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मंदिरों के शहर में एमएमएस के निशाने पर हैं गरीब लड़किंयां

वाराणसी। सर्वविद्या की राजधानी वाराणसी में इन दिनों आर्थिक तौर पर कमजोर लड़कियां अश्‍लील एमएमएस के निशाने पर हैं। बदलती जीवन शैली और चमक-दमक के बीच शहर का ये नया चेहरा है। जहां गरीब और आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार की लड़कियों को प्यार मोहब्बत के जाल में फंसाकर अश्‍लील एमएमएस बनाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो ये काम इन दिनों से शहर में जोरो पर चल रहा है। शहर के कई गेस्ट हाउसों में इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। बड़ी बात तो ये है कि शहर का पुलिस प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है अगर कहीं कोई मामला उनके संज्ञान में आ भी रहा है तो थाने में भुक्तभोगी लड़कियों का चरित्र प्रमाण जारी करके पुलिस वाले उसे बदचलन करार दे दे रहे है। जब कि जिस तरह के मामले सामने आ रहे हैं उसकी अगर गहराई से छानबीन किया जाए तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं। हो सकता है कि इस तरह के कामों को संगठित गिरोह के लोग अंजाम दे रहे हों। चंद लोग मोटी कमाई और अय्याशी के शौक के चलते नादान और नासमझ उम्र की लड़कियों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जहां इनका भविष्‍य हवस की अंधी गलियों में दम तोड़ रहा है।

वाराणसी। सर्वविद्या की राजधानी वाराणसी में इन दिनों आर्थिक तौर पर कमजोर लड़कियां अश्‍लील एमएमएस के निशाने पर हैं। बदलती जीवन शैली और चमक-दमक के बीच शहर का ये नया चेहरा है। जहां गरीब और आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार की लड़कियों को प्यार मोहब्बत के जाल में फंसाकर अश्‍लील एमएमएस बनाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो ये काम इन दिनों से शहर में जोरो पर चल रहा है। शहर के कई गेस्ट हाउसों में इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। बड़ी बात तो ये है कि शहर का पुलिस प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है अगर कहीं कोई मामला उनके संज्ञान में आ भी रहा है तो थाने में भुक्तभोगी लड़कियों का चरित्र प्रमाण जारी करके पुलिस वाले उसे बदचलन करार दे दे रहे है। जब कि जिस तरह के मामले सामने आ रहे हैं उसकी अगर गहराई से छानबीन किया जाए तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं। हो सकता है कि इस तरह के कामों को संगठित गिरोह के लोग अंजाम दे रहे हों। चंद लोग मोटी कमाई और अय्याशी के शौक के चलते नादान और नासमझ उम्र की लड़कियों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जहां इनका भविष्‍य हवस की अंधी गलियों में दम तोड़ रहा है।

बीते शनिवार प्रेम के नाम पर हवस की शिकार बनी अनुराधा (बदला हुआ नाम) की कहानी भी कहीं न कहीं जिस्मफरोशों और सफेदपोशों के गठजोड़ की ओर उगंली उठाती है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर भेलूपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 23 साल की अनुराधा ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसके रंगीन सपने और चाहत की हसरत अश्‍लील एमएसएस के जद में आकर दम तोड़ बैठेगी, पर उस के साथ यही हुआ। उसके मोबाइल पर एक अनजान शख्‍स के फोन से शुरू हुई जान-पहचान उसके इज्जत के लिए खतरा बन गई। टयूशन पढ़ाकर सम्मान के साथ जिदंगी गुजार रही अनुराधा के मोबाइल पर तकरीबन 6 महीने पहले शिवपुर के रहने वाले किसी भाष्‍कर मजूमदार उर्फ बाबी नाम के शख्‍स का फोन आना शुरू हुआ। पहले से शादीशुदा और दो बच्चे के बाप बाबी ने अपनी असलियत को छुपाकर अनुराधा को भरोसे में लेकर मिलने को बुलाया। पहली मुलाकात में उसने अनुराधा की तस्वीर उतार ली। इस हरकत से नाराज अनुराधा ने जब बाबी से बातचीत बंद कर दिया तो बाबी ने अनुराधा को उसके घरवालों को मार डालने की धमकी दी। इस धमकी ने अनुराधा को खामोश रहने पर मजबूर कर दिया।

इसी खामोशी ने बाबी का हौसला बढ़ा दिया। वो अनुराधा को फोन करके उससे मिलने के लिए दबाब बनाने लगा। आखिरकार फोटो वापस करने के नाम पर उसने अनुराधा को मिलने लंका स्थित एक गेस्ट हाउस में बुलाया, जहां उसे धोखे से नशीली चीज खिला दिया। इसके बाद होश खो चुकी अनुराधा का वहशी बाबी ने एमएमएस बना लिया। इसी का दबाब बनाकर बाबी ने इस मासूम को कई बार अपने हवस का शिकार बनाया। अंत में सहने की सारी हदें जब टूटने लगी तो केदार घाट पर एक दोपहर गुमसुम बैठ कर आंसू बहा रही अनुराधा पर जब कुछ पत्रकारों की नजर पड़ी तो उसने अपनी पूरी आपबीती पत्रकारों को सुना डाली। उधर बाबी उसे धमकी दे रहा था कि वो उसके साथ चले। बीते शनिवार को बाबी ने आईपी विजया के पास से गुजर रही अनुराधा को रोक कर उसे जर्बदस्ती अपने साथ ले जाने की कोशिश की तो मौके पर पहुंचे पत्रकारों ने उसे धर दबोचा और भेलूपुर थाने ले गए।

पुलिस ने इस मामले में भले ही आरोपी भाष्‍कर मजूमदार उर्फ बाबी पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया हो लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हो जाता। बड़ा सवाल तो यह है कि उस अनुराधा का क्या होगा? आर्थिक तौर पर लाचार अनुराधा की जिदंगी अब किस ओर करवट लेगी? आम तौर पर लोग इस तरह की घटनाओं को सतही तौर पर देखते हुए लड़की को दोषी करार दे देते हैं। शायद ही कोई घटना की तह तक जाने की कोशिश करता है। बदलती जीवन शैली और बिखतरे मूल्यों के चमक दमक की और भाग रहे समाज में अगर इस तरह की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है तो कहीं लचर कानून व्यवस्था भी इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है, जो घटना के बाद मुकदमा दर्ज करने तक ही अपना काम समझता है न कि इस तरह के गिरोहों का पर्दाफाश कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में। आज अनुराधा तो कल कौन? आखिरकार ये सिलसिला कब रूकेगा।

बनारस से भाष्‍कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.

 

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