…और नेहरू को राम के बराबर कर दिया!

Sanjaya Kumar Singh :  नेहरू–गांधी परिवार को पतित और खराब बताने वाला एक बहुत ही जानकारीपूर्ण और स्तरीय बताया जाने वाला लेख नई सरकार आने के बाद से खूब घूम रहा है और भिन्न तरीकों से मुझे कितनी ही बार पढ़ने को मिला है। उसमें आगे फॉर्वार्ड करने के लिए लिखा है और उसमें दिए गए ज्ञान से प्रभावित होकर लोग उसे फॉर्वार्ड भी कर रहे हैं। उससे देश में नेहरू परिवार के विरोधियों और उन्हें बुरा मानने वालों की संख्या का तो अंदाजा लगता ही है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो बगैर पढ़े और कुछ लोग फॉर्वार्ड करने की गंभीरता को समझे बगैर फार्वार्ड कर देते हैं। समस्या यह नहीं है कि नेहरू-गांधी परिवार को बुरा बताया जा रहा है या उसमें जो कहा गया है वह सही है कि नहीं। मैं मान लेता हूं सब सही है और नेहरू परिवार ग्यासुद्दीन से ही शुरू हुआ था और नहर किनारे रहने के कारण खुद को हिन्दू बनाने-बताने के लिए नेहरू हो गया। पर अब कहां है नेहरू। वह तो खत्म हो चुका। फिर उससे डर क्यों और निपटने का यह घटिया तरीका क्यों।

इस कथित पाप या अपराध करने वालों की कई पीढ़ियां गुजर चुकीं। उसका अब क्या करना है। अगर इसमें कानूनन कुछ किया जा सकता है तो किया जाए। क्यों नहीं किया जा रहा है। और कोई हिन्दू है या मुसलमान कहां-किसे फर्क पड़ता है। इसके अलावा, पीछे खबर आई थी कि विकीपीडिया पर यह जानकारी किसी सरकारी इंटरनेट कनेक्शन से बदली गई थी। मान लेता हूं कि यह भी मुद्दा नहीं है और अधिकृत थी इसलिए बदली गई। पर इससे क्या फर्क पड़ता है। अगर उपनाम बदलने की बात मान ही ली जाए तो इस संदेश के मुताबिक, जवाहर लाल नेहरू ही पांचवी पीढ़ी के हैं। निशाना, जाहिर है नेहरू के बाद की दो और उसके बाद की पीढ़ी के लोग हैं। अब इस संदेश को फैलाने वालों में कौन अपनी आठ पीढ़ियों के बारे में जानता है और उनके पंडित हिन्दू या पवित्र होने की गारंटी ले सकता है, अपना पुश्तैनी मकान जानता है – मुझे नहीं पता।

ग्यासुद्दीन शाह हत्यारे और काफिर सब थे। तो? आठ-नौ पीढ़ी बाद आप क्या चाहते हैं? यही ना कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने का अपना दावा छोड़ दे। मान लेता हूं, वह इस लायक नहीं है और आपके अपने अभियान में बहुत दम है। पर अपनी आठ पीढ़ी जरा सोच-जान लीजिए। कैसे जानेंगे? उसका तो जान भी सके, अपना कैसे जानेंगे। चलिए इसे भी छोड़ देते हैं – जो जानते हैं उसी की बात करते हैं। ये तो पता ही होगा कि प्रधानमंत्री होने के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। उनके बेटे राजीव गांधी की भी। माफी बनती है? नहीं ना। कोई बात नहीं। आगे बढ़ते हैं।

आजादी के बाद अंग्रेजों के जाने के बाद राजा तो रहे नहीं, उनकी संपत्ति भी नहीं रही। सब सरकार ने ले लिया। पर मोतीलाल नेहरू की संपत्ति आजादी के समय जितनी थी उस हिसाब से बढ़ी है क्या? मुझे तो नहीं लगता। वह भी तब जब हरेक पीढ़ी में बच्चे गिनती के ही रहे कोई फौज नहीं बनी। और तो और नेहरू जी की भी एक बेटी ही रही। और उन्होंने बेटी को इस लायक बनाया कि उसकी तारीफ अटल बिहारी वाजपेयी कर चुके हैं। और अटल बिहार वाजपेयी? उसे भी छोड़िए। विषयांतर हो जाउंगा। इंदिरा गांधी के काम-वाम प्रधानमंत्री बनना। चलिए उसे भी छोड़िए। आजकल सेल्फी विद डॉटर नामक आईडिया की तारीफ हो रही है। उस जमाने में नेहरू जी की एक ही बेटी थी। पत्नी के साथ रहने पर भी। कहने वाले कह सकते हैं कमला नेहरू बीमार हो गई थीं इसलिए बच्चा नहीं हुआ होगा। पर नेहरू जी ने बेटा पैदा करने के लिए दूसरी शादी तो नहीं ना की। हिन्दुस्तान में यह तो आम है। इसकी कोई तारीफ होनी चाहिए?

इस विद्वतापूर्ण आलेख के मुताबिक इलाहाबाद के आनंद भवन में कांग्रेस मुख्यालय है जबकि सच यह है कि आनंद भवन सरकार के कब्जे में है और एक पर्यटक स्थल है। कांग्रेस मुख्यालय तो नहीं ही है। यही नहीं, इसमें यह भी पूछा गया है कि, “पंडित जवाहर लाल नेहरु अगर कश्मीर का था तो आज कहाँ गया कश्मीर में वो घर आज तो वो कश्मीर में कांग्रेस का मुख्यालय होना चाहिए जिस प्रकार आनंद भवन कांग्रेस का मुख्यालय बना हुआ है इलाहाबाद में….।” आठ-नौ पीढ़ी पुराना घर ढूंढ़ना उनलोगों द्वारा जो अपने पिता-दादा का घर नहीं बता पाएंगे। और सबसे बड़ी बात आज कौन कश्मीरी होने का दावा कर रहा है। कश्मीरी होने की बात गलत है तो पुरानी है। खत्म हो गई। गलत दावा करने पर कोई सजा हो सकती है, मुकदमा चल सकता है तो चलाओ। इस तरह अफवाह फैलाने का क्या मतलब।

बहुचर्चित आलेख के मुताबिक, “चित्रकूट में भगवान श्री राम के पैरों के निशान मिले, लंका में रावण की लंका मिली, उसके हवाई अड्डे, अशोक वाटिका, संजीवनी बूटी वाले पहाड़ आदि बहुत कुछ …. समुद्र में भगवान श्री कृष्ण भगवान् द्वारा बसाई गई द्वारिका नगरी मिली, करोड़ों वर्ष पूर्व की डायनासोर के अवशेष मिले तो 150 वर्ष पुराना कश्मीर में नकली नेहरू का अस्तित्व ढूंढना क्या कठिन है। बिल्कुल नहीं। मान लिया नहीं है। आप ठीक बोल रहे हैं। पर ऐसा कहकर आपने तो खुद ही नेहरू को राम के बराबर ला दिया। नहीं ना। कोई बात नहीं लगे रहिए। पर विरोधी से निपटने के लिए आपलोग इतने घटिया हो जाएंगे, यह बता दिया। अच्छा कर रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से एक कमेंट यूं है…

Ratish Kumar Singh : ऐसे स्पैम को इतनी गंभीरता से क्यूँ लेते हैं, इतना कीमती वक्त जाया किया इसके पीछे. ऐसे कई पोस्ट मेरे देश के पिछले प्रधानमंत्री को रिमोट, मौनीबाबा और पता नहीं क्या-क्या कहते थें, वर्तमान को भी फेंकू कहते रहते हैं. मै किस-किस कि विवेचना करुँ, इतना वक्त किसके पास है.