उ.प्र. के जिला ललितपुर शहर कोतवाली अंतर्गत ग्राम पचोनी में इंसानियत की मौत हो गई. दरिंदों की हवस इतनी बाद गई कि एक किशोरी से बलात्कार की कोशिश की गई. असफल होने पर पांच भूखे दरिंदो ने लड़की पर मिट्टी का तेल छिड़क कर 17 साल उस नाबालिग किशोरी को जिन्दा जला डाला. दो दिन जीवन-मृत्यु के बीच झूलती किशोरी आखिरकार मौत से हार ही गई. तड़पती कराहती वो सरकारी अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया. ललितपुर में ऐसी घटनाएं होना आम बात हो गई हैं. ऐसी दरिंरगी सुनकर किसी का भी कलेजा मुंह में आ सकता है. लेकिन यहां की पुलिस को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. इस मामले में भी एफआईआर लिखने से पहले पीडि़त के परिजनों को पुलिस ने खूब घुमाया. ललितपुर की इस घटना में पांच युवकों ने सरेआम एक घर में घुस कर अपने गांव की ही 17 साल की किशोरी के साथ बलात्कार करने की कोशिश की. लड़की ने जब अपना बचाव किया और उनकी शिकायत करने की बात कही तो उसे मिटटी का तेल छिड़क कर जला डाला गया. अस्पताल में कराहते, दर्द से बिलखते, जलन से सिसकते उसने दम तोड़ दिया.
इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर लिखना तो दूर इसे महिला थाने का मामला कहकर पल्ला झाड़ लिया. काफी समय तक पीड़ित लोगों को पुलिस घुमाती रही, बाद में काफी कोशिश के बाद एफआईआर दर्ज किया गया. अभी तक उन पांच दबंगों का पता नहीं चल पाया है. किसी ने भी इस खबर को महत्व नहीं दिया. मेरा कहना बस इतना ही है कि क्या एक गरीब की लड़की को सरेआम हवस का शिकार बनाना और जलाना आम बात है. यदि यही सब कुछ किसी बड़े आदमी के साथ होता तो शायद आसमान सिर पर उठाने जैसी बात हो जाती. यहां एक माह में तकरीबन चार-पांच ऐसी घटनाओं के बारे में मैं ही सुन चुका हूं. अभी कुछ समय पहले एक नेता के लड़के ने एक लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाकर उसे जिन्दा जला दिया था. आलम यह था कि दबाब के चलते संबंधित थाने में एफआईआर भी नहीं लिखी जा रही थी, फिर बात बढ़ती देख पुलिस ने किसी तरह एफआईआर लिखा.
उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड की पुलिस का हिसाब जानने वाले ज्यादातर लोगों का कहना है कि कोई नहीं चाहता कि यहां जागरुकता हो. यहां ऐसे बहुत से मामले हैं लेकिन पुलिस एफआईआर दर्ज करना नहीं चाहती. कई मामलों में तो एफआईआर इसलिए दर्ज नहीं की जाती है कि शिकायत करने वाला यहां फिक्स रेट देने में असमर्थ रहता है. यहां जो रेट फिक्स है उसके अनुसार प्रार्थना-पत्र लेने के 50 रूपये, तुरंत कार्रवाई के 100 रुपये, किसी को किसी केस में फंसाने के 1000 हजार रुपये. मेरी इस बात का यकीन ना हो तो सरकार से मेरा अनुरोध है कि वह स्वयं अपने स्तर से इस बात की जांच करा ले. मेरा उद्देश्य किसी एक विभाग को बदनाम करने का नहीं है, अधिकतर विभाग ऐसी ही आदतों के शिकार हैं. मेरा कहना है कि जैसे अन्य राज्यों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए हेल्प लाइन सेवा चलाई जा रही है वैसे ही अपने प्रदेश में भी ऐसी सेवा जनता के लिए शुरू की जानी चाहिए.
लेखक शैलेन्द्र पराशर भोपाल में पत्रकारिता के छात्र हैं.

