”पा‍क में आतंकवाद नहीं, मीडिया ने किया दुष्‍प्रचार”

: सरबजीत की रिहाई के सवाल को टाल गए लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सगीर अहमद कादरी : पाकिस्तान में आए दिन बम धमाके हो रहे हों, मिलिट्री मुख्यालय से कुछ मीटर दूरी पर अलकायदा मुखिया ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया हो, पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ फरार हों, एशिया टाइम्स ऑनलाइन के पाक ब्यूरो चीफ सैयद सलीम शहजाद की हत्या कर लाश लावारिसों की तरह फेंक दी गई हो, ड्रोन हमले में कुख्यात आतंकवादी मारे जा रहे हों या कराची स्थित मेहरान नौसेना एयरबेस पर हुए हमले में सैनिक मारे गए हों, परंतु लाहौर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति सगीर अहमद कादरी के मुताबिक पाकिस्तान में पूरी तरह से अमन और शान्ति है। साथ ही पाक मीडिया को लपेटे में लेते हुए आरोप लगाते हैं पाकिस्तान में दहशतगर्दी मीडिया का दुष्प्रचार है।

यासीन मलिक पर जूते-चप्‍पल बरसे

 

राजेंद्र हाड़ा : अजमेर से खदेड़ा गया : तिरंगे का किया अपमान : प्रदर्शन पर बोला – यह तो गुंडागर्दी है : जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नेता यासीन मलिक अजमेर में भी अपनी अलगाववादी हरकतें करने से नहीं चूका। उसने भेंट स्वरूप दिए जा रहे तिरंगे झंडे को यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया कि यह उसके देश का झंडा नहीं है। इस्लाम में पवित्र माना जाने वाला जुम्मा यानी शुक्रवार का दिन इस अलगाववादी नेता के लिए काफी बुरा साबित हुआ। उसे अहसास हो गया कि एक शांत शहर भी उसकी मौजूदगी से कैसे उबल सकता है और उसे वहां से खदेड़े जाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। बुधवार 9 फरवरी को अपनी पत्नी मुशाला के साथ अजमेर पहुंचे यासीन मलिक पर शनिवार की सुबह जूते, चप्पल बरसाए गए। जिस होटल में ठहरा था वहां प्रदर्शन हुआ। माहौल इतने उबाल पर पहुंचा कि अजमेर पुलिस ने सोलह घंटे पहले शुक्रवार की रात 12 बजकर दस मिनट पर उसे निजी कार में बैठाकर भारी पुलिस लवाजमे के बीच अजमेर से चलता कर दिया।

पैसा देंगे तो अखबार आपके बाप का, कुछ भी लिखिए!

: पेड न्‍यूज के लिए कुत्‍तों की तरह टूट पड़े थे नैतिकता की दुहाई देने वाले अखबारों के एजेंट : खबर नहीं सौदा पटा रहे थे पत्रकार : पिछले 28 सालों से पत्रकारिता से जुड़ा हूं, परंतु बीते दिनों जिस अनुभव से गुजरा वह भड़ास के माध्यम से पूरी पत्रकार बिरादरी के सामने रखना चाहता हूं। मेरे वे साथी जिन्होंने मेरे साथ दस-दस सालों तक बराबर की डेस्क पर बैठकर रोजाना चार-चार, छह-छह घंटे बिताए, वे साथी जो थे दूसरे अखबारों में परंतु कहीं ना कहीं मिला करते थे और बड़े प्यार से बातें किया करते थे, वे अखबार जो नैतिकता और मूल्यों की दुहाई देते हैं, सब बेनकाब हो गए। पैसा ही उनका ईमान, पैसा ही उनका भगवान, पैसा ही उनकी जान और पैसा ही उनकी आन साबित हो गया। निर्लज्जता की पराकाष्‍ठा तो यह है कि मैं दस दिन उनके सामने गिड़गिड़ाता रहा हूं, ‘यार, कुछ तो लिहाज करो, मैं 25-30 सालों से आपके साथ रहा हूं।’ बात नहीं मानने पर उन्हें यह कहने से भी नहीं चूका हूं कि इस सारे मामले को मैं भड़ास4मीडिया डॉट कॉम और अन्य पत्रकारों व मीडिया प्रतिनिधियों के जरिए सामने लाऊंगा, परंतु वे फीकी हंसी हंसते हुए कहते, ‘यार, आप खुद समझदार हो, इसके अलावा और हम कर भी क्या सकते हैं।’ बड़ी ही बेशर्मी से अगले ही पल, ‘… तो कब दे या भेज रहे हो’ का सवाल दाग दिया करते थे।