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अन्ना आंदोलन में जेपी आंदोलन की यादें ताजा हो गईं लेकिन केजरीवाल ने जनता के साथ धोखा किया : शांतिभूषण

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जयप्रकाश फाउंडेशन की ओर से आज मशहूर कानूनविद और भारत के पूर्व कानून-मंत्री शांतिभूषण ने भारत में राजनीतिक सुधार और चुनौतियां और संभवनाएं विषय पर जयप्रकाश स्मृति व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि नेहरू परिवार ने देश के लिए बहुत योगदान दिया लेकिन उनकी सीमा परिवारवाद है। जेपी आंदोलन उसी परिवारवाद और उसकी तानाशाही के खिलाफ था।  अन्ना आंदोलन में जेपी आंदोलन की यादें ताजा हो गईं लेकिन अरविंद केजरीवाल ने लोगों के साथ धोखा किया। केजरीवाल लोगों को बरगला रहे हैं। अरविंद तानाशाह है। आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री पैसा बनाने में जुटे हैं। भ्रष्टाचार से लडने का दावा करने वाली पार्टी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनावों में 3 करोड रुपया खर्च कर दिया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जयप्रकाश फाउंडेशन की ओर से आज मशहूर कानूनविद और भारत के पूर्व कानून-मंत्री शांतिभूषण ने भारत में राजनीतिक सुधार और चुनौतियां और संभवनाएं विषय पर जयप्रकाश स्मृति व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि नेहरू परिवार ने देश के लिए बहुत योगदान दिया लेकिन उनकी सीमा परिवारवाद है। जेपी आंदोलन उसी परिवारवाद और उसकी तानाशाही के खिलाफ था।  अन्ना आंदोलन में जेपी आंदोलन की यादें ताजा हो गईं लेकिन अरविंद केजरीवाल ने लोगों के साथ धोखा किया। केजरीवाल लोगों को बरगला रहे हैं। अरविंद तानाशाह है। आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री पैसा बनाने में जुटे हैं। भ्रष्टाचार से लडने का दावा करने वाली पार्टी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनावों में 3 करोड रुपया खर्च कर दिया।

कार्यक्रम का स्वागत भाषण जीवविज्ञानी प्रो प्रमोद यादव ने देते हुए जयप्रकाश नारायण और जेपी फाउंडेशन के योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ गंगा सहाय मीणा ने और धन्यबाद ज्ञापन डा अजय कुमार ने किया। कार्यक्रम में मशहूर अथर्शास्त्री प्रो अरुण कुमार- मीडिया विशेषज्ञ डा आनंद प्रधान, समाजसेवी डा रंजना कुमारी, राजवीर पंवार, प्रो अनिल ठाकुर, प्रो डी के गिरी, सहित बडी संख्या में लोग मौजूद थे। उन्होंने 1977 में बनी जनता पार्टी सरकार का महत्व रेखांकित करते हुए कहा कि वह 44वां संविधान संशोधन लेकर आई जिसने लोकतंत्र् को बचाया। उसी दौरान संपत्ति का अधिकार खत्म हुआ, उसी वक्त संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की एक तिहाई भागीदारी का सवाल पहली बार उठा।

साथ ही उस दौरान राजनीतिक सुधार के लिए समितियां बनी जिसने जरूरी सुधार सुझाए। जामिया शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो बादशाह आलम ने कहा कि शिक्षा से लेकर सभी जरूरी सवालों पर यूपीए और एनडीए की नीतियों में कोई फर्क नहीं हैण् शिक्षा को कमोडिटी बनाने की प्रक्रिया चल पडी है। 24 घंटे वाले मीडिया के पास पर्याप्त समय है लेकिन वह जरूरी खबरों को छोडकर अनर्गल चीजें दिखाने में लगा है। वरिष्ठ समाजशास्त्री और स्वराज अभियान के राष्ट्रीय संयोजक प्रो आनंद कुमार ने कहा कि भारतीय राजनीति  की विडंबना यह है कि जनतंत्र का दायरा बढ रहा है लेकिन नतीजे के तौर पर तीन जमातें घटती जा रही हैं। महिलाएं, अल्पसंख्यक और गरीब चुनाव सुधार आज की बहुत बडी जरूरत। पार्टी सिस्टम कमजोर हुआ है। नागरिक शक्ति का निर्माण राजनीतिक सुधार के लिए बहुत जरूरी है। राजनीतिक सुधारों से ही सामाजिक और आर्थिक सुधार निकलेंगे।

प्रेस-विज्ञप्ति

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