महाभारत काल को इंटरनेट युग कहने वाले त्रिपुरा सीएम को डायना हेडन नहीं लगती सुंदर

कुछ ही समय पहले महाभारत काल में इंटरनेट होने की बात कह कर चर्चा में आए, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव ने अब सौंदर्य प्रसाधनों के बारे में बड़ा ही उलजलूल बयान दिया है. उन्होंने पूर्व मिस वर्ल्ड डायना हेडन के सौंदर्य प्रतियोगिता जीतने तक पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने सौंदर्य प्रतियोगिताओं को पहले से ही फिक्स बताया और कहा कि यह सब आयोजन कॉस्मेटिक कंपनियों की चाल के तहत होता है. 

अगरतला के प्रज्ञा भवन में हैंडलूम कारीगरों से जुड़े एक आयोजन में बोलते वक्त मुख्यमंत्री देव ने आगे कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताएं मार्केटिंग माफिया का खेल है. रैम्प पर वो अपनी पोशाकों में महिलाओं को चलाते हैं. ये सब अंतर्राष्ट्रीय टेक्सटाइल माफिया की ओर से किया जाता है. ये पहले से ही तय होता है कि कौन से साल किसके सिर पर ताज रखा जाएगा.’ मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, “ये सब बड़ी कॉस्मेटिक्स कंपनियों की ओर से किया जाता है जिससे कि भारत जैसे देशों में विकासशील बाजार पर कब्ज़ा किया जा सके.”

डायना हेडन कैसे चुन ली गई. 

इस कार्यक्रम के दौरान बिप्लव देव ने जो कहा वह यहां पढ़िए –

“लगातार पांच मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स खिताब भारत को दिए गए. जिसने भी हिस्सा लिया उसे खिताब मिल गया. यहां तक कि डायना हेडन को भी मिल गया. लेकिन मुझे बताइए क्या वो इसके योग्य थीं? कहने को लोग कह सकते हैं कि देव विवाद पैदा कर रहे हैं. लेकिन अगर ऐश्वर्या राय को ये खिताब मिलता है तो मैं समझ सकता हूं. कम से कम उनमें भारतीय सुंदरता के लक्षण तो हैं. हम भारतीयों के लिए देवी लक्ष्मी और सरस्वती सुंदरता को प्रतिबिम्बित करती हैं, लेकिन मैं डायना हेडन की सुंदरता को नहीं समझ सकता. मैं उनका विरोध नहीं कर रहा बस चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा हूं.

अचानक हम लगातार पांच बार खिताब जीत गए. फिर हमने देखा कि देश के हर नुक्कड़-कोने में ब्यूटी पॉर्लर खुल गए. अब क्यों नहीं अधिक खिताब जीते जा रहे. बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने भारतीय बाजार पर कब्जा जमा लिया है. और अब वो नए बाजार तलाशने के लिए कहीं ओर मुड़ गए हैं.

भारतीय महिलाएं कॉस्मेटिक्स के बारे में नहीं जानती थीं. वो अपनी देह को मिट्टी और बालों को राख या मेथी के पानी से धोती थीं. लेकिन उदारीकरण का दौर शुरू होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय कॉस्मेटिक माफिया को भारत में बड़ा बाजार होने की संभावना दिखी. सवा अरब भारतीयों में से आधी आबादी महिलाओं की है. और वो इस बाजार पर कब्जा जमाना चाहते हैं.