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आखिर आकाशवाणी कुरुक्षेत्र को रिले स्टेशन में तब्दील क्यों किया गया

अपनी स्थापना 24 जून, 1991 से अब तक आकाशवाणी कुरुक्षेत्र ने इस क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और सृजनशीलता को न सिर्फ वाणी दी, बल्कि उसे धरोहर के रूप में भी संरक्षित किया है. कितने ही प्रस्तोताओं , कलाकारों, कवियों, वार्ताकारों, अपने विषय के विशेषज्ञों ने इस मंच से अपने को प्रस्तुत किया , अपने अनुभवों को निखारा और आकाशवाणी को भी समृद्ध किया . कुरुक्षेत्र के कितने ही प्रस्तोताओं , कलाकारों और विद्वानों को इस आकाशवाणी ने ही पहचान दिलाई और फिर उन्होंने देश भर में नाम कमाया .शांति से सब व्यवस्थाएं यहाँ काम करती रहीं और कोई नकारात्मक बात यहाँ से कभी सुनने को नहीं मिली।

अपनी स्थापना 24 जून, 1991 से अब तक आकाशवाणी कुरुक्षेत्र ने इस क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास और सृजनशीलता को न सिर्फ वाणी दी, बल्कि उसे धरोहर के रूप में भी संरक्षित किया है. कितने ही प्रस्तोताओं , कलाकारों, कवियों, वार्ताकारों, अपने विषय के विशेषज्ञों ने इस मंच से अपने को प्रस्तुत किया , अपने अनुभवों को निखारा और आकाशवाणी को भी समृद्ध किया . कुरुक्षेत्र के कितने ही प्रस्तोताओं , कलाकारों और विद्वानों को इस आकाशवाणी ने ही पहचान दिलाई और फिर उन्होंने देश भर में नाम कमाया .शांति से सब व्यवस्थाएं यहाँ काम करती रहीं और कोई नकारात्मक बात यहाँ से कभी सुनने को नहीं मिली।
करीब दो वर्ष पूर्व दो तीन अधिकारिओं  का यहाँ तबादला क्या हुआ उसके बाद से मानो इस केंद्र को एक ग्रहण लग गया। इन अधिकारिओं के रवैये के खिलाफ यहाँ के आकस्मिक प्रस्तोताओं ने एक जुहो के अपना विरोध दर्ज कराया । दिल्ली आकाशवाणी महानिदेशालय से दो बार जांच दल आया और आखिरकार यहां से तीन अधिकारियों को यहां से बदला गया। इसके बाद फिर से आकाशवाणी कुरुक्षेत्र में पहले जैसा सामान्य माहौल हो गया। किसी को कोई शिकायत नहीं, नए नए कार्यक्रम होने लगे और श्रोताओं की भागीदारी भी दिन ब दिन बढती ही जा रही थी।

पर ऐसे में फिर ऐसा कुछ हुआ जिसकी कल्पना किसी ने भी न की थी। 5 जून 2016 से इस केंद्र के अधिकतर स्थानीय कार्यक्रम बंद कर दिए गए। गीता सन्देश, रामचरित मानसगान, युववाणी, महिला मंच, बालसभा, खेती की बातें, माटी की सुगंध, परिक्रमा, प्रादेशिक संगीत, शास्त्रीय संगीत, एक रंग, वार्ताएं, कवि गोष्ठियां. हरियाणवी सांग, पंजाबी लोकगीत यानि समाज के विभिन्न तबकों के लिए जो अलग अलग कार्यक्रम होते थे वो सब बंद, केवल रिले के कार्यक्रम अब सुबह शाम यहां से अब बजने लगे हैं। सुबह की सभा में केवल एक कार्यक्रम और शाम की सभा के केवल के दो कार्यक्रम यहाँ के स्थानीय कार्यक्रमों में बचे हैं बाकी के सात घंटे का समय रिले को दे दिया गया।

आकाशवाणी कुरुक्षेत्र एक स्थानीय आकाशवाणी केंद्र है। आकाशवाणी के मेनुअल के मुताबिक एक स्थानीय केंद्र उस इलाके की जनता की आवाज होता है, उसके कार्यक्रम बहुत लचीले और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होते हैं, परन्तु 5 जून का ये रद्दोबदल तो न सिर्फ स्थानीय जनता के बल्कि आकाशवाणी की नियमवाली के अनुसार भी कहीं से युक्तिसंगत नहीं कहा जा सकता। इस सम्बन्ध में जाने माने आर टी आई कार्यकर्ता अधिवक्ता रंधीर शर्मा ने जब प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय से इस रद्दोबदल के सम्बन्ध में जब आर टी आई भेज के जवाब मांगा तो उनकी अर्जी पे जवाब देने के बजाय उसे आकाशवाणी के महानिदेशालय भेज दिया गया और फिर वहां से इस मामले को आकाशवाणी कुरुक्षेत्र भेज दिया गया। आकाशवाणी कुरुक्षेत्र ने पत्र क्रमांक 32(3)/2016/जी/789 दिनांक 14.07.2016 के माध्यम से जो सूचना दी वो एक दम चौंकाने वाली थी।

इतने बड़े बदलाव के लिए न तो श्रोताओं की तरफ से कोई मांग थी न ही आकाशवाणी कुरुक्षेत्र ने ही इस बारे कोई अनुरोध किया हुआ था, न ही स्टाफ और वित्तीय कोई कारण थे, न हरयाणा के श्रोताओ ने ऐसी मांग की, राज्य सरकार, जिला प्रशासन ने भी कोई रिपोर्ट नहीं भेजी जिस में इस केंद्र से स्थानीय कार्यक्रम बंद कर रिले केंद्र बनाने का आग्रह किया हो पर फिर भी इतना बड़ा और अनैतिक और तानाशाही पूर्ण निर्णय ले लिया गया। इस मामले में आकाशवाणी अपर महानिदेशक उत्तरी क्षेत्र ने कार्यक्रम अधिकारी कुरुक्षेत्र को दिनांक 11.05.2016 को दिल्ली बुलाया और उन्हें कार्यक्रम का नया चार्ट बनाने का आदेश दिया। ऐसा क्यों किया इसके लिए कोई कारण नहीं बताया गया। इस मामले में प्रथम अपील दाखिल की गयी तो अपर महानिदेशक उत्तरी क्षेत्र ने भी इस मामले में और कोई अतिरिक्त सूचना होने से ही इंकार किया।

इस मामले में आकाशवाणी महानिदेशालय में कोई मीटिंग भी नहीं हुई, न ही कोई कार्यवाही या मिनट्स ऑफ मीटिंग्स की प्रति ही आकाशवाणी  कुरुक्षेत्र या आकाशवाणी  महानिदेशालय के स्तर पे मौजूद है। फिर आखिर ये निर्णय कैसे और क्यों ले लिया गया। केंद्र प्रमुख आकाशवाणी कुरुक्षेत्र संजय बाली ने भी पत्रांक कुरु 2016/ 596 दिनांक 26.05.2016 में आकाशवाणी महानिदेशालय को आकाशवाणी कुरुक्षेत्र को रिले केंद्र बनाने के निर्णय पे पुनर्विचार हेतु पत्र लिखा पर उसको भी कोई तवज्जो नहीं दी गयी। आकस्मिक प्रस्तोताओं से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि जिन अधिकारियों का यहां से स्थानान्तरण हुआ उनके विरुद्ध हस्ताक्षर दुरुपयोग, ईमेल को हैक करना , कुछ लोगों को बैन करना, नियमों के विरुद्ध काम लेना से ले कर महिला प्रस्तुतकर्ताओं को भी तंग करने और मानसिक उत्पीडऩ की शिकायते थी। इनमे से कई मामलो में पुलिस और महिला आयोग में भी कार्यवाही लंबित है। आकाशवाणी आकस्मिक उद्घोषक एवं प्रस्तोता वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष रविन्द्र एकान्त के अनुसार इस मामले में और कोई कारण समझ नहीं आता सिवाय उन अधिकारियों के इस केंद्र के प्रति दुर्भाव के सिवा जिनका यहाँ से स्थानान्तरण हुआ और जिनका प्रसार भारती और महानिदेशालय में अच्छा खासा रसूख है, जिसके दम पे वो अनेकों बार यहां के प्रस्तुतकर्ताओं की शिकायतों को दबाते रहे और बार बार अपने स्थानान्तरण के आदेशों को रद्द कराते रहे।

ध्यान रहे कि प्रसार भारती एक स्वायत्त संस्था है और सरकार इसके काम काज में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती . इसी स्वायतत्ता का खूब फायदा ये संस्थान उठाते दिख रहा है वरना जिस मामले में श्रोताओं के संघ, सिविल सोसाइटी, धार्मिक और सामाजिक संस्थाए, विधायक , सांसद, मुख्यमंत्री, राज्यपाल हिमाचल तक प्रसार भारती को इस निर्णय को बदल के फिर से पहले की तरह स्थानीय कार्यक्रम बहाल करने का अनुमोदन कर चुके हों और फिर भी प्रसार भारती के शीर्ष अधिकारी अपने निर्णय में टस से मस न होते दिखे। यहां आकाशवाणी कुरुक्षेत्र के चाहने वालो कीउम्मीद अभी भी बाकी है और प्रयास अभी भी थमे नहीं हैं। समाचार माध्यमों में आई खबरों के अनुसार प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जवाहर सरकार से केंद्र सरकार भी खफा है और इस कड़ी में उनको एक स्पष्टीकरण भी चेयरमैन प्रसार भारती द्वारा जारी किया गया है। शायद बदलाव की बयार यहाँ भी पंहुचे और आकाशवाणी कुरुक्षेत्र के कार्यक्रम फिर से पहले की तरह आरंभ हो जाएं।

Advocate Randhir Sharma

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