: इस दौरान उसके प्रेमी के साथ पत्नीवत ताल्लुक भी बन गए : एमएमएस की शक्ल में जिस्म की नुमाइश भी होने लगी : मुझे लड़की के जिस्म का भूगोल इतना पता है, जितना उसके माँ-बाप को भी नहीं मालूम होगा : भोपाल में पिछले कुछ दिनों से खबरिया चैनल वाले रिपोर्टरों की सांसें बुरी तरह फूल रही हैं. कोई यहां भागते हुए कह रहा है “यार लड़की को तो वो ले भगा, मैं कब से वेट कर रहा था, अचनक वो आया और उठाकर ले गया” किसी के बौखलाहट भरे स्वर निकल रहे हैं, “अरे….यार…लड़की तो बहुत भाव खा रही है, किसी तरह लड़के को पटाया तो वो भी कह रहा है- दो घंटे से पहले मेरे पास वक्त नहीं है.” यानी सब कुछ बदहवासी के आलम में. ये संवाद अदायगी किसी गैर इलेक्ट्रॉनिक पत्रकार के कानों में पड़ती है तो वो समझ ही नहीं पाता कि ये चक्कर वाकई किसी खबर से ताल्लुकदार है या कुछ और है. क्या है..?
दरअसल ये सारा बवाल हो रहा है टीवी एक्ट्रेस सहरीश और उसके कथित प्रेमी उर्फ़ पति उर्फ़ दोस्त जहांगीर के कारण. यूँ तो उम्मीद की जाना चाहिए कि भड़ास के पाठक खबरिया चैनल भी देखते होंगे और यदि देखते हैं तो इस विवाद से ज़रूर वाकिफ होंगे, क्योंकि हर चैनल उन्हें अपने यहां बैठाकर टीआरपी की प्रत्याशा में है. एक लडकी भोपाल की महज १४ साल की उम्र से मॉडलिंग और मोहब्बत की दो नावों की सवारी में जुटी. इस दौरान कथित तौर पर उसके प्रेमी के साथ पत्नीवत ताल्लुक भी बन गए. इस बीच वो कुछ बड़े बैनर के सीरियल में ले ली गई.
हिंदी फिल्म अभिनेत्रियों की तरह यहां भी मम्मी ने विलेन का रोल प्ले किया और अपनी बेबी से कहा कि वो कैरियर में ध्यान दे, इस लोकल लड़के के बजाय उसके पास बड़े सितारों की लाइन लगेगी. लड़की को बात जम गई तो उसने लिविंग रिलेसन में रह रहे अपने प्रेमी को साथ में भोपाल (दोनों की मातृ भूमि) लाकर टाटा बोल दिया. उसे लगा लड़का देवदास बन जाएगा, रोयेगा, अधिक से अधिक शराबी हो जायेगा और फिर संभल जायेगा, लेकिन लड़का जिद्दी निकला. बीच सडक पर उसने लड़की और घरवालों को पीटा और पिटा भी.
इसी के साथ शुरू हो गया तमाशा. चैनल को इसमें टीआरपी के सारे फैक्टर दिखे, खुबसूरत लडकी (माफ़ कीजिये टीवी स्टार) हाई प्रोफाइल, महंगी कार और कपड़े वाला आशिक, सड़क पर झगड़ा… बस क्या था तमाम रिपोर्टर को कह दिया गया कि इस मामले को… तान दो. लड़की और लड़का अलग अलग चैनल पर नुमाया होने लगे और इसमें दोनों पक्ष टीवी की साजिश में ऐसे उलझे कि एमएमएस की शक्ल में जिस्म की नुमाइश भी होने लगी.
लड़की ने कहा मेरा इससे कोई ताल्लुक नहीं है तो जबाब में लड़के ने ऐसे ऐसे वीडियो दिखाए और साथ में अपनी आवाज़ में ही ऐसा वीओ किया जिससे भद्र लोगों के चेहरे शर्म से नीचे झुक गए. ज़रा बानगी देखिये, लड़का कहता है, “मुझे लड़की के जिस्म का भूगोल इतना पता है, जितना उसके माँ-बाप को भी नहीं मालूम होगा, मैं बता सकता हूँ उसके शरीर के किस हिस्से में कितने तिल हैं, लडकी की मां ब्यूटी पार्लर की आड़ में सेक्स रैकेट चलाती है, मेरे उसकी मां से भी ‘गहरे’ ताल्लुक रहे हैं.” इतनी घटिया संवाद अदायगी होती रही और एंकर ने बाकायदा उसे बोलने भी दिया. दूसरी तरफ पहले दिन लडकी बिसरती रही, लेकिन अगले दिन उसे दो चैनलों से सीरियल में काम करने का ऑफर मिला तो लडकी जान गई कि खबरिया चैनल का महत्व क्या है?
उसने अदाएं भी हैं, मोहब्बत भी हैं मेरे महबूब में, के भाव के साथ टीवी में रंग दिखाने शुरू किये. ये खबरिया चैनलों और उसके बीच एक तरह से गिव एंड टेक का रिश्ता था, चैनल को टीआरपी मिल रही थी और लड़की को शोहरत. इसमें यदि कोई कहीं पिस रहा था तो भोपाल के टीवी रिपोर्टर और इन चैनलों को देखने वाले दर्शक. हालांकि जिस तरह से चैनलों का मार्केट शेयर घटा है. टीआरपी में सबसे अव्वल चैनल भी 14 से 16 फीसदी हिस्सेदारी पा रहा हो, वहां ये कह सकते हैं कि बहुत कम लोग अब हिंदी के चैनल देखते हैं, लेकिन फिर भी जो देखते हैं उन पर तरस खाना तो ज़रूरी है. यानी पाने के क्रम में आप और वो लडकी, खोने के क्रम में हम, ये कब तक चलेगा भाई?
अगले दिन जब चैनलों को लगा कि अब इस खबर को और खीचना सांड का दूध निकालने जैसा हो जाएगा तो किसी उत्साही लाल ने कुछ गैर नामचीन मुस्लिम संगठन से उन दोनों लड़की-लड़के को कौम से खारिज करा दिया, बस फिर मिल गया चैनल को मसाला. एक तरफ मौलाना और दूसरे तरफ फिर उस लड़की को बैठाकर इस्लाम और उसके कायदे कानून पर बहस शुरू हो गई. लड़की गदगद है और उसे भरोसा है कि उसकी झोली में ज़ल्द ही कुछ और सीरियल आएंगे, हो सकता है कि बिग बॉस से भी उसके लिए बुलावा आ जाये क्योंकि एक और राखी सावंत और एक और कमाल खान की दरकार तो बिग बॉस को भी होगी. इस दिन की कई महत्वपूर्ण ख़बरें इन दोनों की आशिकी की भेंट चढ़ गई और एक बार फिर मूर्ख बने दर्शक. भोपाल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की टिप्पणी थी कि “बढ़िया है बेतुके मसले पर मीडिया उलझा रहता है और समाज को कुछ और सोचने का मौका नहीं मिलता.”
लेखिका डा.जान्हवी स्वतंत्र पत्रकार हैं.

