: मऊ पुलिस खोज रही है सहारा के रिपोर्टर को : सहारा कल्चर का एक और नमूना मऊ में तब पेश आया, जब सहारा के मऊ रिपोर्टर पर एक जानलेवा हमले की खबर पास हुई. असल में हुआ यह था कि सहारा के रिपोर्टर ने फोन पर मऊ के समाचार-पत्रों को यह बताया कि उस पर एक जानलेवा हमला हुआ है. इतना ही नहीं उसने गाजीपुर जिले के मरदह थाना में एक एफआईआर भी दर्ज कराई। इस एफआईआर के पीछे एक गुप्त रहस्य छिपा हुआ था. वह रहस्य यह था कि सहारा के उस रिपोर्टर का मऊ के एक परिवार से विवाद चल रहा था. और विवाद का मुख्य कारण यह था कि सहारा का यह रिपोर्टर मऊ की एक लड़की को रिपोर्टर बनाने का झांसा देकर उसके तन और मन के साथ वह बराबर छल करता रहा.
पूरी ईमानदारी के साथ अपनी कथनी को और सत्य साबित करने के लिए उसे अपने ऊपर के लोगों को भी परोसता रहा, ऊपर वालों ने भी इसका‘‘लाभ’’ उठाया, और उसे आश्वासन दिया कि जल्द ही उसे स्टाफर बना दिया जायेगा. इतना ही नहीं कई दिनों तक सहारा के रिपोर्टर ने उसे लखनऊ में अपने साथ अपनी वाइफ बना कर रखा. संयोग से एक लखनऊ में उसे एकपरिचित के मिल गए. जब उन्होंने भाभी जी का हाल पूछने पर पर, सहारा के उस रिपोर्टर ने उस लड़की को ही भाभी बता दिया. उसे नजदीक से जानने वाले परिचित ने यह सारा मामला समझ लिया और फोन पर यह हाल हू-ब-हू मऊ के चिर परिचितों को बयान कर दिया.
यह मामला जब मैंने सुना तो मुझे यह बिल्कुल साफ हो गया कि तभी तो एक मामूली क्षेत्रीय रिपोर्टर उत्तर प्रदेश ब्यूरो प्रभारी राजेन्द्र द्विवेदी के आदेश के बावजूद भी यही कहता रहा, ‘जब हम चाहेंगे, तभी तुम मऊ में काम कर पाओगे हमसे बड़ा तुम्हारा कोई साहब नहीं है.’ उस ‘पावर’ का पता अब चला। आइये प्वाईंट की बात करें, उस लड़की से नाजायज सम्बन्ध बनाने के बाद जबर्दस्ती उससे शादी करने का स्वांग वह रिपोर्टर रचाने लगा. इस बात से नाराज उस लड़की के पिता ने कोर्ट के माध्यम से उसके खिलाफ एक एफआईआर दर्ज करायी.
उसी एफआईआर के प्रतिक्रिया स्वरूप इस सहारा के खिलाड़ी ने अपना कपड़ा फाड़ कर यह सारा नाटक किया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह मऊ में ही बना रहा, परन्तु कहीं से फोन आने पर हमेशा यही बताता रहा कि अपना इलाज वह वाराणसी में करा रहा है. पेपरों में तो उसने सिर्फ फोन पर ही यह बताया था। पेपरों ने ईमानदारी बरती और खबर में यह भी लिखा कि यह खबर रिपोर्टर ने अपने फोन से दी है. मजे की बात यह है कि उसे मऊ की पुलिस खोज रही है. ये है सहारा के लोगों का कल्चर. अब तो बस भगवान की मालिक है, इस मीडिया का. वाह रे सहारा कल्चर!
सम्पूर्णानन्द दुबे की रिपोर्ट.

