संजय सक्सेना, लखनऊ
वाराणसी में सोनिया गांधी का रोड शो सफल रहा, लेकिन रोड शो के दौरान उनकी तबीयत खराब होने से चर्चा रोड शो की जगह सोनिया की बीमारी और मोदी सरकार द्वारा जिस तत्परता से सोनिया को चिकित्सीय सुविधा और दिल्ली लाने तक के लिये सुविधा उपलब्ध कराई गई उस पर खिसक गई। मोदी सरकार के मंत्री तक ने अस्पताल जाकर सोनिया गांधी की कुशलक्षेम पंूछी। ऐसा पहले भी होता रहा है, लेकिन जब मामला सियासतदारों से जुड़ा हो तो हर एंगिल तलाशा जाता है। सभी पहलुओं पर चर्चा होती है। स्थिति यह है कि अब सोनिया के रोड शो से अधिक चर्चा सोनिया की बीमारी के समय मोदी सरकार द्वारा दिखाई गई दरियादिली पर हो रही है। क्रिकेट की भाषा में कहा जाये तो कांग्रेस के चौके पर मोदी ने दरियादिली दिखाकर छक्का जड़ दिया। आम जनता के नजरिये से देखा जाये तो यह संतोष की बात है कि राजनीतिक कटुता और मतभेद होते हुए भी हमारे देश में नेताओं की संवेदनशीलता और मानवीयता संकट के समय सामने आ जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्षा के स्वास्य का हालचाल जाना। अगर सोनिया को सबसे पहले सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया तो निश्चय ही इसमें सरकार की सकारात्मक भूमिका थी। सोनिया गांधी का रोड शो उत्तर प्रदेश की चुनावी दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम था। ठीक इसी प्रकार से लखनऊ में राहुल गांधी की रैली की भी महत्ता कम नहीं थी,लेकिन वाराणसी में सोनिया की तबीयत खराब होना और लखनऊ में राहुल के कार्यक्रम के दौरान बारिश होना कांग्रेस के लिये शुभ संकेत नहीं रहा।
भाजपा को चुनौती देने की दृष्टि से ये दोनों महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम थे। योजनानुसार कार्यक्रम के पूरा होने के बाद सोनिया गांधी प्रेस को जो वक्तव्य देतीं, वह मीडिया की सुर्खियां बनतीं तथा उस पर र्चचा होती। कांग्रेस इस अनुकूल परिणति से वंचित रह गई। हालांकि इसमें उसका कोई दोष नजर नहीं आता है, किंतु इस परिणति का सबक यह है कि कांग्रेस के रणनीतिकार सोनिया गांधी का कार्यक्रम उनके स्वास्य को ध्यान में रखकर ही बनाएं। उम्मीद है, कांग्रेस इस घटना से सबक लेगी।
लेखक अजय सक्सेना लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

