Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

तेरा-मेरा कोना

पियक्‍कड़ों की जेब पर पर डाका

: जहानाबाद में प्रिंट रेट से अधिक दाम पर की जा रही है शराब की बिक्री : मदिरा के साथ माफिया और उसकी मनमानी देखनी है तो जहानाबाद जनपद से अच्छी जगह दूसरी शायद ही मिल सकेगी। एक तो शराब के शौकीनों  को समाज भी अच्छी निगाह से नहीं देखता, दूसरे उनकी जेब में डाले जा रहे डाके पर सरकार और शासन की भी निगाह नहीं पहुंच पा रही है। फलस्वरूप पौव्‍वा पर अंकित मूल्‍य से 5, अद्धा में 10 और बोतल में 20 रूपये अधिक कीमत की वसूली पूरे जनपद में धड़ल्ले से जारी है। सरकार को जनपद से आबकारी द्वारा प्राप्त होने वाले राजस्व के सापेक्ष लगभग 15 प्रतिशत की काली कमाई इन शराब की दुकानों से की जा रही है। आबकारी विभाग की भी, इस धंधे मे जमे माफियाओं की मदिरालयों में मनमानी पूर्ण बिक्री से होने वाली आय में, हिस्सेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

: जहानाबाद में प्रिंट रेट से अधिक दाम पर की जा रही है शराब की बिक्री : मदिरा के साथ माफिया और उसकी मनमानी देखनी है तो जहानाबाद जनपद से अच्छी जगह दूसरी शायद ही मिल सकेगी। एक तो शराब के शौकीनों  को समाज भी अच्छी निगाह से नहीं देखता, दूसरे उनकी जेब में डाले जा रहे डाके पर सरकार और शासन की भी निगाह नहीं पहुंच पा रही है। फलस्वरूप पौव्‍वा पर अंकित मूल्‍य से 5, अद्धा में 10 और बोतल में 20 रूपये अधिक कीमत की वसूली पूरे जनपद में धड़ल्ले से जारी है। सरकार को जनपद से आबकारी द्वारा प्राप्त होने वाले राजस्व के सापेक्ष लगभग 15 प्रतिशत की काली कमाई इन शराब की दुकानों से की जा रही है। आबकारी विभाग की भी, इस धंधे मे जमे माफियाओं की मदिरालयों में मनमानी पूर्ण बिक्री से होने वाली आय में, हिस्सेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

एक अनुमान के मुताबिक लगभग 45 करोड रूपये के शराब की उठान जनपद में होती है। यह राजस्व केवल देशी शराब से प्राप्त होता है। देशी शराब की बिक्री में 40 रूपये प्रति लीटर की दर से निर्धारित मूल्य से अधिक में की जाने वाली बिक्री से लगभग 6-7 करोड रूपये की अवैध काली कमाई होती है. इस कमाई का बंदरबांट किस-किस के बीच किया जाता है, इसका पूरा और सही सही हिसाब तो विभागीय अधिकारी ही बता सकते है, लेकिन इतना तो तय है कि इस खेल में बड़ी मछलियों के शामिल हुए बिना कुछ भी सम्भव नही हो सकता। प्रिंट रेट से अधिक की बिक्री का यह मोटा पैमाना है, जबकि शराब के शौकीनों की बात माने तो जहां देशी शराब में जनपद की अलग-अलग दुकानों में अधिक कीमत में बेचने का भिन्न-भिन्न रेट है, वहीं शहर और देहात का भी फर्क देखा जा सकता है।

शराब के शौकीन श्यामलाल का कहना है कि वैसे ही शराब की लत ने महंगाई के चलते परिवार की हालत खराब कर रखी है, उस पर अंकित मूल्य से अधिक दर पर खरीद कर नशा पूरा करना और मुश्किल कर रहा है। श्याम लाल जैसे तमाम शराब के शौकीनों की शिकायत है कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाली मनमानी और धांधली पर शासन, सरकार और नेता केवल इसलिये चुप बैठे हैं, क्योकि यह मामला शराब और शराबियों से ताल्लुक रखता है। बात शराब की हो या शराबियों की, इसे भला जायज कैसे ठहराया जा सकता है कि निर्धारित दर से अधिक में शराब की धड़ल्ले से बिक्री हो रही हो और करोड़ों रूपये के बंदरबांट पर प्रशासन, सामाजिक संगठन चुप लगाये बैठे रहें।

राम स्वरूप, भोला, कुंवारे, राजू, शिव लाल और शहजाद आदि शराब के शौकीनों में, किसी ने अंग्रेजी का पौव्‍वा 10 रूपये तो किसी ने 15 से 20 रूपये बढा कर बिक्री किये जाने की बात कही। जनपद के आबकारी विभाग पर यह गंभीर आरोप शराब के शौकीनों के ही नही हैं बल्कि जिले के शराबियों की जेब में डाले जा रहे इस डाके की स्वीकारोक्ति जहानाबाद से निर्वाचित बसपा विधायक आदित्य पाण्डेय भी करते हुए कहते है कि विभाग में चल रहे इस गोरखधंधे के लिये सीधे तौर पर जिला आबकारी अधिकारी जिम्मेदार है, जिसके खिलाफ उनके द्वारा शासन को शिकायत भेजी जा चुकी है।

उन्‍होंने यह भी कहा कि ठेकेदारों द्वारा यह कहा जाना कि प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत पर होने वाली बिक्री से आने वाली आय सीधे आबकारी अधिकारी के पास जाती है, इसलिये जहां चाहो शिकायत कर के देख लो, कुछ भी होने वाला नहीं है, यह साबित करता है कि जिले के आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार और मनमानापन अपने गंभीरतम स्थिति में पहुंच गया है। जब इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी बीवी शर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो उन्‍होंने मीटिंग में होने की बात कहते हुए फोन काट दिया। जनपद में पियक्‍कड़ों से होने वाली करोड़ों रूपये की वसूली की रकम में आखिर किसको कितना हिस्सा मिलता है, इस गोरखधंधे के बंद किये जाने के साथ-साथ यह भी खुलासा किया जाना जरूरी है। जनपद में मदिरा की बिक्री में माफिया की मनमानी यूं ही थोड़े चल सकती है।

चंद्रभान सिंह ‘त्‍यागी’ की रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

राजनीति-सरकार

मोहनदास करमचंद गांधी यह नाम है उन हजार करोड़ भारतीयों में से एक जो अपने जीवन-यापन के लिए दूसरे लोगों की तरह शिक्षा प्राप्त...

साहित्य जगत

पूरी सभा स्‍तब्‍ध। मामला ही ऐसा था। शास्‍त्रार्थ के इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि किसी प्रश्‍नकर्ता के साथ ऐसा अपमानजनक व्‍यवहार...

मेरी भी सुनो

सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाने और असुविधाओं का मुद्दा तो उठाया ही, मीडिया की अकर्मण्यता पर भी निशाना...