
शहंशाह
मेरी दृष्टि में, विभूति नारायण राय से अधिक दोषी ‘नया ज्ञानोदय’ के संपादक होने के नाते रवीन्द्र कालिया हैं, जिन्होंने उनकी ऐसी टिप्पणी को बिल्कुल गैर जिम्मेदाराना ढंग से छापा। दरअसल, रवीन्द्र कालिया जब से ज्ञानपीठ के निदेशक बने हैं, ज्ञानपीठ की गरिमा धूमिल हुई है। ‘नया ज्ञानोदय’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका के जैसे-जैसे असाहित्यिक और बाजारू अंक उनके संपादन में आ रहे हैं, बेहद अफसोसजनक है। रवीन्द्र’ कालिया ‘ज्ञानपीठ’ जैसी गरिमामयी संस्था की शीर्ष पर बैठ कर न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए रवीन्द्र कालिया को तुरन्त ज्ञानपीठ के निदेशक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए तथा ऐसे कृत्यों में शामिल उनके सहयोगियों को भी ज्ञानपीठ से निकाल-बाहर करना चाहिए।
लेखक शहंशाह आलम कवि हैं.

