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शेहला मसूद हत्याकांड: धारा 164 के नाम पर सीबीआई को दिया धोखा

: तीन आरोपी गुनाह कबूलने के बहाने कोर्ट पहुंचे और खुद को बेकसूर बताया : इंदौर । मप्र की सियासी हलकों में धूम मचा देनेवाले आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड में सीआरपीसी की धारा 164 में इकबालिया बयान देकर जुर्म कबूलने के दावे फुस्सी साबित हुए है सीबीआई को धोखा देकर 2 अप्रैल को तीसरे आरोपी और शॉर्प शूटर ताबिश खान ने तो सीबीआई मजिस्टेÑट के समक्ष फिलहाल बयान देने से ही इंकार कर दिया। सोमवार को जिला जेल से ताबिश खान निवासी कानपुर (उप्र) को सीबीआई की स्पेशल मजिस्टेÑट डा. शुभ्रासिंह की अदालत में पेश किया गया। सीबीआई की ओर से आरक्षक जयनारायण ने केस डायरी पेश की थी जिस पर कोर्ट ने ताबिश को पुलिस हिरासत से अलग कर दिया और एकांत में पूछा कि क्या वह अब भी अपना गुनाह कबूलना चाहता है तो ताबिश ने कहा कि उसने सोच-समझ लिया है और बयान के लिए तैयार है। इसके बाद कोर्ट ने उसे फिर से सोचने के लिए समय दिया किंतु ताबिश बयान देने पर अड़ा था।

: तीन आरोपी गुनाह कबूलने के बहाने कोर्ट पहुंचे और खुद को बेकसूर बताया : इंदौर । मप्र की सियासी हलकों में धूम मचा देनेवाले आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड में सीआरपीसी की धारा 164 में इकबालिया बयान देकर जुर्म कबूलने के दावे फुस्सी साबित हुए है सीबीआई को धोखा देकर 2 अप्रैल को तीसरे आरोपी और शॉर्प शूटर ताबिश खान ने तो सीबीआई मजिस्टेÑट के समक्ष फिलहाल बयान देने से ही इंकार कर दिया। सोमवार को जिला जेल से ताबिश खान निवासी कानपुर (उप्र) को सीबीआई की स्पेशल मजिस्टेÑट डा. शुभ्रासिंह की अदालत में पेश किया गया। सीबीआई की ओर से आरक्षक जयनारायण ने केस डायरी पेश की थी जिस पर कोर्ट ने ताबिश को पुलिस हिरासत से अलग कर दिया और एकांत में पूछा कि क्या वह अब भी अपना गुनाह कबूलना चाहता है तो ताबिश ने कहा कि उसने सोच-समझ लिया है और बयान के लिए तैयार है। इसके बाद कोर्ट ने उसे फिर से सोचने के लिए समय दिया किंतु ताबिश बयान देने पर अड़ा था।

सूत्रों ने बताया कि बयान शुरू होते ही जब उसका नाम-पता तक की लिखापढ़ी हुई थी कि ताबिश ने मजिस्टेÑट से कहा कि वह 164 के बयान का महत्व जानना चाहता है। इस पर उसे बताया गया कि वह यह बयान देने के लिए मजबूर नहीं है और उसके दिए बयान को उसके खिलाफ भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह जानकर ताबिश डर गया उसने कहा कि उसे सीबीआई ने एनकाउंटर की धमकी देकर बयान के लिए मजबूर किया था। वह इस वक्त जेल में है जब भी उसे लगेगा कि बयान देना चाहिए वह खुद कोर्ट को चिट्ठी लिख सूचना दे देंगा। जिस पर कोर्ट ने उसके बयान की प्रक्रिया बंद करते हुए सेंट्रल जेल भेजने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान 164 के बयान की अहमियत जानकर ताबिश के पसीने छूट गए उसने पानी पिलवाने की गुजारिश भी की।

इससे पहले 24 मार्च को एक अन्य शूटर इरफान अली ने 164 के बयान में खुद को पाक साफ बताया था और कहा था कि उसने शेहला को नहीं मारा। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि गुनाह कबूलने के नाम पर मुख्य शूटर इरफान अली निवासी कानपुर ने भी सीबीआई को गच्चा दिया था। इंदौर में मजिस्टेÑट के समक्ष बंद कमरे में दिए बयान में उसने स्वीकारा कि साकिब अर्ली उर्फ डेंजर ने उसे दो लाख में शेहला की हत्या की सुपारी दी थी जिसमें से उसे 35 हजार रूपए मिल भी चुके थे। वह 3-4 बार शेहला की टोह लेने भी गया किंतु उसकी हत्या का मौका नहीं मिल सका। अंतिम बार भी उसे मौका नहीं मिला तो ताबिश व साकिब अली उर्फ डेंजर के साथ वापस लौट गया था। बाद में उसने टीवी पर देखा कि किसी ने शेहला की हत्या कर दी है। उसने साफ कहा कि उसने शेहला की हत्या नहीं की। इसके पूर्व मुख्य षड़यंत्रकारी जाहिदा परवेज ने मजिस्टेÑट के समक्ष खुद को बेकसूर बताया था। कुल मिलाकर तीन आरोपियों के 164 के बयान हुए और तीनों ने ही सीबीआई को गच्चा दे दिया था। शेहला मसूद की गत वर्ष राजधानी भोपाल में हुई हत्या में सीबीआई सत्ताधारी दल भाजपा के विधायक ध्रुव नारायणसिंह का पोलोग्राफी टेस्ट तक करा चुकी है।

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