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…और संस्कारी जेम्स बॉन्ड ने फेंक दी गन

सोशल मीडिया में इन दिनों संस्कारी जेम्स बॉन्ड के बड़े चर्चे हैं। धोती, कुर्ता और ललाट पर टीका लगाए जेम्स बॉन्ड के फनी फोटो जमकर पोस्ट किए जा रहे हैं और बॉन्ड गर्ल जो अभी तक बिकनी में नजर आती थी उसे भी भारतीय साड़ी पहना दी गई। दरअसल अभी सेंसर बोर्ड ने बॉन्ड सीरिज की 24वीं फिल्म ‘स्पेक्टर’ के कई किसिंग सीन उड़ा दिए हैं। इयान फ्लेमिंग के उपन्यास पर बनने वाली जेम्स बॉन्ड की फिल्में पूरी दुनिया में धूम मचाती रही हैं और इनका एक बड़ा भारी दर्शक वर्ग है। भारत में भी जेम्स बॉन्ड की फिल्मों को जबरदस्त पसंद किया जाता रहा है। अभी रिलीज हुई बॉन्ड सीरिज की ‘स्पेक्टर’ हालांकि भारतीय दर्शकों को कम रास आएगी। अभी तक की सबसे लम्बी 148 मिनट की इस बॉन्ड फिल्म में ना तो हैरतअंगेज स्टंट हैं और ना ही चौंकाने वाले गजेट्स का इस्तेमाल किया गया है। और तो और लाइसेंस टू कील का अधिकारी बॉन्ड अंत में विलेन को मारने की बजाय अपनी गन ही फेंक देता है।

सोशल मीडिया में इन दिनों संस्कारी जेम्स बॉन्ड के बड़े चर्चे हैं। धोती, कुर्ता और ललाट पर टीका लगाए जेम्स बॉन्ड के फनी फोटो जमकर पोस्ट किए जा रहे हैं और बॉन्ड गर्ल जो अभी तक बिकनी में नजर आती थी उसे भी भारतीय साड़ी पहना दी गई। दरअसल अभी सेंसर बोर्ड ने बॉन्ड सीरिज की 24वीं फिल्म ‘स्पेक्टर’ के कई किसिंग सीन उड़ा दिए हैं। इयान फ्लेमिंग के उपन्यास पर बनने वाली जेम्स बॉन्ड की फिल्में पूरी दुनिया में धूम मचाती रही हैं और इनका एक बड़ा भारी दर्शक वर्ग है। भारत में भी जेम्स बॉन्ड की फिल्मों को जबरदस्त पसंद किया जाता रहा है। अभी रिलीज हुई बॉन्ड सीरिज की ‘स्पेक्टर’ हालांकि भारतीय दर्शकों को कम रास आएगी। अभी तक की सबसे लम्बी 148 मिनट की इस बॉन्ड फिल्म में ना तो हैरतअंगेज स्टंट हैं और ना ही चौंकाने वाले गजेट्स का इस्तेमाल किया गया है। और तो और लाइसेंस टू कील का अधिकारी बॉन्ड अंत में विलेन को मारने की बजाय अपनी गन ही फेंक देता है।

अमेरिका में तो जेम्स बॉन्ड सीरिज की यह ताजी फिल्म ‘स्पेक्टर’ कुछ समय पूर्व ही रिलीज हो गई, जिसमें अभी तक की बॉन्ड फिल्मों से अधिक शुरुआती कारोबार टिकट खिड़की पर कर लिया है। दरअसल बॉन्ड फिल्में सालों में बनती हैं, जिन पर अरबों रुपया खर्च किया जाता है। यह 24वीं फिल्म भी सबसे अधिक बजट की बॉन्ड फिल्म है और इसकी लम्बाई भी 148 मिनट रखी गई है। दरअसल बॉन्ड फिल्मों के शौकीन दुनियाभर के फिल्म दर्शक हैं और इन फिल्मों का बेसब्री से इंतजार भी किया जाता रहा है। इस फिल्म में जेम्स बॉन्ड का किरदार निभाने वाले डेनियल क्रेग की यह अंतिम बॉन्ड फिल्म है। अभी तक वे कुल 4 बॉन्ड फिल्मों में काम कर चुके हैं। दरअसल बॉन्ड फिल्मों के निर्माता-निर्देशकों ने पिछली फिल्मों में भी ये प्रयास किए कि बॉन्ड को रियलस्टिक बताया जाए। यानि वह कोई सुपर मेन नहीं है उसकी भी पिटाई हो सकती है और वह भी कई मोर्चों पर मात खा सकता है।

दरअसल वन मेन आर्मी की तर्ज पर अभी तक बॉन्ड दुश्मनों से लड़ता रहा। यानि पूरी एक फौज के खिलाफ ही अकेला लड़ता था। वह दुनिया के किसी भी मुल्क में घुसकर पूरी सरकार से अकेला लड़ लेता और दुश्मनों को ठिकाने लगाकर अपनी प्रेमिका के साथ लम्बी छुट्टी मनाने निकल पड़ता। इयान फ्लेमिंग ने जेम्स बॉन्ड का केरेक्टर अपने उपन्यासों में रचा, जिसे हॉलिवुड ने फिल्मों की शक्ल दी और दुनियाभर में 007 जेम्स बॉन्ड का केरेक्टर अत्यधिक लोकप्रिय हो गया। भारत में भी बॉन्ड प्रेमी कम नहीं हैं, लेकिन ‘स्पेक्टर’ देखकर अधिकांश को निराशा ही होगी। दरअसल बॉन्ड फिल्मों की खासियत यह है कि शुरू होने से लेकर द एण्ड तक बॉन्ड एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज कारनामे दिखाता है, जिनमें चौंकाने वाले स्टंटों की भरमार तो रहती ही है, वहीं बॉन्ड के गजेट्स जिनमें मोबाइल, कैमरे, घड़ी, नित नए हथियारों के साथ-साथ कई तरह की नई टेक्निक इस्तेमाल की जाती है, जिसे पर्दे पर देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह जाता है और इन सब में बॉन्ड की लक्जरी कार एस्टन मॉर्टिन का भी योगदान कम नहीं रहता।

बॉन्ड की हर फिल्मों में इस कार का अपग्रेड मॉडल पेश किया जाता है और इस कार में कई तरह के सुरक्षा उपकरण लगे रहते हैं। हालांकि स्पेक्टर में भी एस्टन मॉर्टिन का लेटेस्ट वर्जन डीबी-10 प्रस्तुत किया गया है, मगर जब बॉन्ड कार के डेश बोर्ड पर लगे एक बटन को दबाता है तो स्क्रीन पर यह लिखा हुआ आता है कि बुलेट्स यानि गोलियां ही नहीं हैं। हालांकि यह कार भी अपना कुछ कारनामा तो दिखाती ही है और अंत में हर फिल्म की तरह बर्बाद भी हो जाती है, लेकिन बॉन्ड का यह बदला हुआ स्वरूप हॉलीवुड में भले ही पसंद किया जाए, मगर बॉलीवुड यानि हमारे भारतीय दर्शकों को कम ही रास आएगा। इन दिनों सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी हैं, जो मोदी सरकार बनने के बाद उपकृत किए गए। उन्होंने इस बॉन्ड फिल्म के कई किसिंग सीन काट दिए। इसको लेकर जहां बोर्ड के अन्य सदस्य विरोध जता रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर भी इसका खूब मजाक बनाया जा रहा है। धोती-कुर्ता पहनाकर बॉन्ड को संस्कारी बताने वाली पोस्ट की सोशल मीडिया पर भरमार है।

ऐसा लगता है कि जेम्स बॉन्ड की इस फिल्म के निर्देशक सेम मेंडिस ने भी बॉन्ड को गांधीवादी बनाने के प्रयास किए हैं। यानि भरपूर हिंसा करने वाला बॉन्ड अब अहिंसा के रास्ते पर चल रहा है और फिल्म के अंत में जब विलेन उसके सामने होता है तब उसे शूट करने की बजाय जेम्स बॉन्ड अपनी गन फेंक देता है, जबकि यह दुनियाभर में मशहूर है कि जेम्स बॉन्ड को लाइसेंस टू किल यानि किसी की भी हत्या करने का अधिकार मिला हुआ है। बहरहाल स्पेक्टर बॉन्ड फिल्मों की तुलना में कम ही रोमांचित करती है और इस बार वे अनूठी लोकेशन भी कम ही तलाश की गई, जिनके लिए बॉन्ड फिल्में मशहूर रही हैं। इस फिल्म की शूटिंग भी हालांकि ऐसे कुछ स्थलों, जिनमें रोम, ऑस्ट्रिया, लंदन और मैक्सिको में की गई है। फिल्म की ब्रांड गर्ल मोनिका बेलुसी भी 50 साल उम्र की है, जिसके किसिंग सीन कट कर दिए गए और हां, ‘स्पेक्टर’ का मतलब होता है काली छाया या भविष्य के किसी बड़े संकट का अंदेशा होना…

लेखक राजेश ज्वेल जाने-माने हिन्दी पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक हैं. सम्पर्क – 098270-20830 Email : [email protected], [email protected]

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