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योद्धाओं की स्मृति में श्रद्धांजलि समारोह

भारत पर पहला आतंकी हमला तालिबान के रहने वाले अहमद शाह अब्दाली ने किया था। इसका प्रतिकार मराठों ने पानीपत में जाकर किया। देश की रक्षा के लिए मराठों ने अपने प्राण त्याग दिए, उन शहीद वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आज पानीपत में हरियाणा एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा संयुक्त रूप से वीर मराठों के लिए शहीद स्मारक बनाने की मांग की गई। इस मौके पर श्री मदन दास देवी ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्मारक बनवाना नहीं है बल्कि देश में फिर से एकता और अखंडता की भावना जागृत करना और युवाओं को अपने इतिहास से अवगत कराना है।

भारत पर पहला आतंकी हमला तालिबान के रहने वाले अहमद शाह अब्दाली ने किया था। इसका प्रतिकार मराठों ने पानीपत में जाकर किया। देश की रक्षा के लिए मराठों ने अपने प्राण त्याग दिए, उन शहीद वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आज पानीपत में हरियाणा एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा संयुक्त रूप से वीर मराठों के लिए शहीद स्मारक बनाने की मांग की गई। इस मौके पर श्री मदन दास देवी ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्मारक बनवाना नहीं है बल्कि देश में फिर से एकता और अखंडता की भावना जागृत करना और युवाओं को अपने इतिहास से अवगत कराना है।

उन्होंने हार का कारण एक रणनीतिक भूल बताया। युद्ध में 1 लाख 25 हजार लोग मारे गए थे जिनमें सैनिकों की बीवी और बच्चे भी शामिल थे। हम आज भी इसी तरह से भूल कर रहे हैं। हमने पहले पाकिस्तान से अधिकृत भू-भाग को उसे लौटा दिया और 1971 के बांग्लादेश युद्ध में पाकिस्तान के  बीस हजार सैनिकों को रिहा कर दिया। यह भी एक रणनीतिक भूल ही थी। 

पूर्व राज्यपाल एवं सेवा निवृत मुख्य न्यायाधीश श्री वी. एफ. कोकजे ने यहां कहा कि स्मारक देखकर ऐसा लगता है कि वह योद्धाओं के लिए नहीं बल्कि आक्रमणकारियों के लिए बना है। हर परिवार अपने पूर्वजों की स्मृतियां समेट कर रखता है इसलिए एक प्रतीक के तौर पर वहां स्मारक बनना चाहिये जैसे ताजमहल एक प्रतीक है। हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि हमारा इतिहास यही है।

इतिहासकार पंडुरज बलकेड़े ने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि अंग्रेजों ने भारत को एक कर दिया लेकिन जो लड़ाई पानीपत में लड़ी गई उसमें मराठों ने शामिल होकर साबित कर दिया कि भारत की एकता और आजादी के लिए सभी लड़ने को तैयार हैं। उन्होंने धर्म, देश और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना खून दिया।

उल्लेखनीय है कि पानीपत की इस लड़ाई में 35 हजार मराठा सैनिक मारे गए और 25 हजार अफगान मारे गए। यह ऐसा युद्ध था जिसे मराठा सैनिकों ने हार कर भी जीत लिया क्योंकि इसके बाद अहमद शाह अब्दाली इतना कमजोर हो गया कि उसने दोबारा भारत पर आक्रमण नहीं किया। वहीं मराठा दोबारा माहाजी सिंधिया के नेतृत्व में खड़े हो गए जिनकी मदद से सिख राजा महाराजा रंजीत सिंह ने अफगान के एक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। 1761 में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई की 250 वीं वर्षगांठ के अवसर पर 14 जनवरी 2010 को एसडी विद्या मंदिर स्कूल सेक्टर-12 में पानीपत रण संग्राम समिति, पानीपत द्वारा आयोजित किया गया। इसमें मदनदास देवी, वी.एफ. कोकजे, श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, मेजर राम चंद्र गौतम ने अपने-अपने विचार प्रकट किए।

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