…कहीं तेलगी वाला हाल न हो जाए हसन अली का

क्या हसन अली बीमार है? या फिर बीमारी का बहाना कर रहा है। उसके वकील की मानें तो उसे लकवा (पक्षाघात) मार दिया है। पर जेल प्रशासन इसे अफवाह बताकर खारिज कर रहा है। सच्चाई क्या है यह तो सही जांच से ही पता चलेगा लेकिन इस सब के बीच इससे जुड़ी कुछ जानकारियां चौंकाने वाली हैं। मसलन उसे अपने किये पर पछतावा है। वह रोज-रोज की सुनवाई से आजिज आ चुका है। वह सब कुछ बताने को तैयार है। हालांकि उसका वकील ऐसा करने से मना कर रहा है। लेकिन इसके बावजूद वह खुद को रोक नहीं पा रहा है। पुणे जेल सूत्रों के मुताबिक हसन अली खुलासा करने के लिए बेताब है।

सड़क से लेकर संसद तक लोटती-पलटती सरकार

अन्ना के आगे एक बार फिर सरकार बौनी साबित हुई। अन्‍ना की तैयारी के आगे वह पानी भरती नजर आयी। हालांकि अन्ना की गिरफ्तारी तक वह आत्मविश्वास से लवरेज थी,  पर दिन ढलते-ढलते लोटती-पलटती नजर आने लगी। अन्‍ना की गिरफ्तारी के 12 घंटे के अंदर सरकार इतनी असमंजस में पड़  गयी कि उसे अन्ना की रिहाई के आदेश जारी करवाने पडे़,  लेकिन अन्ना ने जेल से बाहर आने से मना कर दिया। कहा- सरकार बिना शर्त अनशन की इजाजत दे तभी बाहर जाएंगे। रात भर वह तिहाड़ परिसर में ही रहे। इधर रही सही कसर बुधवार को संसद सत्र के दौरान निकलती दिखी। सत्तापक्ष पूरी तरह से हथियार डाले दिखा और विपक्ष पूरी तरह से एकजुट। विपक्ष ने खूब खरीखोटी सुनायी।

बौखलायी कांग्रेस का सच : विलासराव देशमुख और अहमद पटेल का पैसा भी स्विस बैंक में!

आखिर हो क्या गया है कांग्रेस को? वह असंयमित व असहज क्यों है? उनके नेता आपा खोते नजर क्यों आ रहे हैं?  क्या जाने-अनजाने किसी ने उसकी कमजोर नस पकड़ ली है? और अगर ऐसा है तो फिर क्यों नहीं वह खुद को उससे छुड़ा पा रही है? क्या किसी अनहोनी का डर है?  ये ऐसे कुछ सवाल हैं जिसका जवाब फिलहाल न तो आपके पास है और न ही मेरे पास। हां, इससे जुडे कुछ क्लू जरूर हैं। अब आप पर निर्भर करता है कि उन्हें आपस में जोडकर आप कहां तक पहुंच पाते हैं?   इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस बौखलायी है उसे बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी है। चाहे वह आजादी के बाद जनता की आवाज दबाने के लिए इमरजेंसी लगाने का मामला हो या फिर बोफोर्स घोटाले के उजागर होने के बाद की स्थिति। इन दोनों मामलों में उसने पावर दिखाने की कोशिश की और दोनों दफा पावरलेस (सत्ताच्युत) होना पड़ा।