धिक्कार इन भारतीय न्यूज चैनलों पर, सरबजीत के परिजन उनके लिए खबर नहीं

 

पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अजमेर यात्रा पर मिनट-दर-मिनट की खबर देने वाले भारतीय न्यूज चैनलों के लिए यह शर्म की बात है। पाक जेल में बंद सरबजीत की बहन दलबीर कौर और बेटी स्वप्नदीप तमाम कोशिशों के बावजूद जरदारी से नहीं मिल पाई। जरदारी की यात्रा के दो दिन पहले दोनों अजमेर आ चुकी थीं। उन्होंने प्रेस कॉफ्रेंस कर बताया कि वे जरदारी से मिलकर सरबजीत की रिहाई की गुहार करने आई हैं। स्थानीय प्रिंट मीडिया ने प्रमुखता से यह खबर छापी। इससे जरदारी की यात्रा के इंतजाम में जुटे देश के प्रमुख प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी इस तथ्य से भलीभांति वाकिफ हो गए।

 

दलबीर कौर और स्वप्नदीप स्थानीय प्रशासन के आगे गिड़गिड़ाती रही कि किसी भी तरह उन्हें जरदारी से मिलने दिया जाए ताकि वे सरबजीत की रिहाई की प्रार्थना उनसे कर सकें। जरदारी आए और चले गए परंतु प्रशासन ने दोनों को उनसे नहीं मिलाया। जरदारी के कपड़े प्रेस करने की‘ब्रेकिंग न्यूज’देने वाले न्यूज चैनलों के लिए सरबजीत या उनकी बहन-बेटी के आंसू और अरमान कोई खबर नहीं थे। यह स्तर है भारतीय न्यूज चैनलों का। जिला कलेक्टर मंजू राजपाल यह कहकर मामला टाल रही है कि मैंने तो दोनों को जरदारी से मिलाने की कोशिश की थी। दोनों की प्रार्थना पाक अफसरों तक पहुंचाई भी परंतु उन्होंने सुरक्षा कारणों से मुलाकात की अनुमति नहीं दी। हमारी कलेक्टर को तो सफाई से झूठ बोलना भी नहीं आता। अगर सच में पाक अफसरों ने मना कर दिया था तो यह बात उन्होंने समय रहते दलबीर कौर और स्वप्नदीप या फिर मीडिया को बता क्यों नहीं दी ताकि वे जरदारी की यात्रा के समय तक अजमेर ही नहीं रहती। दोनों जरदारी की यात्रा के दौरान बेसब्री से मुलाकात का इंतजार करती रहीं।

चलिए दलबीर कौर और स्वप्नदीप से तो पता नहीं कैसे और किस हद तक जरदारी को खतरा महसूस किया गया परंतु अजमेर शहर के प्रथम नागरिक अजमेर नगर निगम के मेयर कमल बाकोलिया से जरदारी को क्या खतरा हो सकता था। मेयर बाकोलिया ने तो आगे होकर अपनी फोटो और वाहन का नंबर जिला प्रशासन को भिजवाया ताकि जरदारी के स्वागत की अनुमति मिल सके और वे भी उनके काफिले में हैलीपैड से दरगाह तक आ-जा सकें। मेयर बाकोलिया को भी जरदारी के स्वागत के अनुमति जिला कलेक्टर मंजू राजपाल ने नहीं दी। अलबत्ता वे खुद अपनी दो महिला अधिकारियों के साथ बुके लेकर हैलीपैड पर जरदारी और बिलावल के स्वागत में जुटी रहीं। बाकोलिया तो कांग्रेस पार्टी के ही हैं। उनकी पार्टी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, देश के कथित युवराज राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली-जयपुर में जरदारी का स्वागत कर रहे थे। ऐसे में अजमेर में कांग्रेस पार्टी से बने मेयर के स्वागत में क्या परेशानी या खतरा हो सकता था।

जरदारी के लिए जुटी भीड़ में एक बेबस मां गुजरात के जामनगर की आयशा भी थीं। उसका तेरह साल का मासूम बेटा कासिम पाकिस्तान की जेल में बंद है। कासिम 2003 में दुबई से जहाज में लौट रहा था। खबर है कि पाकिस्तानी सेना ने उसे पकड़ लिया और वह तब से ही पाक जेल में है। जरदारी के अजमेर आने की खबर सुन यह बेबस मां यहां चली आई ताकि जरदारी से मिलकर बेटे की रिहाई की प्रार्थना कर सके। पुलिस ने जरदारी की जियारत के लिए दरगाह खाली करवाते समय आयशा को भी जबरन दरगाह से बाहर निकाल दिया। अपने अरमान लिए भीड़ मे खड़ी वह रोती रही। जरदारी की शान में कसीदे गढ़ रहे हमारे न्यूज चैनलों के किसी कैमरे की नजर इस बेबस मां और उसके आंसुओं पर नहीं पड़ी। पड़ती भी क्यों उनके लिए यह कोई खबर जो नहीं थी।

अपनी ओबी वैन लेकर अजमेर में डटे न्यूज चैनलों के लिए यह तीनों ही खबरें, खबर नहीं थीं। यह स्तर रह गया है अब हमारे न्यूज चैनल रिपोर्टरों, एंकरों और संपादकों का। इससे तो स्थानीय प्रिंट मीडिया ही भला जिसने इन मुद्दों को उठाया तो सही और जरदारी के कुर्ता-पाजामा के प्रेस की खबर न्यूज चैनलों के लिए छोड़ दी।

राजेंद्र हाड़ा राजस्थान के अजमेर के निवासी हैं. करीब दो दशक तक सक्रिय पत्रकारिता में रहे. अब पूर्णकालिक वकील हैं. यदा-कदा लेखन भी करते हैं. लॉ और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहे हैं. उनसे संपर्क 09549155160, 09829270160 के जरिए किया जा सकता है.

 

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