अन्‍ना से सहमत हों या असहमत, भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन जरूरी है

कौशल किशोरआज अन्ना हजारे और उनके भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को लेकर कई सवाल उठाये जा रहे हैं। साहित्यकार मुद्राराक्षस ने (जनसंदेश टाइम्स, 4 जुलाई 2011) आरोप लगाया है कि अन्ना भाजपा व राष्ट्रीय सेवक संघ का मुखौटा हैं और अन्ना के रूप में इन्हें ‘आसान झंडा’  मिल गया है। जन लोकपाल समिति में ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। अन्ना हजारे की यह माँग कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में ले आया जाय, संविधान के विरुद्ध है। मुद्राराक्षस ने यहाँ तक सवाल उठाया है कि अन्ना और उनकी सिविल सोसायटी पर संसद और संविधान की अवमानना का मुकदमा क्यों न दर्ज किया जाय?

निहत्‍थों पर लाठियां चलाने का अभिप्राय

कौशल किशोर ‘वे डरते हैं/किस चीज से डरते हैं वे/ तमाम धन दौलत/गोला-बारूद-पुलिस-फौज के बावजूद?/ वे डरते हैं/कि एक दिन निहत्थे और गरीब लोग/ उनसे डरना बंद कर देंगे.’ चार जून की मध्यरात्रि में देश की राजधानी दिल्ली में सरकारी दमन का जो कहर बरपाया गया, उसे देखते हुए गोरख पाण्डेय की यह कविता बरबस याद हो आती है। योगगुरू रामदेव के आह्वान पर भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में शामिल होने के लिए दूर-दराज से लोग आये थे। ये कोई अपराधी, गुण्डा या आतंकवादी नहीं थे। ये वे सामान्य जन थे जो अपने मत से सरकार चुनते हैं, सरकार बदलते हैं और सरकार के क्रियाकलाप व उसकी नीतियों पर अपना समर्थन जाहिर करते हैं या विरोध करते हैं। भारत का संविधान इन्हें यह अधिकार देता है। इसी के तहत ये रामलीला मैदान में इकट्ठा थे।

अन्‍ना हजारे के लिए आसान नहीं आगे की डगर

कौशल किशोरअन्ना हजारे द्वारा शुरू किये गये आंदोलन के आगे सरकार इतनी जल्दी घुटने टेक देगी, अन्ना अपना अनशन खत्म कर देंगे और जनता जीत जायेगी, यह सब बड़ा अविश्वसनीय सा लग रहा है। अभी तो आंदोलन अपने आरम्भिक चरण में था। लोग जाग रहे थे, जुड़ रहे थे। लोगों का अन्तर्मन करवट ले रहा था। ऐसा महसूस हो रहा था कि 1974 अपने को दोहराने जा रहा है। दुष्यंत कुमार के शब्दों में कहें तो ‘हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए’ अभी तो भगीरथ प्रयास शुरू हुए थे।

किक्रेट विश्‍वकप : कौन जीता?

कौशल किशोर इतिहास अपने को दोहराता है। ऐसा ही हुआ है।1983 के बाद 2011। हम फिर क्रिकेट विश्व चैम्पियन बने। यह एक बड़ी उपलब्धि है। जो हमारे गुरू थे, जिन्होंने हमें गुलाम बनाया और यह खेल सिखाया, उन्हें बहुत पीछे छोड़ दूसरी बार हमने यह जीत हासिल की है। यह ऐसी जीत है जो मन को रोमांचित कर दे। हमारे खिलाड़ी निःसन्देह बधाई के पात्र हैं। हम जोश से भरे हैं। लेकिन ऐसा जोश भी ठीक नहीं जिसमें हम होश खो दें। हम खेल का भरपूर आनन्द उठायें, जीत पर खुशियाँ मनायें, खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करें, एक दूसरे को बधाइयाँ दें पर यह भी जरूरी है कि खेल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी हो।

इरोम शर्मिला का संघर्ष : अंधियारे का उजाला

कौशलइस साल नवम्बर में मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला की भूख हड़ताल के दस साल पूरे हो गये। तमाम अवरोधों और मुश्किलों के बावजूद उनकी भूख हड़ताल आज भी जारी है। इन दस वर्षों में उनका कृषकाय शरीर और जर्जर व कमजोर हुआ है। लेकिन कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने वाली उनकी आन्तरिक ताकत और इच्छा-शक्ति बढ़ी है। यह अदम्य साहस से लबरेज मौत को धता बता देने वाली ताकत है। इसीलिए आज वे इस्पात की तरह न झुकने व न टूटने वाली मणिपुर की ‘लौह महिला’ के रूप में जानी जाती हैं। इरोम शर्मिला सामाजिक कार्यकर्ता और कवयित्री हैं, भावनाओं व संवेदनाओं से भरी। उनके अन्दर खुले गगन में परिन्दों के विचरण जैसी भावना है। यह मात्र भावुकता नहीं है बल्कि यथार्थ की ठोस जमीन पर पका उनका विचार है, जिसके मूल में दमन और परतंत्रता के विरुद्ध दमितो-उत्पीड़ितों द्वारा स्वतंत्रता की दावेदारी है: ‘कैदखाने के कपाट पूरे खोल दो/मैं और किसी राह पर नहीं जाऊँगी/ कांटो की बेड़ियाँ खोल दो’। यही वजह है कि आज वह सत्ता के दमन के विरुद्ध सृजन और संघर्ष की ही नहीं बल्कि हमारे जिन्दा समाज की पहचान बन गई हैं।

दमन के खिलाफ सृजन और संघर्ष की शपथ

: जसम का बारहवां राष्‍ट्रीय सम्मेलन : लूट और दमन की संस्कृति के खिलाफ सृजन और संघर्ष को समर्पित जसम का बारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन 13-14 नवंबर को दुर्ग (छत्तीसगढ़) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रो. मैनेजर पांडेय और प्रणय कृष्ण को पुनः जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव रूप में चुनाव किया गया। सम्मेलन में 115 सदस्यीय नई राष्ट्रीय परिषद का चुनाव किया गया। कामकाज के विस्तार के लिहाज से महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के प्रतिनिधियों को भी राष्ट्रीय पार्षद बनाया गया। प्रलेस के संस्थापक सज्जाद जहीर की पुत्री प्रसिद्ध कथाकार-पत्रकार और नृत्यांगना नूर जहीर समेत 19 नए नाम राष्ट्रीय परिषद में शामिल किए गए। मंगलेश डबराल, अशोक भौमिक, शोभा सिंह, वीरेन डंगवाल, रामजी राय, मदन कश्यप, रविभूषण, रामनिहाल गुजन, शंभु बादल और सियाराम शर्मा को जसम का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी 35 सदस्यों की है, जिसमें सुधीर सुमन, भाषा सिंह, दीपक सिन्हा, सुरेंद्र सुमन, संतोष झा, अनिल अंशुमन, अजय सिंह, के. के. पांडेय, आशुतोष कुमार, बलराज पांडेय, संजय जोशी, सुभाष कुशवाहा, हिमांशु पंड्या, गोपाल प्रधान, कौशल किशोर, पंकज चतुर्वेदी, कैलाश बनवासी और सोनी तिरिया शामिल हैं।