कर्ज माफी के झूठे दावे के खिलाफ महाराष्ट्र के 5 लाख किसान जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे

कर्ज माफी का रिकॉर्ड देने से सरकार ने किया इंकार

मुम्बई : महाराष्ट्र सरकार द्वारा 20 हजार करोड़ कर्ज माफी का दावा कर किसानों को गुमराह किया जा रहा है. इससे नाराज राज्यभर के 5 लाख किसानों ने लिखित रूप से फॉर्म भरकर 14 मई को जेल भरो आंदोलन करने का निर्णय लिया है. किसानों के 36 संगठनों ने मांग की है कि 90 लाख किसानों का 34 हजार करोड़ जब तक माफ नहीं किया जाता, तब तक वे जेल में ही रहेंगे.

इस जेल भरो आंदोलन में राज्यभर के प्रमुख किसान क्रांति संगठन, अखिल भारतीय किसान सभा, किसान नेता प्रतिभा शिंदे, किशोर घमाले, सुकाणु समिति कोर कमेटी के सदस्य विश्वास उटगी, जयंत पाटिल, मधुकर पाटिल, मोरावले, अपेट सहित 36 किसान संगठन और किसान नेता के नेतृत्व में किसान आंदोलन में शामिल होंगे.

जून 2017 में सरकार द्वारा वादा किया गया था कि राज्य के 90 लाख लोगों का 34 हजार करोड़ कर्ज माफ करेंगे. इसके बाद अब सरकार द्वारा दावा किया जा रहा है कि राज्य में 20 हजार करोड़ कर्ज माफी की गई है, लेकिन कर्ज माफी किए गए किसानों के नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है.

इसको लेकर किसान संगठनों का दावा है कि सरकार द्वारा किए गए कर्ज माफी के लिए कर्ज के बोझ से दबे किसानों को पहले उनके कर्ज का तीन हिस्सा बैंक में जमा करें, उसके बाद बाकी कर्ज सरकार द्वारा जमा किया जाए. किसानों ने बताया कि जब सरकार द्वारा दावा किया गया था कि 34 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफी की जरूरत है, तो फिर 20 हजार करोड़ कर्ज माफी कैसे की गई.

गांव-गांव जाकर किसानों में जनजागृति

23 मार्च शहीद दिवस से लेकर 27 अप्रैल तक किसान संगठनों द्वारा राज्य के गांव-गांव में जाकर किसानों में जनजागृति की गई. इस दौरान किसानों द्वारा सरकार के खिलाफ अविश्वास जताते हुए निर्णय लिया गया कि जो सरकार किसानों के साथ नहीं, उसके खिलाफ आंदोलन करेंगे. इसके साथ ही राज्यभर के गांवों में हुए सभा के दौरान 5 लाख किसानों द्वारा जेल भरो आंदोलन का फॉर्म भरकर जमा कराया गया है. यह जेल भरो आंदोलन की शुरुआत 14 मई से करने का निर्णय लिया गया.

10 वर्षों में हुई साढ़े 3 लाख आत्महत्याएं

राज्य में सूखा पड़ने, ओला गिरने के कारण खेती का नुकसान सर्वाधिक हुआ है. उत्पादन नहीं होने के कारण किसानों को बैंक का कर्ज वापस करना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में कई किसान सरकार से कर्ज माफी की गुहार भी लगाए, लेकिन सरकार द्वारा नजरअंदाज किया गया. इसकी वजह से कर्ज के बोझ से दबे होने के कारण पिछले 10 वर्षों में साढ़े 3 लाख किसानों ने आत्महत्या की है. इसके लिए सरकार को कर्ज के बोझ से दबे किसानो का पूरा कर्ज माफ करने के साथ ही उन्हें वापस कर्ज दिलाने में भी मदद करनी चाहिए. इससे किसानों के हालात फिर सुधर सकते हैं.

एपीएमसी में दलालों का कब्जा

राज्य के मुंबई कृषि उत्पन बाजार में दलालों का कब्जा होने के कारण किसानों का मोल-भाव नहीं मिल पाता. इसके लिए सरकार को मिनिमम सपोर्ट प्राइज तय करना चाहिए. स्वामीनाथन समिति के रिपोर्ट में बताया गया है कि किसान का उत्पादन में अगर 100 रुपए खर्च होता है तो उसे बाजार में डेढ़ सौ रुपए मिलना चाहिए. इसके अनुसार मिनिमम सपोर्ट प्राइज तय करनी चाहिए, लेकिन एपीएमसी में दलालों का कब्जा होने के कारण किसानों को उत्पादन खर्च से भी कम कीमत मिलती है. इससे निराश होकर कई बार किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं.

नोट भी नहीं, वोट भी नहीं

किसान कर्ज माफी के नाम पर सरकार द्वारा किसानों को गुमराह किए जाने से किसानों में काफी आक्रोश है. इसके लिए किसानों ने इस बार ‘नोट भी नहीं, वोट भी नहीं’ की हुंकार भरी है.

बिजली बिल माफी की मांग

इस आंदोलन में कर्ज माफी के साथ ही कई किसानों के ऊपर बिजली के बिल का भी सवाल रखा गया है. कई वर्षों से किसानों द्वारा मांग की जा रही है कि उन्हें सस्ते दर पर बिजली दी जाए, लेकिन सरकार ने बिजली सस्ता करने की बजाय महंगा कर दी है, इससे किसानों पर बिजली बिल बकाया रकम बढ़ गया है. इसे भी माफ करने की मांग रखी गई है.

लेखक Unmesh Gujarathi मुम्बई से प्रकाशित अखबार दबंग दुनिया के Resident Editor हैं.