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इन्‍हें दरकार है हास्‍य व्‍यंग्‍य की!

डा. भीमराव अंबेदकर विश्वविद्यालय आगरा के अधीन नारायण महाविद्यालय शिकोहाबाद, जनपद फीरोजाबाद में ‘समकालीन मंचीय हास्य व्यंग्य काव्य का वैचारिक पक्ष’ शीर्षक से शोध प्रबंध पर मैं पिछले कुछ समय से काम कर रहा हूं। मंच की कविता के वैचारिक पक्ष की पड़ताल एक विद्यार्थी के लिये चुनौती का काम है। उसमें भी हास्य जैसा विषय और दुरूह है। अतः इस कार्य में अनेक सुधीजनों के सहयोग की आवश्यकता अपेक्षित है। प्रारंभिक खोज में मंचीय काव्य परंपरा पर प्रकाशित सामग्री का अकाल दिखाई पड़ रहा है। हास्य के नाम पर निरर्थक कविताओं की भरमार दिखाई देती है जो शोध के लिये उपयुक्त नहीं मानी जाती हैं। फिर भी मेरा पूरा भरोसा है कि मंचीय हास्य व्यंग्य पर सार्थक सामग्री भी अनेक विद्वानों पर प्रचुर मात्रा में मिलेगी। पी-एचडी के लिये आलोचनात्मक, परिचयात्मक और विवरणात्मक सामग्री का होना अनिवार्य है। इस दृष्टि से मेरी खोज फिलहाल नगण्य है। कई महानुभावों ने आश्वासन दिया है, लेकिन और अधिक सामग्री की आवश्यकता है। आगरा से प्रकाशित ‘संस्कृत वांगमय में हास्य’ और जयपुर से प्रकाशित कवि सम्मेलनीय पत्रिका जैसी पुस्तकों से कुछ-कुछ सामग्री मिल रही है।

डा. भीमराव अंबेदकर विश्वविद्यालय आगरा के अधीन नारायण महाविद्यालय शिकोहाबाद, जनपद फीरोजाबाद में ‘समकालीन मंचीय हास्य व्यंग्य काव्य का वैचारिक पक्ष’ शीर्षक से शोध प्रबंध पर मैं पिछले कुछ समय से काम कर रहा हूं। मंच की कविता के वैचारिक पक्ष की पड़ताल एक विद्यार्थी के लिये चुनौती का काम है। उसमें भी हास्य जैसा विषय और दुरूह है। अतः इस कार्य में अनेक सुधीजनों के सहयोग की आवश्यकता अपेक्षित है। प्रारंभिक खोज में मंचीय काव्य परंपरा पर प्रकाशित सामग्री का अकाल दिखाई पड़ रहा है। हास्य के नाम पर निरर्थक कविताओं की भरमार दिखाई देती है जो शोध के लिये उपयुक्त नहीं मानी जाती हैं। फिर भी मेरा पूरा भरोसा है कि मंचीय हास्य व्यंग्य पर सार्थक सामग्री भी अनेक विद्वानों पर प्रचुर मात्रा में मिलेगी। पी-एचडी के लिये आलोचनात्मक, परिचयात्मक और विवरणात्मक सामग्री का होना अनिवार्य है। इस दृष्टि से मेरी खोज फिलहाल नगण्य है। कई महानुभावों ने आश्वासन दिया है, लेकिन और अधिक सामग्री की आवश्यकता है। आगरा से प्रकाशित ‘संस्कृत वांगमय में हास्य’ और जयपुर से प्रकाशित कवि सम्मेलनीय पत्रिका जैसी पुस्तकों से कुछ-कुछ सामग्री मिल रही है।

हास्य व्यंग्य विषयक ऐतिहासिक, प्रागैतिहासिक संदर्भों वाली विभिन्न प्रकार की प्रकाशित सामग्री मेरे काम की हो सकती है। हास्य व्यंग्य के अलावा रस और काव्य शास्त्र तथा शोध और आलोचना संबंधी अन्य पुस्तकों/सामग्री की भी मुझे आवश्यकता है। इस पत्र के माध्यम से मैं काव्य, पत्रकारिता, मंच और साहित्य अथवा कला, के क्षेत्र में कार्यरत तमाम महानुभावों से निवेदन करता हूं कि मुझे कृपया अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करें। मैं उनका सदैव ऋ़णी रहूंगा। मेरे लायक सामग्री के बारे में आपके द्वारा मुझे मेल अथवा फोन से दी गयी सूचना ही पर्याप्त होगी। सामग्री उपलब्ध करा सकें तो सोने पर सुहागा। मुझे पूर्ण आशा है कि सार्थक और शिष्ट मंचीय हास्य-व्यंग्य काव्य परंपरा को बल प्रदान करने के उद्देश्य से इस शोध प्रबंध में आपका सहयोग मिलेगा।

सादर

मुकेश कुमार उपाध्याय (मुकेश मणिकांचन)

फोनं नंबर 9927013467, 9411060600

ई-मेल [email protected]

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