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ये पत्रकार नक्‍सलवादी हैं!

कांग्रेस के युवराज एवं राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी बैतूल आकर चले भी गये, लेकिन उनके आगमन के दौरान पत्रकारों पर लगे दाग आज तक नहीं साफ हो सके हैं। बैतूल जिला प्रशासन ने जिला मुख्यालय पर कार्यरत राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक न्यूज चैनल के तीन पत्रकारों को नक्सलवादी कहकर राहुल गांधी के कार्यक्रम एवं अस्थायी हेलीपेड पर घुसने की अनुमति नहीं दी। राहुल गांधी की सुरक्षा में बैतूल आकर दिल्ली वापस लौटी विशेष सुरक्षा दस्ता की टीम द्वारा किये गये खुलासे के बाद जो जानकारी सामने आई वह काफी चौकान्ने वाली है। बैतूल जिले में कार्यरत श्रमिक आदिवासी संगठन एवं समाजवादी जनपरिषद से जुड़े अनुराग मोदी से कथित निकटता के चलते बैतूल जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा एनडीटीवी के अकील अहमद अक्कू, सहारा समय मध्यप्रदेश एवं छत्‍तीसगढ़ के इरशाद हिन्दुस्तानी तथा ईटीवी मध्यप्रदेश एवं छत्‍तीसगढ़ के बैतूल स्थित संवाददाता एवं कैमरामैनों  को हेलीपेड से लेकर कार्यक्रम स्थल तक यह कह कर प्रवेश देने से मना कर दिया गया था कि उक्त सभी पत्रकार नक्सलवादी है?

कांग्रेस के युवराज एवं राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी बैतूल आकर चले भी गये, लेकिन उनके आगमन के दौरान पत्रकारों पर लगे दाग आज तक नहीं साफ हो सके हैं। बैतूल जिला प्रशासन ने जिला मुख्यालय पर कार्यरत राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक न्यूज चैनल के तीन पत्रकारों को नक्सलवादी कहकर राहुल गांधी के कार्यक्रम एवं अस्थायी हेलीपेड पर घुसने की अनुमति नहीं दी। राहुल गांधी की सुरक्षा में बैतूल आकर दिल्ली वापस लौटी विशेष सुरक्षा दस्ता की टीम द्वारा किये गये खुलासे के बाद जो जानकारी सामने आई वह काफी चौकान्ने वाली है। बैतूल जिले में कार्यरत श्रमिक आदिवासी संगठन एवं समाजवादी जनपरिषद से जुड़े अनुराग मोदी से कथित निकटता के चलते बैतूल जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा एनडीटीवी के अकील अहमद अक्कू, सहारा समय मध्यप्रदेश एवं छत्‍तीसगढ़ के इरशाद हिन्दुस्तानी तथा ईटीवी मध्यप्रदेश एवं छत्‍तीसगढ़ के बैतूल स्थित संवाददाता एवं कैमरामैनों  को हेलीपेड से लेकर कार्यक्रम स्थल तक यह कह कर प्रवेश देने से मना कर दिया गया था कि उक्त सभी पत्रकार नक्सलवादी है?

जिला प्रशासन द्वारा इन सभी पत्रकारो को नक्सलवादी बताने के बाद भी राहुल गांधी की सुरक्षा में आये दस्ते ने प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया की ओर से मात्र एक कैमरामेन को प्रवेश दिया। बताया जाता है कि बैतूल जिला प्रशासन अपने कुछ चहेते पत्रकारों को हेलीपेड एवं कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश दिलाना चाहता था लेकिन सुरक्षा दस्ता किसी भी पत्रकार को प्रवेश नहीं देना चाहता था। राजनैतिक हस्तक्षेप के बाद जब कुछ राष्ट्रीय स्तर के न्यूज चैनलों को प्रवेश देने की बात आई तो जिला प्रशासन ने उन पत्रकारों की तुलना नक्सलवादियो से कर डाली।

इधर बैतूल जिला प्रशासन के द्वारा पत्रकारों को नक्सलवादी कहे जाने के पीछे की कहानी भी कम चौकाने वाली नहीं है। बताया जाता है कि अनुराग मोदी एवं शमीम मोदी की ओर से दायर की गई एक जनहित याचिका में बैतूल जिले के कई बड़े आला अफसर एवं राजनैतिक दलों के नेताओं को चौथिया के बहुचर्चित पारधी कांड में आरोपी बनाये जाने के बाद से इस प्रकरण को मीडिया में जमकर उछालने वाले पत्रकारो को अब प्रशासन तथाकथित नक्सलवादी बता कर अपनी भड़ास को निकालना चाहता था।

श्रमिक आदिवासी संगठन से जुडे अनुराग मोदी के अनुसार- गरीब-आदिवासी की बात को यदि शासन के सामने लाना नक्सलवाद है तो हमें और हमारे पत्रकार साथियों को नक्सलवादी कहे जाने से कोई परहेज नहीं। हम कोई गोली-बारूद से तो लड़ाई लड़ नहीं रहे हैं, ऐसे में कलम की मार से परेशान प्रशासन इस तरह बौखलाहट को प्रर्दशित करता है तो साफ है कि बैतूल जिले में अधिकारी और राजनेता का जमावड़ा गरीब-आदिवासियो एवं ग्रामीणों का शोषण कर रहा है। बैतूल जिले के प्रमुख सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों ने बैतूल जिला एवं पुलिस प्रशसान की इस ओछी मानसिकता की निंदा करते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे बैतूल जिले के आला अफसरों को सुबुद्धि प्रदान करे।

लेखक राम किशोर पंवार पत्रकार हैं.

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