ओसामा की मौत के बाद और असुरक्षित हो गई है दुनिया

अमेरिका का अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन जेरीनेमो’ की सारे संसार में तारीफ हो रही है कि किस प्रकार उसके नेवी सील के जांबाज कमांडोज ने एबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य अकादमी की नाक के नीचे मात्र 40 मिनट में पाकिस्तानी सरकार, सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को खबर हुए बगैर दुनिया के सबसे वांटेड आतंकवादी को न सिर्फ मार गिराया बल्कि उसका शव और कम्प्यूटर आदि सुबूत लेकर स्टील्थ टेक्नॉलॉजी से निर्मित हेलीकाप्टरों में उड़कर अपने ठिकाने पर लौट भी आये। दुनिया को इसकी सूचना तभी लगी जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस से यह सम्बोधन किया कि लादेन मारा जा चुका है। अब सारी बहस इस पर हो रही है कि लादेन के शव के फोटो क्यों नहीं जारी किये गये, उसे समुद्र को क्यों दफना दिया गया, सारे आपरेशन की खबर पाकिस्तान सरकार को क्यों नहीं दी गयी, क्या पाकिस्तान को ओसामा के ठिकाने की जानकारी थी, अमेरिकी हमले के दौरान पाकिस्तानी सेना की नाकामी पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं।

ये तो शुरुआत है, असली चुनौती तो अभी बाकी है दोस्‍तों

आज के गांधी के रूप में विख्यात अन्ना हजारे महाराष्ट्र के अपने गांव रालेगांवसिद्धि, जो उनकी कर्मभूमि भी है, पहुंच चुके हैं। बीबीसी हिन्दी वेबसाइट में प्रकाशित आलेख ‘अन्ना का आदर्श गांव’ बताता है कि कैसे अन्ना ने पांच साल के अथक प्रयासों के बाद गांव के लोगों को शराब पीने से रोका। जिस गांव में शराब की भट्टियां हुआ करती थी वहां कैसे पान-बीड़ी सिगरेट, तम्बाकू की दुकान तक नहीं है। अब वहां बैंक हैं, साफ सुथरी सड़कें हैं और बाहर से आने वालों के लिये जगह है, इंटरनेट और लाइब्रेरी की सुविधा है। सुबह पांच बजे उठकर योग प्राणायाम से अपनी दिनचर्या शुरू करने वाले अन्ना अब भी गांव के उसी लकड़ी के मंदिर में रहते हैं, जहां से 1975 में उन्होंने फौज की ड्राइवर की नौकरी छोड़ने के बाद से समाज सेवा शुरू की थी।