और विशेषकर उन्हें खासी तरजीह दी। चाहे वह प्रिंट मीडिया हो, चैनल हों या फिर इंटरनेट का न्यू मीडिया। हर जगह हिना रब्बानी छाईं रहीं। अखबारों में छपने वाले कार्टूनों में भी इन तीन दिनों उनको खूब तरजीह मिली। यही नहीं विभिन्न सोशल नेटवर्क साइटों पर भी हिना की ही चर्चा होती रही। हिना की बड़ी बड़ी तस्वीरों को अखबार के पन्नों पर जगह मिली। लेकिन अधिक चर्चा हुई हिना रब्बानी के खूबसूरती, उनके फैशन सेंस आदि को लेकर।
उन्हें फैशन आइकन के रूप में प्रस्तुत किया गया। कई जगह तो हद भी टूटी जब कार्टूनों में नेताओं को हिना की खूबसूरती पर फिदा होते ही नहीं लार टपकाते भी दिखाया गया। कई जगह तो तस्वीरों के मसालेदार या यों कहें कि द्विअर्थी कैप्शन लगाए गए। इन सबके बीच भारत- पाक के द्विपक्षीय मुद्दे कहीं दब से गए। मीडिया ने उनके विचारों को शायद ही कहीं जगह दी। ऐसा नहीं है कि इन पर हिना रब्बानी की नजर न गई हो। पाकिस्तान लौटने के बाद लाहौर में उन्होंने भारतीय मीडिया पर अपनी नाराजगी भी जताई। अधिकांश भारतीय टेलीविजन व समाचार पत्रों ने उन्हें फैशन आइकन के रूप में पेश किया, जिसके कारण उन्हें गुस्सा आ गया, उन्होंने मीडिया की चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।
यहां सवाल यह उठता है कि भारतीय मीडिया भारत-पाक जैसे द्विपक्षीय मुद्दों को इतने हल्के से लेती रही। सवाल यह भी है कि क्या हिना रब्बानी खूबसूरत न होती या उनका फैशन सेंस बेहतर न होता तो क्या भारतीय मीडिया एक पाक विदेश मंत्री को इसी तरीके से तरजीह देती। भारतीय मीडिया के इस छिछोरेपन से अंतराष्ट्रीय पटल पर भी भारतीय मीडिया की छवि धूमिल हुई है। खासकर हिना रब्बानी के अपने देश लौटकर भारतीय मीडिया से नाराजगी जताने के बाद। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान महासंग्राम, पाक फतह, विश्वयुद्ध जैसी चर्चाओं को लेकर पाक कप्तान आफरीदी भी भारतीय मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर चुके हैं। तब उनके बड़बोलेपन को लेकर ही भारत में उल्टा उनपर ही नाराजगी जताई गयी।
लेखिका लीना मीडियामोरचा की संपादक हैं.

