Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

समाज-सरोकार

वोटबैंक की मंडी में गैंगरेप की कीमत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गैंगरेप के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बुलंदशहर के बाद ग्रेटर नोएडा, विजय नगर व रामपुर में हुए गैंगरेप ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी है।
दिलचस्प बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों को अपराध रोकने तथा आरोपियों को सजा दिलाने कर ध्यान देना चाहिए, वे दल अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिए बयानबाजी तथा पीड़ितों से मिलकर राजनीति करने में लग गए हैं। मामले पर दबाव बनता देख प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मामले की सीबीआई जांच कराना स्वीकार करने लगे हैं। साथ ही सरकार पीड़ित परिवार को दो फ़्लैट का लालच देकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गैंगरेप के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बुलंदशहर के बाद ग्रेटर नोएडा, विजय नगर व रामपुर में हुए गैंगरेप ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी है।
दिलचस्प बात यह है कि जिन राजनीतिक दलों को अपराध रोकने तथा आरोपियों को सजा दिलाने कर ध्यान देना चाहिए, वे दल अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिए बयानबाजी तथा पीड़ितों से मिलकर राजनीति करने में लग गए हैं। मामले पर दबाव बनता देख प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मामले की सीबीआई जांच कराना स्वीकार करने लगे हैं। साथ ही सरकार पीड़ित परिवार को दो फ़्लैट का लालच देकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।

भाजपा से प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा, गाजियाबाद सांसद के सिपेहसालार व नोएडा विधायक बिमला बाथम कांग्रेस से दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, सपा से मंडल प्रभारी तथा एमएलसी राकेश यादव पीड़िता के घर पहुंचकर अपनी पीड़ा जता चुके हैं। वैसे तो प्रदेश में कई गैंगरेप हुए हैं पर बुलंदशहर गैंगरेप पर जमकर राजनीति हो रही है। सपा नेता आजम खान ने विपक्षियों के माहौल खराब करने की संभावना के रूप में देखने के बयान के भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह उनसे भी आगे निकल गए। उन्होंने ने आजम खां की बहु-बेटी के साथ ऐसा होता तो उन्हें पता चलता कहकर अपने को उनसे आगे बढ़कर बयान देकर अपने को बड़ा दिखाने की कोशिश की। राज्यसभा में मायावती ने गैंगरेप की घटनाओं को प्रदेश के लिए गंभीर बताया तो जया बच्चन ने महिला सुरक्षा के नाम पर विपक्षियों के राजनीति करने की बात कहकर अपना बचाव किया। कुल मिलाकर हर अपराध की तरह इस अपराध पर भी मात्र सियासत हो रही है। हर दल यह प्रयास कर रहा है कि इस मुद्दे पर वह सहानुभूति बटोरकर अपना वोटबैंक मजबूत कर ले। ऐसा कोई प्रयास नहीं हो रहा कि किस रूप में इस पीड़ित परिवार को किसी तरह की राहत मिले। प्रदेश में अपराध पर किस तरह से अंकुश लग सके तथा आरोपियों को तत्काल ऐसी सजा मिले कि भविष्य में ऐसी वारदात दोहराई न जा सके।

मामले के 7 आरोपियों में से तीन को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही पुलिस को सोचना होगा कि पीड़िता इन गिरफ्तार आरोपियों की फिर से शिनाख्त करने की बात कर उनकी कार्यशैली पर उंगली उठा रही है। वैसे भी टीवी चैनलों ने रात में स्टिंग ऑपरेशन पर पुलिस की कार्यशैली की पोल पहले ही खोल दी है। अधिकतर थानों व पुलिस चौकी में अधिकतर पुलिसकर्मी सोते पाए गए। ऐसे में कैसे अपराध रुकेगा, कैसे अपराधियों के मन में कानून का भय बैठेगा, कैसे लोग कानून पर विश्वास करेंगे। इन सबके बीच पीड़ित परिवार ने जो किया उसने इस तर की वारदातों को के रोकने के प्रयास पर पानी ही फेर कर रख दिया। पीड़ित परिवार ने प्रदेश सरकार से दो फ्लैट लेकर एक तरह से गैंगरेप की कीमत ले ली। जो परिवार प्रदेश सरकार पर बाउंसरों के बलबूते जबर्दस्ती लखनऊ बुलाने का आरोप लगा रहा था उसी परिवार ने इसी सरकार से दो फ्लैट लेकर इस तरह के वारदातों को रोकने तथा आरोपियों के हो रहे प्रयासों को काफी हद तक प्रभावित किया है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि इसी तरह से ही अपराधों पर राजनीति ही होती रही तो रोकने का प्रयास कौन करेगा। कैसे रुकेगा अपराध। अपराधियों के मन में कैसे कानून का भय पैदा किया जाएगा। कैसे ये लोग समाज के डर अपराध करने से बचेंगे।

चरण सिंह राजपूत
[email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...