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इस धन से हर भारतीय को दस हजार का पेंशन मिल सकता है!

बेईमान उद्योगपति, भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट आधिकारी, क्रिकेटर, अभिनेता-अभिनेत्री, गैर-क़ानूनी व्यापार और संरक्षित वन क्षेत्र में काम करने वाले व्याक्ति या फिर सरकार में बैठा कोई मंत्री, आखिर वो देश को इतना क्यों कमजोर करना चाहते है. जिस देश की सरजमीं ने उन्हें पांव रखने की जगह दी और वही लोग उस देश की जड़ें उखाड़ने में लगे हुए हैं. इस देश को अंग्रेज सोने की चिड़ियाँ कहते थे और अब इस देश के चंद लोग सोने की इस चिड़ियाँ को आखिर विदेशों में क्यों बंद रखे हुए हैं… मैं बात कर हूं काले धन की, काली कमाई विदेश भेजने के मामले में भारत अव्वल नंबर पर है। 70 लाख करोड़ रुपए का काला धन तो अकेले स्विस बैंक में जमा है। और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बैकों में भी इनकी जमा पूंजी हो सकती है? दुनिया भर के देशों का आंकड़ा 300 अरब डॉलर के पार है। ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी संस्था की नई रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से लेकर 2008 के बीच भारत से करीब 4680 अरब रुपए विदेश भेजे गए।

बेईमान उद्योगपति, भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट आधिकारी, क्रिकेटर, अभिनेता-अभिनेत्री, गैर-क़ानूनी व्यापार और संरक्षित वन क्षेत्र में काम करने वाले व्याक्ति या फिर सरकार में बैठा कोई मंत्री, आखिर वो देश को इतना क्यों कमजोर करना चाहते है. जिस देश की सरजमीं ने उन्हें पांव रखने की जगह दी और वही लोग उस देश की जड़ें उखाड़ने में लगे हुए हैं. इस देश को अंग्रेज सोने की चिड़ियाँ कहते थे और अब इस देश के चंद लोग सोने की इस चिड़ियाँ को आखिर विदेशों में क्यों बंद रखे हुए हैं… मैं बात कर हूं काले धन की, काली कमाई विदेश भेजने के मामले में भारत अव्वल नंबर पर है। 70 लाख करोड़ रुपए का काला धन तो अकेले स्विस बैंक में जमा है। और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बैकों में भी इनकी जमा पूंजी हो सकती है? दुनिया भर के देशों का आंकड़ा 300 अरब डॉलर के पार है। ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी संस्था की नई रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से लेकर 2008 के बीच भारत से करीब 4680 अरब रुपए विदेश भेजे गए।

मध्यप्रदेश भी काले धन को इकट्टा करने वाले भ्रष्ट आईएएस अफसर भी मौजूद हैं. प्रदेश के सीनियर आईएएस दंपत्ति टीनू और अरविंद जोशी के घर आयकर विभाग ने छापा मारा। दस महीने पहले हुई इस छापेमारी में आयकर विभाग को मौके से ही तीन करोड़ रुपए मिले थे। इस आईएएस दंपति ने 30 साल की नौकरी में भ्रष्ट तरीके से पूरे दो सौ तिरसठ करोड़ की कमाई की। ये दोनों 1979 बैच के आईएस अधिकारी हैं. आखिर सबसे बड़ा सवाल कि 30 साल की नौकरशाही में इनके पास इतना पैसा कहां से आया. सीनियर आईएएस दम्पति को भले ही सरकार ने निलंबित कर दिया हो, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जिससे भ्रष्ट आधिकारियों की नाक में नकेल कसी जा सके. यह तो सिर्फ एक मात्र बानगी है. देश में ना जाने कितने आईएएस, आईपीएस अफसर और राजनेता अलग-अलग ढंग से उन गरीबों के पैसों को अपनी झोली में भर रहे हैं? और आम आदमी टैक्स जमा जमा करके परेशान है.

हम फिर वापस आते है असली मुद्दा यानी स्विस बैंक में जमा धन पर. काली कमाई को विदेश में छिपाने के पीछे हर घूसखोर और भ्रष्ट इंसान का एक ही मकसद होता है। मकसद ये कि विदेशी बैंकों के नियम उन्हें कानून से छिपाए रहते हैं। लेकिन अगर बैंक अपने नियमों में बदलाव करें तो काफी कुछ बदल सकता है। भारत से गया पैसा अगर वापस आता है तो इस देश की ढेरों दिक्कतें दूर हो जाएंगी। हर परिवार की जिंदगी सुधर सकती है। ये देश अमेरिका और चीन को भी पछाड़ सकता है। अगले 30 साल तक भारत टैक्स मुक्त बजट बना सकता है। भारत के सिर पर लदा विदेशी कर्ज एक झटके में खत्म हो जाएगा। अगले 5 साल तक सरकार हर नागरिक को सालाना 10 हजार रुपए की पेंशन देने की हालत में होगी। इस देश के 45 करोड़ गरीब लोगो को एक-एक लाख रूपया भी मिल सकताहै.

लेखक नासिर गौरी ग्‍वालियर में टीवी जर्नलिस्‍ट हैं.

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