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जेल जाने से बचने में अमर सिंह की कोई अक्ल काम नहीं आई

‘वोट के बदले नोट’ मामले में तीस हजारी अदालत ने राज्यसभा सदस्य और समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए 14 दिनों की हिरासत में जेल भेज दिया. अमर सिंह अब 19 सितंबर तक जेल में रहेंगे. अमर सिंह के साथ अन्य तीन लोगों को भी हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है, जिनमें भाजपा के पूर्व सांसद महावीर सिंह भगोरा, फग्गन सिंह कुलास्ते और सांसद अशोक अरगल शामिल हैं.

‘वोट के बदले नोट’ मामले में तीस हजारी अदालत ने राज्यसभा सदस्य और समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए 14 दिनों की हिरासत में जेल भेज दिया. अमर सिंह अब 19 सितंबर तक जेल में रहेंगे. अमर सिंह के साथ अन्य तीन लोगों को भी हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है, जिनमें भाजपा के पूर्व सांसद महावीर सिंह भगोरा, फग्गन सिंह कुलास्ते और सांसद अशोक अरगल शामिल हैं.

इस मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सलाहकार सुधीन्द्र कुलकर्णी के खिलाफ भी सम्मन जारी किया गया था लेकिन वे कोर्ट नहीं पहुँचे क्योंकि वे देश से बाहर हैं. इन चारों के ही ख़िलाफ़ ‘नोट के बदले वोट’ मामले में दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था. दिल्ली पुलिस भाजपा सांसद अशोक अर्गल के खिलाफ भी मामला दर्ज करना चाहती है और इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष से मंजूरी मांगी गई है.

भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने इन गिरफ्तारियों के बाद कहा है कि जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि वोट ख़रीदे जाने से किसे लाभ पहुँचा. कांग्रेस ने कहा है कि उन्हें सरकार बचाने के लिए वोटों की जरूरत ही नहीं थी. पहले कहा जा रहा था कि अमर सिंह अदालत में नहीं आ रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपनी बीमारी की वजह से अदालत में पेश होने से छूट का आवेदन किया था. लेकिन वे अचानक तीस हज़ारी कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने अपने गुर्दे की बीमारी का हवाला देते हुए ज़मानत देने की अपील की. अदालत ने उनसे बीमारी से संबंधिक ताज़ा कागज़ात मांगे तो उन्होंने कहा कि कागज़ात लाने के लिए समय चाहिए होगा.

इस पर तीस हज़ारी कोर्ट की विशेष जज संगीता धींगरा ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस गिरफ़्तारी से भाजपा के दो पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोरा के वकील संजीव सोनी भी नाख़ुश दिखे. उनका कहना है कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहा उन्हें ही मुल्ज़िम बना दिया गया है.

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