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जानवर क्यों हो रहे हैं आक्रामक?

देहरादून। मनुष्य स्वयं तो स्वतंत्रता चाहता है मगर दूसरे को अपने वश में रखना चाहता है। जैसे पालतू बेजुबानों के साथ करता है। बंधन में रखना, उन पर अत्याचार करना, पालतू जानवरों से उनकी क्षमता से अधिक कार्य लेना अपना अधिकार समझता है। यही नहीं जंगली जानवरों पर भी अपना अधिकार जताता है। अपने को सबसे शक्तिशाली जता कर बेजुबानों के आगे दंभ भरने को शायद अपनी फितरत समझता है।

देहरादून। मनुष्य स्वयं तो स्वतंत्रता चाहता है मगर दूसरे को अपने वश में रखना चाहता है। जैसे पालतू बेजुबानों के साथ करता है। बंधन में रखना, उन पर अत्याचार करना, पालतू जानवरों से उनकी क्षमता से अधिक कार्य लेना अपना अधिकार समझता है। यही नहीं जंगली जानवरों पर भी अपना अधिकार जताता है। अपने को सबसे शक्तिशाली जता कर बेजुबानों के आगे दंभ भरने को शायद अपनी फितरत समझता है।

मनुष्य की मूर्खतापूर्ण हरकतों से जानवरों के व्यवहार में जो बदलाव हो रहा है वह मनुष्य के लिए ही खतरनाक साबित हो रह है। अक्सर देखने में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों द्वारा मनुष्य एवं पालतू पशुओं पर आए दिन हमले किए जाना वास्तव में चिंता का विषय बनता जा रहा है। जंगली जानवरों द्वारा आक्रमण किए जाने का बदला हम उन्हें मार कर ले रहे हैं। शायद हम यह सोच रहे हैं कि उनका खात्मा कर इस समस्या से छुटकारा पा लेंगे। मगर यह समस्या का हल नहीं। हमने कभी भी यह सोचने की हिमाकत ही नहीं कि जानवर आक्रामक क्यों हो रहे हैं? वास्तव में सच्चाई यह है कि जंगली जानवरों को आक्रमक बनाने में मनुष्य का सबसे बड़ा हाथ है।

विकास के नाम पर मनुष्य की जंगलों में जबरन घुसपैठ से जंगली जानवर स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें उनके अनुकूल वातावरण न मिलने के कारण उनके व्यवहार में बदलाव आना स्वाभाविक है। दूसरे प्राकृतिक आपदाओं से भी उनका जीवन- चक्र प्रभावित हो रहा है। भोजन एवं अपने अनुकूल वातावरण की खोज में आबादी की ओर उनकी चहलकदमी बढ़ती ही जा रही ही है। जिसके कारण मनुष्य व पालतू जानवरों पर हावी होकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं।पहाड़ी इलाकों में ही नहीं तराई क्षेत्र में भी जंगली जानवरों के धमक बढ़ती ही जा रही है।मैदानी क्षेत्रों में अक्सर गुलदार, हाथियों, बंदरों जैसे जानवरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। इनके हमलों से यदि बचना है तो हमें सबसे पहले जंगलों को बचाना होगा। उनके अधिकार क्षेत्र मुक्त करने होंगे। इसके लिए सरकार व आम नागरिक को एकजुट होकर काम करना होगा। वरना आदमखोर जानवरों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती रहेगी। जंगली जानवर और अधिक आक्रामक न बनें व मनुष्य को भी कोई नुकसान न पहुंचे इसके लिए पहले बीच का रास्ता ढूंढना दोनों के लिए हितकर होगा। बेजुबानों के साथ यदि अच्छा व्यवहार किया जाए, उनकी पीड़ा समझी जाए तो उनका रुख भी नरम होगा।

ओम प्रकाश उनियाल                        
9760204664

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