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राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के कोशीथल गांव में दलित-मुस्लिम एकता का आगाज़

राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के कोशीथल गांव में दलित-मुस्लिम एकता का आगाज़ हुआ है। यहां हिन्दू व मुस्लिम वर्ग के लोग भाईचारे से रहते आए है। गांव में मजदूर, किसान व व्यापारी रहते है। धर्म के आधार पर गांव के किसी शुद्ध हिन्दू किसान, हिन्दू व्यापारी, हिन्दू मजदूर या दलित हिन्दू ने कभी किसी मुस्लिम पर अत्याचार नहीं किया। गर्व की बात है कि यहां हिन्दू-मुस्लिम झगड़े का एक भी मामला अब तक सामने नहीं आया है। मुस्लिम लोगों पर अत्याचार की कुछ घटनाएं हुई लेकिन वो कथित हिन्दूओं द्वारा की गई थी जो एक कथित हिन्दू संगठन से जुड़े हुए है।

राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के कोशीथल गांव में दलित-मुस्लिम एकता का आगाज़ हुआ है। यहां हिन्दू व मुस्लिम वर्ग के लोग भाईचारे से रहते आए है। गांव में मजदूर, किसान व व्यापारी रहते है। धर्म के आधार पर गांव के किसी शुद्ध हिन्दू किसान, हिन्दू व्यापारी, हिन्दू मजदूर या दलित हिन्दू ने कभी किसी मुस्लिम पर अत्याचार नहीं किया। गर्व की बात है कि यहां हिन्दू-मुस्लिम झगड़े का एक भी मामला अब तक सामने नहीं आया है। मुस्लिम लोगों पर अत्याचार की कुछ घटनाएं हुई लेकिन वो कथित हिन्दूओं द्वारा की गई थी जो एक कथित हिन्दू संगठन से जुड़े हुए है।

गांव के मुख्य चौराहें में हिन्दू व मुस्लिम समुदाय के कई लोग व्यापार करते है। बसस्टेण्ड़ पर स्थित दूकानों में से अधिकतर पर सवर्णों का आधिपत्य है। बसस्टेण्ड़ पर कथित हिन्दूवादी ताकतें सक्रिय है। कुछ दूकानें मुस्लिमों की भी है, लेकिन वो इन लोगों के आगे लाचार है। कई दलित व मुस्लिम युवा लकड़ी के केबिनों में गैराज चलाते है। गौर करने योग्य है कि मोदी सरकार बनने के बाद से गांव में एक हिन्दूवादी संगठन सक्रिय हुआ। इस संगठन में वे तमाम आवारागर्दी करने वाले युवक जुड़े जो आए दिन गांव में आंतक मचाते रहते हैं। कभी शराब पीकर बसस्टेण्ड़ पर धमाल करना, दूकानों से सामान लेकर दूकानदार को पैसा नहीं देना। दादागिरी करना। इसका एक कथित बड़ा मुखिया तो अपने चौपहियां वाहन को बसस्टेण्ड़ पर इतनी तेज गति से लाकर गोल-गोल घुमाता है जैसे कोई साउथ की फिल्म़ का हिरो हो। असल में वो अपना रूतबा दिखाना चाहता है जबकि गांव के लोग ऐसे रूतबे 10 रूपए का टिकिट खरीद कर मेलों में लगने वाले सर्कस में खूब देखते आए है।

एक तथ्य स्पष्ट है कि यहां के दलित व मुस्लिम अमन पसंद है। वे ऐसे उत्पात मचाने वाले संगठनों से कभी नहीं जुड़े। कुछ दलित युवाओं को भ्रमित कर उन्हें इस संगठन से जोड़ दिया गया था लेकिन धीरे-धीरे वे इससे अलग हो गए। इस कथित हिन्दूवादी संगठन से जुड़े आवारा युवक आए दिन बसस्टेण्ड़ पर धमाल करते है जैसे इस संगठन के सदस्य ने एक दूकानदार से कुछ सामान लिया। दूकानदार ने सामान के रूपए मांगे तो उसने उसके साथ मारपीट कर दी। दूकानदार के पक्ष में बोलने पर एक अल्पसंख्यक युवक की भी पिटाई कर दी। कुछ देर बाद उसके अन्य साथियों ने बसस्टेण्ड़ पर आकर अल्पसंख्यकों को गालियां दी व जान से मार देने की धमकियां भी।

एक बार इस कथित हिन्दू संगठन के लोगों ने सरेआम बसस्टेण्ड़ पर एक अल्पसंख्यक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। तलवार व अन्य हथियारों से लैस उत्पातियों ने अल्पसंख्यकों को घरों में जाकर मारने की धमकियां दी। तत्समय अल्पसंख्यक वर्ग के वे सभी जागरूक, कानूनी जानकार व सक्षम लोग चुप रहे। अत्याचार का विरोध करने पर उनके हित प्रभावित हो सकते थे इसलिए वे नहीं बोले। हाल ही में कथित हिन्दू संगठन के लोगों ने एक मामले में इन लोगों को भी धमकाया है। अल्पसंख्यकों को अंदेशा है कि वे कभी भी हमला कर सकते है।

कथित हिन्दू संगठन के लोग धार्मिक वैमनस्य बढ़ाने के लिए भी कार्य कर रहे है। सर्कस की तरह गोल-गोल गाड़ी चलाने वाले मुखिया के निर्देशों पर यह संगठन दलितों व अल्पसंख्यकों पर निरन्तर हमले करता आ रहा है। इनका मुखिया कथित हिन्दू संगठन के मार्फत असल हिन्दूओं व अल्पसंख्यकों के बीच दरार डालकर इन दोनों वर्गों के लोगों को डराए रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहा है। वो हिन्दू-मुस्लिम दंगा करवाने के लिए भी कार्य कर रहा है। कुछ दिनों पूर्व इस संगठन द्वारा एक हिन्दू धार्मिक महोत्सव के दौरान गांव में जुलूस निकाला गया। जुलूस के दौरान जमकर गुलाल उड़ाई गई। महोत्सव के अवसर पर गुलाल उड़ाने, नाचने-गाने व हर्षित होने से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत तब हुई जब जुलूस मस्जिद के पास पहुंचा और जुलूस में नाच रहे कथित हिन्दू लड़कों ने मस्जिद में गुलाब फैंक दी। अल्पसंख्यकों को बहुत गुस्सा आया। वे कदम उठाना चाहते थे। वे समझ गए कि कौन लोग इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा दे रहे है और क्यों दे रहे है। यहां अल्पसंख्यकों ने बुद्धिमता दिखाई वरना कत्लेआम होने की पूरी संभावना थी।

कोशीथल गांव में पिछले 60 वर्षों से एक फिल्म चल रही है। पर्दे पर नहीं बल्कि असल जीवन में। काल्पनिक नहीं बल्कि सास्वत। इस फिल्म में भी विलेन है। विलेन के परिवार वाले है और चमचों की फौज हैं। उसके एक इशारे पर ये चमचे गांव का माहौल खराब कर देते है। इन 60 सालों में इस विलेन ने गांव के सैकड़ों दलित व मुस्लिम परिवारांे को कुचल दिया। इसके आंतक की कहानियों की एक लम्बी सीरीज है।

बहरहाल गांव के दलित व अल्पसंख्यक परिवारों के लोग इस विलेन व विलेन के चमचों की फौज से डरे हुए थे। मोदी सरकार में कथित हिन्दूवादी ताकतें अतिउत्साहित होकर न केवल शहरों में बल्कि गांवों में भी असंवैधानिक गतिविधियां करके अपना दमखम दिखा रही हैं। पिछले दो सालों में दलितों व अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार की कई घटनाएं सामने आई है। रोहित वेमूला, डेल्टा मेघवाल के मामले राष्ट्रीय स्तर पर उठे। नागौर जिले के डांगावास में सवर्णों ने दलित समुदाय के कच्चे मकानों पर ट्रेक्टर चला दिए, मकान बचाने के लिए सामने आए दलित महिला-पुरूषों व बच्चों को बंदूकों की गोलियों व ट्रेक्टरों से रोंद दिया गया। महिलाओं के अंगों में पत्थर ठूंस दिए, पुरूषों के लिंग उखाड़ दिए। दलितों के प्रति सवर्णों की नफरत को जानने के लिए इससे बड़ा कोई मामला नहीं हो सकता।
राजस्थान सरकार की मुखिया ने इस मामले को जमीन की लड़ाई करार देकर पल्ला झाड़ लिया। अत्याचार के मामले कम नहीं हो रहे है। कहीं चौराहों पर लगी दलित शहीदों की प्रतिमाओं को तोड़ दिया जा रहा है तो कहीं दलित वर्ग की होनहार बेटियों के साथ बलात्कार कर उन्हें मारकर पानी के टेंक में डाल दिया जा रहा है। हाल ही में गुजरात के उना में दलितों के साथ हुई अत्याचार की घटना से देश के दलितों का गुस्सा बाहर निकल पड़ा है। देशभर के दलितों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है। इन मामलों में सरकार व सरकार के चहेते हिन्दूवादी संगठनों का चेहरा सामने आया। राजस्थान में दलितों व अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के विरूद्ध दलित अधिकार केंद्र (सीडीआर) जयपुर के एडवोकेट पी.एल. मीमरोट, एडवोकेट सतीश कुमार, कविता श्रीवास्तव के नेतृत्व में पीपूल्स यूनियन फोर सिविल लिबर्टिज (पीयूसीएल) की टीम, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी (भीलवाड़ा), समाजसेवी गोपाल वर्मा (जयपुर), डाल चन्द रेगर (भीलवाड़ा), देवी लाल मेघवंशी (भीलवाड़ा), परशराम बंजारा (भीलवाड़ा) दुर्गाशंकर जीनगर (कोटा), लक्ष्मण वर्मा (अजमेर), राकेश मेघवाल (बारां) फिरोज खान (बारां), आबिन हुसैन शेख (भीलवाड़ा), महेन्द्र मेघवंशी (ब्यावर), सोहन लाल भाटी (राजसमन्द), कालू लाल सालवी (राजसमन्द), प्रकाश मेघवाल (उदयपुर), धर्मचन्द खैर (उदयपुर), मान सिंह डामोर (डूंगरपुर), बलवंत मेघवाल (सिरोही), प्रमोदपाल सिंह (पाली), तुलसीदास राज (जोधपुर), नवीन नारायण (जयपुर) सहित राज्य भर में कई लोग कार्य कर रहे है। वहीं राजस्थान में पिछले एक वर्ष से दलित आदिवासी अल्पसंख्यक एकता महासंघ सक्रिय हुआ है। इस महासंघ की जड़े भीलवाड़ा जिले में है।

अत्याचारी जब हदें पार करने लगते है तब शोषित वर्ग स्वतः ही खड़ा हो उठता है। कोशीथल में भी ऐसा ही हुआ है। 60 साल बाद अब दलित संगठित हो रहे है। यहां के अल्पसंख्यक भी सचेत हो गए है। दलित व अल्पसंख्यक एक बैनर तले संगठित हो रहे हैं। यह बदलाव की बयार है। प्राथमिक तौर पर डा. भीमराव अम्बेडकर दलित युवा विचार मंच के बैनर पर एकजूट होने का निश्चय किया गया है साथ दलित मुस्लिम सेना का गठन किए जाने की भी योजना है। इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे जयप्रकाश अठवाल ने बताया कि 7 अगस्त 2016 को गांव में ही एक सभा रखी गई है। इस सभा में आगेवानों की एक कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा साथ संगठन का नाम व सेना का प्रारूप तय किया जाएगा।

इस अभियान से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि देश में संविधान लागू है, संविधान में हर नागरिक को अधिकार दिए गए है। हमारा मकसद केवल यह रहेगा कि हम गरीब, वंचित, शोषित, दलित व अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना उनके अधिकारों के लिए पैरवी करना। अभियान से जुड़ रहे एक अल्पसंख्यक कार्यकर्ता का कहना है कि डा. भीमराव अम्बेडकर ने भारत के प्रत्येक नागरिक के हितों का ध्यान रखा। हर जाति, हर वर्ग को अधिकार प्रदान किए। आज देश में लागू संविधान के विरूद्ध कृत्य किए जा रहे है। संविधान विरूद्ध कार्य करने वालों की यह पुनः आजादी से पूर्व की स्थितियां लाने वाली योजना है। मैं ऐसे लोगों का, ऐसे संगठनों का विरोध कर रहे है। हम देश में शांति, भाईचारा व साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करने के लिए मिशन का आगाज कर रहे है।
मैं पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता लखन सालवी इस दलित-अल्पसंख्यक एकता को शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं। साथ ही वादा करता हूं कि एक पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता के नाते आपके इस मिशन को सफल बनाने के लिए भरसक प्रयत्न करूंगा।

Lakhan Salvi
[email protected]
+91 98280-81636

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