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फर्जी नियुक्ति और गबन के आरोपी जिला विद्यालय निरीक्षक को जेल

देवरिया। कई दर्जन कर्मचारियों की स्कूल में फर्जी नियुक्ति करने और दस लाख रुपये के गबन के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पूर्व में तैनात रहे सह जिला विद्यालय निरीक्षक वीपी सिंह की जमानत याचिका को खारिज करते हुए उन्हें बुधवार को जेल भेज दिया। अदालत के इस फैसले से प्रसाशनिक क्षेत्र खास तौर पर शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। शिक्षा निदेशालय द्वारा वीपी सिंह को निलम्बित किए जाने की भी चर्चा है। श्री सिंह इस समय गोरखपुर में तैनात हैं। इस बीच जेल भेजे गए श्री सिंह को मेडिकल के आधार पर जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उनके चाहने वालों ने दिन भर खूब पैरवी भी की।

देवरिया। कई दर्जन कर्मचारियों की स्कूल में फर्जी नियुक्ति करने और दस लाख रुपये के गबन के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पूर्व में तैनात रहे सह जिला विद्यालय निरीक्षक वीपी सिंह की जमानत याचिका को खारिज करते हुए उन्हें बुधवार को जेल भेज दिया। अदालत के इस फैसले से प्रसाशनिक क्षेत्र खास तौर पर शिक्षा विभाग में हड़कम्प मच गया है। शिक्षा निदेशालय द्वारा वीपी सिंह को निलम्बित किए जाने की भी चर्चा है। श्री सिंह इस समय गोरखपुर में तैनात हैं। इस बीच जेल भेजे गए श्री सिंह को मेडिकल के आधार पर जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उनके चाहने वालों ने दिन भर खूब पैरवी भी की।

इस मामले में मुल्जिम बनाए गए बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा विद्यालय के प्रबन्धक और प्रधानाचार्या की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश डाल रही है। यह भी बताया जा रहा है कि वीपी सिंह के जेल भेजे जाने की जानकारी पाते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी एनएन मौर्य देवरिया से फरार हो गए हैं। गौरतलब है कि जिले के सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के दुल्हिन देवी राजधारी कन्या जूनियर हाई स्कूल अहिरौली लाला के लिपिक दहारी प्रसाद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 16 मई 2008 को सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत एक प्रार्थना पत्र देकर उक्त जालसाजी के बाबत कार्रवाई हेतु न्यायालय से गुहार लगाई थी। लिपिक ने अदालत को अवगत कराया था कि सह जिला जिला विद्यालय निरीक्षक वीपी सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी एएन मौर्य, विद्यालय के प्रबन्धक रामायन प्रसाद यादव तथा प्रधानाचार्या दमयन्ती देवी की आपसी मिली भगत से धोखाधड़ी करते हुए विद्यालय में कई अध्यापकों, अध्यापिकाओं और लिपिकों की नियुक्ति फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर की गई है।

बताया जाता है कि उस समय विद्यालय के कन्ट्रोलर उस समय वीपी सिंह थे। अदालत के आदेश पर सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इन आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने विवेचना के बाद चार्ज सीट दाखिल कर दिया था। बाद में आरोपितों ने हाई कोर्ट से अन्तरिम जमानत लिया था। लेकिन बुधवार को नियमित जमानत पर सुनवाई करते हुए जिला जज ओपी सिन्हा ने फर्जी नियुक्ति तथा दस लाख 43 हजार आठ सौ तीस रुपये के गबन को गंभीर अपराध मानकर वीपी सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी।

देवरिया से ओपी श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.

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