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रंगून जानलेवा है, देख आइए

Abhishek Srivastava :  “अपनी जान से भी कीमती कुछ और है क्या? है, वो कि जिसके लिए मरा जा सके!”  रंगून जानलेवा है। देख आइए। समझ में आ जाएगा कि जब तक जान देने लायक अपनी जान से कीमती कोई चीज़ न मिले, तब तक जान को बचाकर रखना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। नाखून कटा कर शहीद बने तो क्या ही बने! एक और बात समझ में आ सकती है- कि इश्क़ में जान देना लंठई है। इश्क़ करिए, लेकिन उसमें जान मत दीजिये क्योंकि इश्क़ से भी बड़ी शै दुनिया में है।

Abhishek Srivastava :  “अपनी जान से भी कीमती कुछ और है क्या? है, वो कि जिसके लिए मरा जा सके!”  रंगून जानलेवा है। देख आइए। समझ में आ जाएगा कि जब तक जान देने लायक अपनी जान से कीमती कोई चीज़ न मिले, तब तक जान को बचाकर रखना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। नाखून कटा कर शहीद बने तो क्या ही बने! एक और बात समझ में आ सकती है- कि इश्क़ में जान देना लंठई है। इश्क़ करिए, लेकिन उसमें जान मत दीजिये क्योंकि इश्क़ से भी बड़ी शै दुनिया में है।

सही वक़्त का इंतज़ार किया जाए। क्या जाने अपना इश्क़ सारे जहाँ के काम आ जाए। वो शै जो नहीं मिली, तो क्या ही ग़म! संतोष रहेगा कि कम से कम इश्क़ तो किया। जो मिल गई, तो इंकिलाब ज़िंदाबाद!!!

मीडिया और फिल्म क्रिटिक अभिषेक श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

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