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नालंदा विश्वविद्यालय : दो संकायों में शिक्षण कार्य प्रारंभ

भविष्य में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में अपनी जगह बनाने वाले नालंदा विश्वविद्यालय, जिसका गठन विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 के तहत हुआ था, अब कार्य करने लगा है। राजगीर (बिहार) में स्थित इस विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र और पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र में शिक्षण कार्य में प्रारंभ हो गया है। इसके साथ ही हमारे देश में एक ऐसे नए मील का पत्थर सुशोभित हो गया है जो देश को ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय संचालित करने का गौरव प्रदान करता है। यह हमारे लिए वैश्विक स्तर पर अकादमिक क्षेत्र में नई उपलब्धि का सूचक है।

भविष्य में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में अपनी जगह बनाने वाले नालंदा विश्वविद्यालय, जिसका गठन विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 के तहत हुआ था, अब कार्य करने लगा है। राजगीर (बिहार) में स्थित इस विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र और पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र में शिक्षण कार्य में प्रारंभ हो गया है। इसके साथ ही हमारे देश में एक ऐसे नए मील का पत्थर सुशोभित हो गया है जो देश को ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय संचालित करने का गौरव प्रदान करता है। यह हमारे लिए वैश्विक स्तर पर अकादमिक क्षेत्र में नई उपलब्धि का सूचक है।

नालंदा विश्वविद्यालय में और पांच अध्ययन केंद्र खोले जाएंगे जिसमें भाषा विज्ञान और साहित्य; बौद्ध अध्ययन; दर्शन और तुलनात्मक धर्म अध्ययन; अर्थशास्त्र और प्रबंधन; अंतरराष्ट्रीय संबंध और शांति अध्ययन केंद्र; सूचना और विज्ञान प्रौद्योगिकी शामिल होंगे। सभी अध्ययन केंद्रों में शिक्षण कार्य अकेडिमक वर्ष 2017-18 से प्रारंभ होगा। नालंदा विश्वविद्यालय में 500 संकाय सदस्य एवं स्टाफ होंगे जो परास्नातक एवं शोध के क्षेत्र में विश्व भर के 2450 छात्रों को ज्ञान और डिग्रियां प्रदान करेंगे। भारत सरकार ने इस विश्वविद्यालय के लिए 2727 करोड़ रूपये की राशि जारी कर दी है जो इसकी पूंजीगत उद्देश्यों में सन‍ 2121 तक खर्च होगी।

कुल मिलाकर इस विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय व अत्याधुनिक बनाने के लिए राजगीर कैंपस से लेकर पटना तक एक उम्दा चौड़ी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने अपने पूर्व के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र और शांति अध्ययन केंद्र नई दिल्ली में स्थापित और संचालित किए जाएंगे। नए आदेश के तहत अब नालंदा विश्वविद्यालय के सभी सातों अध्ययन केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय के ही एकीकृत कैंपस में संचालित होंगे। इससे ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की गरिमा और उसका पुरातात्विक शिल्प का महत्व बरकरार रहेगा।

नालंदा विश्वविद्यालय, एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय होगा जो भारत की पौराणिक सभ्यता-संस्कृति, उसकी गरिमा और प्राचीन काल में भारतीय शिक्षण कला को प्रतिबिंबित करने वाला ऐसा दमकता स्तंभ होगा जो इस देश की शांति और अहिंसा की प्राचीन परंपरा को आधुनिक संसार में पुन: प्रचारित-संचारित करने में नए मील का पत्थर साबित होगा। नालंदा विश्वविद्यालय के स्ंस्थापक परामर्शदाता सदस्य और कुलपति नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने हाल ही 2015 में नई केंद्र सरकार के साथ कुछ मतभिन्नता के चलते इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल जुलाई 2015 तक था। इस बीच विदेश मंत्रालय ने 30 मई 2015 को नालंदा विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज ये के नाम की घोषणा की है जो अमर्त्य सेन का स्थान ग्रहण करेंगे। श्री ये विश्वविद्यालय की गतिशीलता को बनाए रखने में कारगर साबित होंगे। श्री ये को कुलपति बनाए जाने के बाद भारत सरकार के इस फैसले से यह संदेश संसार भर में जाने में सफल रहा कि विश्वविद्यालय का अंतरराष्ट्रीय चरित्र बना रहेगा।

विदेश मंत्रालय सक्रियता से इस विषय पर कार्य कर रहा है कि  वह पूर्व एशिया के देशों और उसके संगठन के साथ मिलकर कार्य कर रहा है और विश्वविद्यालय का अंतरराष्ट्रीय चरित्र बरकरार रखा जाएगा। भारत सरकार द्वारा पूर्व एशिया के छह देशों कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम को छह छात्रवृत्तियां प्रदान का फैसला करना इस दिशा में की गई नई पहल है जो अगस्त 2014 में म्यांमार के ने प्यी में आयोजित पूर्व एशिया देशों के मंत्रियों के सम्मेलन में घोषित की गई थी। वियतनाम पूर्व एशिया का 11वां देश है जो नालंदा विश्वविद्यालय के निर्माण में शामिल हुआ है। 2014 में पूर्व एशिया संगठन से अलग देश बांग्लादेश और भूटान भी नालंदा यूनिवर्सिटी से जुड़े।

नालंदा विश्वविद्यालय के लिए आस्ट्रेलिया ने एक मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान की है जिससे पर्यावरण और पारिस्थितिकी अध्ययन केंद्र का विकास किया जाएगा। जापान ने विश्वविद्यालय तक मुख्य संपर्क सड़क मार्ग के निर्माण के लिए न्यूनतम ब्याज देय ऋण प्रदान करने की घोषणा की है। कोरिया गणराज्य ने नालंदा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के निर्माण कराने की घोषणा की है। हाल ही में चीन, थाईलैंड और लाओस ने भी नालंदा विश्वविद्यालय के लिए अवदान प्रदान किए हैं। जापान, चीन और कोरिया ने नालंदा विश्वविद्यालय के अकादमिक समन्वयन का प्रस्ताव किया है।

नालंदा विश्वविद्यालय की शिल्पकार कंपनी एम/एस शिल्पा कंसल्टेंट ने मई 2014 तक विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस के निर्माण का लक्ष्य रखा था जो प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के शिल्प का ही विस्तार है। इस कैंपस के प्रारंभिक कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के बहुत सारे गुबंद चिन्हित हो चुके हैं। उम्मीद है प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का भारतीय दर्शन संसार को एक बार फिर संसार को शैक्षणिक रूप से आलोकित करेगा, जिसमें भारत की प्राचीन सभ्यता-संस्कृति, परंपरा और मान्यताओं को वैश्विक स्तर पर नई पीढ़ी को नई पहचान मिलेगी।

अंग्रेजी से अनुवाद-शशिकान्त सुशांत

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