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चर्चित आइएएस सिडकुल-2 के लिए निवेश मांगने गया था पोंटी के पास!

: नामधारी की गिरफ्तारी के बाद खुल सकता है आईएएस का चिट्ठा! : देहरादून : पोंटी चढ्ढा हत्याकाण्ड के बाद उत्तराखण्ड सरकार में बैठे एक आईएएस का नाम आने के बाद यह आईएएस बचाव की मुद्रा में आ गया है। इतना ही नहीं सूत्रों ने तो यहां तक बताया है कि नाम आने के बाद उसने मुख्यमंत्री को धमकी भी दे डाली है कि वह इस्तीफा दे सकता है। मामले में पोंटी चढ्ढा के साथ करीबी रिश्तों की बात की तस्दीक इस बात से हो जाती है कि खबरनबीसों को मुंह न लगाने वाला यह आईएएस मीडिया मैनेजमेंट में जुट गया है। उल्लेखनीय है कि पोंटी चढ्ढा व उसके भाई हरदीप चढ्ढा की उनके फार्म हाउस में हुई गोलीबारी में मौत के बाद राज्य के इस वरिष्ठ नौकरशाह पर भी पोंटी चढ्ढा के करीबी होने की चर्चाएं तैरने लगी थी। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि पोंटी चढ्ढा से नजदीकी संबंध रखने वाले इस आईएएस की दिल्ली में मौजूदगी दिल्ली पुलिस द्वारा पोंटी चढ्ढा से घटना से तीन दिन पहले हुई वार्तालाप की कॉल डिटेल से निकल चुकी है।

: नामधारी की गिरफ्तारी के बाद खुल सकता है आईएएस का चिट्ठा! : देहरादून : पोंटी चढ्ढा हत्याकाण्ड के बाद उत्तराखण्ड सरकार में बैठे एक आईएएस का नाम आने के बाद यह आईएएस बचाव की मुद्रा में आ गया है। इतना ही नहीं सूत्रों ने तो यहां तक बताया है कि नाम आने के बाद उसने मुख्यमंत्री को धमकी भी दे डाली है कि वह इस्तीफा दे सकता है। मामले में पोंटी चढ्ढा के साथ करीबी रिश्तों की बात की तस्दीक इस बात से हो जाती है कि खबरनबीसों को मुंह न लगाने वाला यह आईएएस मीडिया मैनेजमेंट में जुट गया है। उल्लेखनीय है कि पोंटी चढ्ढा व उसके भाई हरदीप चढ्ढा की उनके फार्म हाउस में हुई गोलीबारी में मौत के बाद राज्य के इस वरिष्ठ नौकरशाह पर भी पोंटी चढ्ढा के करीबी होने की चर्चाएं तैरने लगी थी। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि पोंटी चढ्ढा से नजदीकी संबंध रखने वाले इस आईएएस की दिल्ली में मौजूदगी दिल्ली पुलिस द्वारा पोंटी चढ्ढा से घटना से तीन दिन पहले हुई वार्तालाप की कॉल डिटेल से निकल चुकी है।

राजधानी देहरादून में हो रही चर्चाओं के अनुसार यह आईएएस मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की महत्वकांक्षी योजना सिडकुल-2 के लिए पोंटी चढ्ढा से निवेश की बात करने गया था और इनकी मुलाकात दिल्ली के एक पंच सितारा होटल में हुई थी। चर्चा तो यहां तक है यह आईएएस राज्य में खनन व्यवसाय में पोंटी चढ्ढा को तगड़े मुनाफे का सब्जबाग भी दिखा चुका था। यही कारण है कि वर्तमान में पोंटी चढ्ढा के साथ सुखदेव सिहं नामधारी व तराई क्षेत्र के कुछ विधायक चढ्ढा के खनन कार्यों में हमराह बन गए थे। चर्चाओं के अनुसार इस पार्टी के फोटो दिल्ली पुलिस के हाथ लग चुके हैं लेकिन पोंटी के साथ जहां इस फोटो में सुखदेव सिंह नामधारी दिखायी दिया है वहीं यह चर्चित आइएएस उनसे दूरी पर खड़ा है।

जहां तक पोंटी चढ्ढा के साथ घटना के दौरान मौजूद रहे और पोंटी चढ्ढा की ओर से दिल्ली के छतरपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले सुखदेव सिंह नामधारी का सवाल है तो नामधारी ने शुक्रवार को बाजपुर में एक पत्रकार वार्ता में साफ कर दिया है कि उनको राजनैतिक विद्वेष के चलते फंसाया जा रहा है और वे कहीं भागे नहीं है और न ही वे भूमिगत हुए हैं और उन्होंने साफ कहा है कि वे कहीं छिपे भी नहीं हैं। वहीं नामधारी के इस ताजा बयान के सामने आने के बाद अब यदि दिल्ली पुलिस नामधारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लेती है तो ऐसे में नामधारी से पूछताछ के दौरान पोंटी चढ्ढा और प्रदेश के इस चर्चित आईएएस के संबंधों का खुलासा हो सकता है, हालांकि अब पुलिस ने नामधारी को हरदीप की हत्‍या में अरेस्‍ट भी कर लिया है। जहां तक सूत्रों ने जानकारी दी है, यह चर्चित आईएएस ऊंचे पदों पर बैठे राजनेताओं के निर्देशों के पालन करने के तहत पोंटी चढ्ढा से मिलने दिल्ली गया था।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सैफ विंटर गेम्स 2010 सहित महाराणा प्रताप स्टेडियन के अंतर्गत नवनिर्मित आईस रिंग के निर्माण में घोटाले सहित कई अन्य घोटालों में चर्चित रहा यह आईएएस अब उत्तराखण्ड में मुख्य सचिव बनने की जुगत में लगा है। क्योंकि प्रमुख सचिव विनीता कुमार के बाद यह आईएएस प्रोन्नति सूची में सबसे उपर के ग्रेड पर है। इनका मुख्य सचिव बनने में विनीता कुमार ही सबसे बड़ा रोड़ा हैं और वे एक-दो महीने के भीतर सेवानिवृत्त होने वाली हैं, जहां तक मुख्य सचिव आलोक कुमार जैन की बात की जाए तो वे वर्तमान में केंद्र पर प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन कर चुके हैं और उनका आवेदन स्वीकार भी हो चुका है, ऐसे में यह चर्चित आईएएस प्रदेश का मुख्य सचिव भी बन जाए इसमें कोई हैरत की बात नहीं। वहीं सूत्रों ने बताया है कि राजधानी में तैनाम ब्यूरोक्रट्स का एक वर्ग यह नहीं चाहता है कि भ्रष्टाचार में लिप्त रहा यह अधिकारी राज्य का मुख्य सचिव बने, लेकिन दबी जुबान से कुछ आईएएस अधिकारी यह कहने से भी नहीं चूकते हैं कि प्रदेश में सत्तारूढ़ दलों के लिए इनसे बढ़ा फण्ड मैनेजर किसी भी सरकार को नहीं मिल सकता। पोंटी चढ्ढा मामले में निशाने पर आने के बाद खबरनबीसों से सीधे मुंह बात न करने वाला यह आईएएस बुला-बुलाकर चाय की दावतें ही नहीं दे रहा है, बल्कि उन्हें बड़े-बड़े विज्ञापनों को देने का भी सपने दिखा रहा है, लेकिन मीडिया एक वर्ग राज्य में पनपते भ्रष्टाचार से आजिज़ है और वह यह नहीं चाहता कि किसी भी कीमत पर यह आईएएस प्रदेश का मुख्य सचिव बने।

देहरादून से नारायण परगाई की रिपोर्ट.

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