कर्नाटक में खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ है

शेष जीकर्नाटक में बीजेपी का संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है. ऐसा लगता है कि पार्टी के बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री को हटाने के लिए लंबा दांव खेल दिया है. पता चला है कि जिन बारह विधायकों ने पहले बगावत का नारा बुलंद किया था, वे बागी विधायकों की पहली किस्त थे. निर्दलीय विधायक शिवराज तंगदागी ने दावा किया है कि इस बार उनके लोग बिना हल्ला-गुल्ला किये विधान सभा के अन्दर ही खेल कर जायेंगे. यह भी संभव है कि विधान सभा में शक्ति परीक्षण के ऐन पहले बारह विधायक और बगावत का नारा लगा दें. नामी अखबार डेकन हेराल्ड को शिवराज ने बताया कि हालांकि बीजेपी की ओर से सन्देश आ रहे हैं कि अगर बागी विधायक साथ आने को तैयार हो जाएं तो उनकी सदस्यता को बहाल किया जा सकता है, लेकिन सारे लोग एकजुट हैं और उनकी कोशिश है कि बीजेपी विधायकों की कुल संख्या के एक तिहाई से ज्यादा लोग पार्टी से अलग होकर अपने आपको ही असली बीजेपी घोषित कर देगें. इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है कि बीजेपी से अलग होने वाले विधायक राज्य में एक गैर-कांग्रेस सरकार बनाने में मदद करेगें और एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई में एक गैर-कांग्रेस, गैर-बीजेपी सरकार बन जायेगी.

गद्दी के वास्ते कुछ भी करेगा

शेष जीकर्नाटक में लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ हुआ है. जिस तरह से विधायकों ने मारपीट की, ध्वनि मत से विश्वास मत पारित हुआ, जिस तरह से अध्यक्ष के पद की गरिमा को नीचा दिखाया गया, सब कुछ अक्षम्य और अमान्य है. हालांकि राज्यपाल की ख्याति ऐसी है कि वह कांग्रेसी खेल का हिस्सा माना जाता है और वह पूरे जीवन तिकड़म की राजनीति करता रहा है लेकिन उसकी ख्याति का बहाना लेकर किसी पार्टी को लोकतंत्र के खिलाफ काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. इस सारे काण्ड में बीजेपी के आला हाकिम नितिन गडकरी फिर घेर लिए गए हैं और दिल्ली में उनके दुश्मन, डी-4 वाले कह रहे हैं कि पार्टी अध्यक्ष ने गलती की. उन्हें मंत्रिमंडल में बीएस येदुरप्पा को अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अपने विरोधियों के खिलाफ एक्शन लेने की अनुमति नहीं देनी चाहिये थी. यह अलग बात है कि डी-4 भी अब उतना मज़बूत नहीं है, लेकिन मीडिया में अच्छे संबंधों के बल पर गडकरी का मखौल उड़ाने की उसकी ताक़त तो है ही.