तेरा-मेरा कोना बच गये बेचारे सूर, तुलसी वरना कचड़े के ढेर में होते! [caption id="attachment_2325" align="alignleft" width="60"]डॉ.रुक्म त्रिपाठी[/caption]: इतना दंभ आपमें कहां से भर गया : साहित्कार होने के नाते ढाई लाख का पुरस्कार मिला है : ... Bhadas4Media.comJuly 21, 2010