दुनिया के सबसे बड़े आतंकी का न्याय होना बाकी है

आरपी सिंहआतंक का साम्राज्य अजर-अमर नहीं होता, उसका अंत होना तय है। अंतरराष्ट्रीय आतंक का पर्याय बन चुका ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सरजमीं पर अमेरिकी नौसेना कमांडो दस्ते के हाथों 2 मई को जिस तरह मारा गया, उससे तो यही जाहिर होता है। मुसोलिनी व हिटलर का दुखद अंत अब विश्व इतिहास का हिस्सा बन चुका है। हालांकि उनके आतंक का खौफ़ अभी भी दुनिया के ज़ेहन से मिटा नहीं है। और ओसामा तो अभी-अभी मरा है। जाहिर है उसका आतंक इतना जल्द मिटने वाला नहीं है। अमेरिका के खिलाफ ओसामा का 9/11 का इस्लामी जिहाद भी लोगों ने अचरज से देखा। आज उसकी मौत को भी लोग उसी अंदाज में देख रहे हैं।

नेताओं को जनता चौराहों पर खड़ा करके गोली मारेगी!

आरपीराष्ट्रव्यापी भ्रष्टाचार के हो रहे नित नये खुलासों से न सिर्फ भारतीय गणतंत्र बेपर्द हुआ है, बल्कि तंत्र की अव्यवस्था भी पूरे राष्ट्र के समक्ष उजागर हो गयी है। हालांकि सियासी चाल चल रहे शातिर व बेशर्म नेताओं के लिए यह कोई बड़ी परेशानी की बात नहीं है। लंपट पूंजी का वर्चस्व जब तक देश पर है तब तक इनके कृत्य इसी तरह लोकतंत्र की अस्मत तार-तार करते रहेंगे। इनके सत्ता-शतरंज का घिनौना खेल भी योंही चलता रहेगा, और भ्रष्टाचार के उजागर होने पर राजनेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ते रहेंगे। पक्ष-विपक्ष आपस में टकरायेंगे। कदाचार को ले थोड़े समय के लिए जनता में भी उबाल आता रहेगा। हम अर्से से यह खेल देख रहे हैं। देश की जनता यह समझती है कि हमारा मीडिया बखूबी अपना धर्म निभा रहा है। दरअसल बात ऐसी नहीं है। भ्रष्टाचार की जो थोड़ी-बहुत सूचनाएं लोगों तक पहुंचती हैं, उसे खुद तंत्र ही उजागर कर देता है। इसके भी अपने निहितार्थ हैं। नेताओं, कालाबाजारियों, नौकरशाहों, संवाद माध्यमों, लाबीस्ट-बिचौलियों, उद्योगपतियों, कॉरपोरेट घरानों के चरम द्बन्द्ब-संघात के ही ये परिणम हैं। अब तो स्थिति यह है कि देश के अंदरूनी मामलों में कॉरपोरेट लॉबीस्ट निर्णायक साबित हो रहे हैं। यहां चिंता की बात तो यह कि कॉरपोरेट घरानों के हित में वे सरकार की नीतियों को प्रभावित करने लगे हैं।