राम जन्म भूमि के फैसले को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, फैसले के बाद दंगे-फसाद न हों इसके लिए भी सरकार सजग है, परन्तु जब तक देश का हर नागरिक इस शांति-मिशन में सहयोग नहीं करेगा तब तक शांति-मिशन पूरा होने में संशय है. राम जन्म भूमि के “अवध” और “अयोध्या” ये दो नाम स्वयं में शांति का सन्देश समेटे हुए हैं. अ+वध अर्थात वध रहित. अ+योध्या अर्थात युद्ध रहित. इसी भूमि के नाम पर खून खराबा! क्या यह उचित होगा! हम भी समर्थक हैं हिन्दू संस्कृति के! हमें भी हिन्दू होने का अभिमान है परन्तु क्या हमारी हिन्दू संस्कृति हमें इस बात की अनुमति देती है, क्या मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम पर किया गया ये संग्राम श्रीराम की मर्यादा को तोड़ने वाला तो नहीं होगा! इस पर विचार करना आवश्यक है.
कुछ समाचार चैनलों के माध्यमों से पता चला है कि दंगा-फसाद होने और न होने को लेकर सटोरियों ने सट्टे लगाये हैं, ऐसे में अगर हिन्दू-मुस्लिम दंगे न भी करें तो ये सटोरिये भी दंगों की आग लगाने का काम कर सकते हैं. इन सबसे हमें सतर्क रहना है और देश की शांति बरक़रार रखने में तन-मन-धन से समर्पित रहना है.शांति लाने के लिए ही भगवन श्रीराम ने राक्षसों का संहार किया था, क्योकि राक्षस वो होते हैं जो देश और समाज को क्षति पहुंचाते है न की अलग अलग धर्म के लोग. यदि आप वाकई श्रीराम के भक्त है या ईश्वर के किसी भी रूप को मानने वाले हैं तो देश और समाज में शांति और सौहार्द लायें. यही आपकी सच्ची भक्ति और उपासना होगी.
लेखक हनुमान मिश्रा स्वतंत्र रूप से लेखन का कार्य करते हैं.

