कांग्रेस पर निशाना साधने वाले खुर्शीद के बयानों ने मचाई उथल -पुथल

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद लगता है कांग्रेस विचारधारा की लाइन से काफी अलग हट कर चल रहे हैं. हाल ही में उन्होंने यह तक कह दिया कि पार्टी के दामन पर खून के धब्बे हैं और लोकतंत्र भी खतरे में है. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अपना हश्र ऐसा मत करो कि 10 साल बाद कोई सवाल पूछने वाला भी ना मिले. तो वहीं कांग्रेस ने खुर्शीद के बयान से असहमति जताई है.

चलिए आपको बताते हैं कि दरअसल यह पूरा वाकया है क्या. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के आंबेडकर हॉल फंक्शन में एक छात्र आमिर द्वारा यह पूछने कि – मलियाना, हाशिमपुरा, मुजफ्फरनगर समेत ऐसे स्थानों की लम्बी फेहरिस्त है जहां कांग्रेस के शासनकाल में साम्प्रदायिक दंगे हुए. उसके बाद बाबरी मस्जिद का ताला खुलना और फिर उससे जुड़े बवाल, जो कांग्रेस के शासनकाल में ही शुरू हुए. कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के इन तमाम धब्बों को आप किन शब्दों के जरिये धोएंगे.

पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद ने कहा था,  “हमारे दामन पर खून के धब्बे हैं. कांग्रेस का मैं भी हिस्सा हूं तो मुझे मानने दीजिये कि हमारे दामन पर खून के धब्बे हैं.” खुर्शीद ने आगे कहा था, ‘”हम ये धब्बे दिखाएंगे ताकि तुम समझो कि ये धब्बे हम पर लगे हैं, लेकिन यह धब्बे तुम पर ना लगें. तुम वार इन पर करोगे, धब्बे तुम पर लगेंगे. हमारे इतिहास से सीखो और समझो. अपना हश्र ऐसा मत करो कि तुम 10 साल बाद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी आओ और आप जैसा कोई सवाल पूछना भी ना मिले.”

अब इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता पी एल पूनिया का कहना है कि खुर्शीद पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन जो बयान उन्होंने दिया है उससे कांग्रेस की असहमति है। उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार में समाज को बांटने की जो राजनीति हो रही है उसमें नेताओं को इस तरह के आधारहीन बयान नहीं देने चाहिए।

हालांकि पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या वे खुर्शीद पर कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही करेंगे. वैसे यह पहला मौक़ा नहीं है जब खुर्शीद के सुर पार्टी की राग से अलग हुए हैं. इससे पहले प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के ख़िलाफ राज्य सभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के पार्टी के रुख़ से भी उन्होंने ख़ुद को अलग कर लिया था और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को दी गई अर्ज़ी पर दस्तख़त करने से भी कथित तौर पर मना कर दिया था.