प्रमोशन की रेस में हार रहे जिंदगी की दौड़

यूपी में प्रमोशन पाकर सब इंस्पेक्टर बनने के लिए होने वाली शारीरिक क्षमता परीक्षा (फिजिकल फिटनेस टेस्ट) पुलिसकर्मियों पर लगातार भारी पड़ रही है। प्रमोशन की ललक में जिस तरह एक-एक करके पुलिसकर्मी बेहोश हो रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं, वो सोचने को मजबूर करता है। प्रमोशन की रेस में जिंदगी की रेस को दांव पर लगा रहे पुलिसकर्मियों की मौत असल में पुलिस मकहमे की कार्यप्रणाली, लचर ट्रेनिंग इंतजाम और अस्त-व्यस्त डयूटी के बोझ तले दबे फिजीकली अनफिट पुलिसकर्मियों की तस्वीर पेश करती है। देश के लगभग हर राज्य पुलिस फिजीकली अनफिट पुलिसकर्मियों और अफसरों से जूझ रही है।

अन्‍ना और रामदेव को ललकारने वाली सत्‍ता जनता को भूल गई है

आशीष वशिष्‍ठ भ्रष्टाचार और कालेधन के विरूद्व जो मुहिम अन्ना और रामदेव ने छेड़ी है वो फिलहाल तो किसी मुकाम पर पहुंचती नजर नहीं आ रही है, लेकिन अनशन, आंदोलन और जनविरोध ने केन्द्र सरकार का ब्लड प्रेशर और तनाव जरूर बढ़ा रखा है। अभी शुरुआती मामला है क्योंकि जो विचार या मुद्दा एक बार उठता है वो कभी न कभी अपनी मंजिल तक पहुंच भी जरूर जाता है। अभी तक सरकार सभी मुद्दों और मसलों पर सरकार सांप की भांति कुंडली मारकर चुपचाप बैठी हुई थी। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार, काले धन की वापसी और लोकपाल बिल रूपी सांप को सरकारी बांबी से बाहर निकालने के जैसे ही बीन बजाई बरसों-बरस से नींद की बेहोशी में मस्त सरकारी अमला और उनके आका हरकत में आ गए। जंतर मंतर पर अन्न्ना के अनशन को हलके में लेने वाली सरकार और उसके नुमांइदों को 24 घंटे के भीतर ही अपनी औकात समझ में आ गई थी।