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रिश्‍वत ना देने पर 3000 कुंतल गेहूं को बरबाद कर डाला!

रिश्वतखोर भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों की करतूत का सबसे बड़ा नमूना उत्तर प्रदेश के इटावा में तब देखने को मिला जब क्रय केंद्र से आये बड़ी तादात में गेहूं को सेंट्रल वेयर हाउस के बाहर खुले आसमान के नीचे भीगने के लिये मजबूर कर दिया गया। भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों की करतूत की खबर मिलने के बाद जब मौके पर जब मीडिया मैन कवरेज के लिये पहुंचे तो भारतीय खाद्य निगम के अधिकारी चोर की तरह पीछे के दरवाजे से भाग निकले।

रिश्वतखोर भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों की करतूत का सबसे बड़ा नमूना उत्तर प्रदेश के इटावा में तब देखने को मिला जब क्रय केंद्र से आये बड़ी तादात में गेहूं को सेंट्रल वेयर हाउस के बाहर खुले आसमान के नीचे भीगने के लिये मजबूर कर दिया गया। भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों की करतूत की खबर मिलने के बाद जब मौके पर जब मीडिया मैन कवरेज के लिये पहुंचे तो भारतीय खाद्य निगम के अधिकारी चोर की तरह पीछे के दरवाजे से भाग निकले।
इटावा मे सेंट्रल वेयर हाउस पर 6 जुलाई से करीब 30 की तादात में ट्रक और टैक्ट्रर खडे़ हैं,  जिन में खासी तादात में गेहूं भरा हुआ है। इस गेहूं को वेयर हाउस में जमा किया जाना था,  लेकिन रिश्वत न देने के एवज में वेयर में इस गेहूं को जमा नहीं करने दिया गया। इधर दो दिन से हो रही भारी बरसात का नतीजा यह देखने को मिला कि गेहूं के बोरों में से गेहूं भीग गया और अकुंर फूटने लगा। गोदाम प्रभारी खुद को चपरासी बता करके कैमरे के सामने से बच करके भागने लगा। सभी पीडित वाहन चालकों का कहना है कि रिश्वत की मांग को पूरा ना करने के कारण उनका गेहूं वेयर हाउस मे अंदर नही रखा गया है।

इटावा में सिविल लाइन इलाके के सराय ऐसर स्थित भारतीय खाद्य निगम के डिपो प्रभारी द्वारा क्रय विभिन्न गेहू खरीद केंद्रों से आये 3,000 क्विंटल गेहूं से भरे 13 ट्रक व 7 ट्रैक्टरों को खाली नहीं कराये जाने से 12 दिन तक भीगता रहा। 6 जुलाई से खड़े वाहनों को 17 जुलाई को खाली कराया गया। इस बीच लगातार बारिश के असर से 617 क्विंटल गेहूं भीगने से उसमें अंकुर फूट चुके थे। डिपो प्रभारी ने इसे क्रय केंद्रों को वापस कर दिया है। औरैया एवं इटावा जनपद के क्रय केंद्र ऊसराहार, सहायल, बिधूना, बरालोकपुर, अछल्दा, रमपुरा, इटैली, भरथना, मकरंदपुर सहित कई अन्य केंद्रों पर क्रय किया गया गेहूं भंडारण के लिए सराय ऐसर स्थित भारतीय खाद्य निगम के डिपो पर ट्रकों और ट्रैक्टरों से 6 जुलाई को आया था। इनमें से कुछ वाहनों पर तिरपाल था। गेहूं भीगने की जानकारी होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएसओ बीआर अहिरवार ने पूर्ति निरीक्षक को मौके पर भेज कर रिपोर्ट तलब की।

रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ भंडारण अधीक्षक जयलाल वर्मा का तर्क रहा कि मंशा (पंजाब) से आने वाली रैक माल गोदाम पर 15 जुलाई को उतरनी थी। उसका भंडारण करने के बाद ही डिपो के बाहर पहले से वाहनों में मौजूद गेहूं को लिया जाना था। उन्होंने तकनीकी अधिकारियों का मौजूद न होना भी बताया। इधर जब रैक नहीं आई तो तकनीकी सहायक प्रथम इंद्रपाल सिंह द्वारा गेहूं की गुणवत्ता जांच कर 17 जुलाई को क्रय केंद्रों से आया गेहूं उतार कर भंडार में रखा गया। इस जांच प्रक्रिया में 617 क्विंटल गेहूं भीग जाने से खराब बताया गया तथा संबंधित क्रय केंद्रों को वापस कर दिया गया। विपणन निरीक्षक राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि 6 जुलाई से वाहनों के लगातार भीगने के बाद भी नहीं उतारा जाना गंभीर मामला है।

भंडार प्रभारी कालीचरन ने बताया कि रैक प्रस्तावित होने के कारण क्रय केंद्रों का गेहूं नहीं उतारा जा सका। किन्हीं कारणों से जब रैक नहीं आयी तो गेहूं 17 जुलाई को अंदर करा दिया गया। इस दौरान दो ट्रैक्टरों पर तिरपाल नहीं था उनका गेहूं भीग गया था। जिलाधिकारी गौरी शंकर प्रियदर्शी ने बताया कि पूरा का पूरा मामला बेहद गंभीर है,  इस मामले को लेकर उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह और जिला पूर्ति अधिकारी बीएस अहिरवार की अगुवाई मे एक जांच दल गठित कर दिया गया है। रिर्पोट आने के बाद कार्रवाई तय की जायेगी चूंकि भारतीय खाद निगम केंद्र सरकार के अधीन आता है ऐसे में कार्रवाई के लिये भारतीय खाद्य निगम के अफसरों को लिखा जायेगा।

इटावा से दिनेश शाक्‍य की रिपोर्ट.

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