साहित्य जगत हमें माफ करियेगा नेपाली..! राजा बैठे सिंहासन पर, यह ताजों पर आसीन क़लम मेरा धन है स्वाधीन क़लम जिसने तलवार शिवा को दी रोशनी उधार दिवा को दी... Bhadas4Media.comNovember 6, 2010