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राज्यपाल के पोते की असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर अवैध नियुक्ति…..

मध्यप्रदेश के लाट साहब (राज्यपाल) और व्यापम के भर्ती और दाखिले घोटाले के आरोपी नंबर-10 रामनरेश यादव के भाई-भतीजावाद का नया मामला सामने आया है। उनके बेटे का बेटा यानी पोता उन ग्यारह लोगों की सूची में विराजमान हैं। जिन्हें भोपाल के बरकतुल्लाह विवि ने अवैध तरीके से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया है। भोपाल से प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी संवाददाता श्रुति तोमर की यह खबर आज पहले पेज पर दूसरी बड़ी खबर [सेकंड लीड] बना कर छापी है।

मध्यप्रदेश के लाट साहब (राज्यपाल) और व्यापम के भर्ती और दाखिले घोटाले के आरोपी नंबर-10 रामनरेश यादव के भाई-भतीजावाद का नया मामला सामने आया है। उनके बेटे का बेटा यानी पोता उन ग्यारह लोगों की सूची में विराजमान हैं। जिन्हें भोपाल के बरकतुल्लाह विवि ने अवैध तरीके से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया है। भोपाल से प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी संवाददाता श्रुति तोमर की यह खबर आज पहले पेज पर दूसरी बड़ी खबर [सेकंड लीड] बना कर छापी है।

 मजे की बात यह की राज्यपाल होने की हैसियत से रामनरेश यादव बरकतुल्लाह समेत मध्यप्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति [चांसलर] हैं और इस नाते इनमें कुलपतियों की नियुक्ति वे ही करते हैं। इससे भी अधिक दिलचस्प तथ्य यह की प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल को चिट्ठी लिख कर इन 11 अवैध नियुक्तियों के लिए बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ कार्रवाई करने और विस्तार से जांच कराने का अनुरोध किया है। इनमें राज्यपाल के पोते मनीष कुमार भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय सूत्रों का कहना है कि पोते के कारण ही राज्यपाल जांच और कार्रवाई से कतरा रहे हैं।
 इस सूत्र का यह भी कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग ने जून में ही राज्यपाल को पत्र लिख कर जांच और कार्रवाई का अनुरोध कर दिया था। राज्यपाल ने यह पत्र अगस्त में विश्वविद्यालय को भेजा..! विभाग ने पाया कि कुलपति ने बिना आवश्यक अनुमति के सितंबर-14 में यह नियुक्तियाँ कर डालीं..? इनमें से कुछ पद तो नए बनाए गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा है कि मप्र विवि अधिनियम के भाग-10 के तहत कुलपति एमडी तिवारी के खिलाफ कार्रवाई करें। विभाग ने इन असिस्टेंट प्रोफेसर्स के वेतन पर भी रोक लगा दी थी जिस पर वे हाईकोर्ट से स्टे ले आए हैं।
 विभाग का मानना है कि उक्त अवैध नियुक्तियाँ ताकतवर और पहुँच वालों के संबंधियों को भर्ती करने के लिए ही की गईं हैं। राज्यपाल का पोता मनीष कुमार भी इनमें से एक है। जैसा ऐसे मामलों मे होता आया है, पोताश्री ने फरमाया कि उसे यह पद काबिलियत के चलते मिला है राज्यपाल का पोता होने के कारण नहीं..? यद्दपि राज्यपाल ने इस मुद्दे पर चुप्पी अख़्तियार कर रखी है..! बताते चलें कि व्यापम मे आरोपी होते हुए भी राज्यपाल हाईकोर्ट के स्टे के कारण कार्रवाई से बचे हुए हैं। व्यापम घोटाले मे घिरे उनके एक पुत्र की रहस्यमय ढंग से मौत हो चुकी है।

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