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उपभोक्‍ता दिवस : सिर्फ रस्‍म अदायगी तक

सिवनी : आगामी 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाकर उपभोक्ता हितों के संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाला सरकारी महकमा और उपभोक्ता हितों के नाम पर कार्य करने वाले संगठन उपभोक्ता दिवस मनाकर रस्म अदायगी करेंगे. इनके द्वारा उपभोक्ता हितों का कितना ध्यान रखा जाता है। यह इस बात से ही स्पष्ट होता हैं कि उपभोक्ताओं के साथ अनेक उत्पाद कंपनियां और प्रतिष्ठानों में उपभोक्ताओं के साथ खुली धोखाधड़ी होते रहती है और उपभोक्ता के हितों पर उक्त सरकारी महकमा कोई ध्यान नहीं देता, बल्कि धोखाधड़ी करने वालों के साथ सांठ-गांठ किया हुआ दिखाई देता है. यही हाल उपभोक्ता संगठनों का भी है, जिसके पदाधिकारी उपभोक्ता हितों में कोई सार्थक पहल करते हुए नहीं देखे गये हैं. अपने से जुड़े या सगे व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने तक ही इन उपभोक्ता संगठनों का कार्य क्षेत्र सीमित है. सारे शहर में मिलावट वाली अनेक सामग्रियों की बिक्री, तौल में गड़बड़ी करके और उत्पाद घटिया गुणवत्ता के उपभोक्ताओं को सौंपकर व्यापारी वर्ग उन्हें लूट रहा है. पानी मिला हुआ दूध का विक्रय होने के साथ ही अनेक रसायनों युक्त दूध के नाम पर जहर का विक्रय भी शहर में बड़े कारोबार का रूप ले चुका है, परंतु न तो खाद्य विभाग ने उपभोक्ताओं के हितो में ऐसे दूध विक्रय करने वालों पर कोई कार्रवाई की है और न ही उपभोक्ता संगठनों द्वारा इस प्रकार के दूध विक्रय करने की मांग की गई है. हर वर्ष उपभोक्ता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर रस्म अदायगी कर ली जाती है.

सिवनी : आगामी 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाकर उपभोक्ता हितों के संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाला सरकारी महकमा और उपभोक्ता हितों के नाम पर कार्य करने वाले संगठन उपभोक्ता दिवस मनाकर रस्म अदायगी करेंगे. इनके द्वारा उपभोक्ता हितों का कितना ध्यान रखा जाता है। यह इस बात से ही स्पष्ट होता हैं कि उपभोक्ताओं के साथ अनेक उत्पाद कंपनियां और प्रतिष्ठानों में उपभोक्ताओं के साथ खुली धोखाधड़ी होते रहती है और उपभोक्ता के हितों पर उक्त सरकारी महकमा कोई ध्यान नहीं देता, बल्कि धोखाधड़ी करने वालों के साथ सांठ-गांठ किया हुआ दिखाई देता है. यही हाल उपभोक्ता संगठनों का भी है, जिसके पदाधिकारी उपभोक्ता हितों में कोई सार्थक पहल करते हुए नहीं देखे गये हैं. अपने से जुड़े या सगे व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने तक ही इन उपभोक्ता संगठनों का कार्य क्षेत्र सीमित है. सारे शहर में मिलावट वाली अनेक सामग्रियों की बिक्री, तौल में गड़बड़ी करके और उत्पाद घटिया गुणवत्ता के उपभोक्ताओं को सौंपकर व्यापारी वर्ग उन्हें लूट रहा है. पानी मिला हुआ दूध का विक्रय होने के साथ ही अनेक रसायनों युक्त दूध के नाम पर जहर का विक्रय भी शहर में बड़े कारोबार का रूप ले चुका है, परंतु न तो खाद्य विभाग ने उपभोक्ताओं के हितो में ऐसे दूध विक्रय करने वालों पर कोई कार्रवाई की है और न ही उपभोक्ता संगठनों द्वारा इस प्रकार के दूध विक्रय करने की मांग की गई है. हर वर्ष उपभोक्ता दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर रस्म अदायगी कर ली जाती है.

हद तो इस बात की है कि घरेलू गैस वास्तविक उपभोक्ताओं को 21 दिन पश्चात ही दुबारा प्राप्त होती है. बीसवें दिन भी यदि वास्तविक उपभोक्ता को आवश्यकता होती है तो उसे 21 दिन पूर्ण न होने के कारण उसे भरा हुआ गैस सिलेण्डर प्रदान नहीं किया जाता. उसे नियम को मानने की बाध्यता बताई जाती है, जबकि शहर में ही हजारों की संख्या में घरेलू गैस का उपयोग व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में हो रहा है. सैकड़ों वाहन जिनका गैस से चलने का पंजीयन है, इन्हें मनमाने घरेलू गैस सिलेण्डर वितरको द्वारा कहां से प्रदान किये जाते हैं. किस नियम के आधार पर प्रदान किये जा रहे हैं. खाद्य विभाग और उपभोक्ता संरक्षण के नाम काम करने वाले संगठनों को

कम से कम यह जानकारी लेकर सार्वजनिक करना चाहिए. वितरकों द्वारा घरेलू गैस उपभोक्ताओं को तरह-तरह परेशान किया जाता है और हमेशा गैस की किल्लत बताकर आपूर्ति कम बताई जाती है. वहीं अवैध रूप से घरेलू गैस का व्यवसायिक रूप से उपयोग किया जाता है. ऐसे में ये संगठन अवैध उपयोग पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करने का साहस दिखायें, केवल उपभोक्ताओं के हितों में गाल न बजायें. उपभोक्ता दिवस की रस्म अदायगी करते हुए प्रत्‍येक 24 दिसम्‍बर को उपभोक्ता संरक्षण के नाम पर संगठन के पदाधिकारी गाल बजाते हैं.

लेखक मनोज मर्दन त्रिवेदी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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